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अमेरिका के नए वीजा नियमों ने बढ़ाई भारतीय छात्रों की टेंशन, बीच में छूट सकती है पढ़ाई

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 21 Jul, 2026 10:41 AM
अमेरिका के नए वीजा नियमों ने बढ़ाई भारतीय छात्रों की टेंशन, बीच में छूट सकती है पढ़ाई

नारी डेस्क:  अमेरिका में पढ़ाई का सपना देखने वाले हजारों भारतीय छात्रों के लिए आने वाले महीनों में नई चुनौती खड़ी हो सकती है। अमेरिकी सरकार की ओर से प्रस्तावित नए छात्र वीजा नियमों को लेकर प्रवासी भारतीयों के एक प्रमुख नीति समूह ने गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि यदि ये नियम लागू होते हैं तो कई अंतरराष्ट्रीय छात्रों, खासकर भारतीय छात्रों को अपनी पढ़ाई या रिसर्च पूरी होने से पहले ही अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है।

15 सितंबर से लागू हो सकते हैं नए नियम

जानकारी के मुताबिक, अमेरिका में एफ-1 (F-1) और जे-1 (J-1) वीजा पर रहने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अधिकतम चार वर्ष की समय सीमा तय करने का प्रस्ताव है। यदि यह नियम 15 सितंबर से लागू होता है, तो उन छात्रों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है जिनके कोर्स या शोध कार्य को पूरा होने में चार साल से अधिक समय लगता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई स्नातकोत्तर और शोध कार्यक्रम तय अवधि से अधिक समय लेते हैं। ऐसे में छात्रों को पढ़ाई अधूरी छोड़ने या फिर वीजा विस्तार की जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।

भारतीय नीति समूह ने नियम रोकने की उठाई मांग

प्रवासी भारतीयों के नीति संगठन फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड Indian Diaspora Studies (FIIDS) ने इन प्रस्तावित नियमों का विरोध करते हुए अमेरिकी सांसदों और यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) से इन्हें तत्काल रोकने की अपील की है। संगठन के पॉलिसी प्रमुख खंडेराव कंद का कहना है कि चार साल की समय सीमा वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। उनका तर्क है कि अमेरिका में स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी करने में औसतन 52 महीने लगते हैं, जबकि पीएचडी जैसे शोध कार्यक्रमों में औसतन 5.7 वर्ष का समय लगता है। ऐसे में तय की गई चार साल की सीमा हजारों छात्रों के भविष्य पर असर डाल सकती है।

भारतीय छात्रों पर सबसे अधिक पड़ सकता है असर

अमेरिका में पढ़ाई करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। हर वर्ष करीब 3.63 लाख भारतीय छात्र उच्च शिक्षा और रिसर्च के लिए अमेरिका जाते हैं। कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 31 प्रतिशत बताई जाती है। यदि नए नियम लागू होते हैं, तो इसका सबसे बड़ा प्रभाव भारतीय छात्रों पर पड़ने की आशंका है। कई छात्र ऐसे पाठ्यक्रमों में दाखिला लेते हैं जिनकी अवधि चार साल से अधिक होती है या शोध कार्य के कारण पढ़ाई लंबी हो जाती है।

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पहले से घट रहे हैं अंतरराष्ट्रीय छात्रों के दाखिले

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के दौरान शुरू हुई सख्त आव्रजन नीतियों का असर पहले ही अंतरराष्ट्रीय छात्रों के दाखिलों पर दिखाई दे चुका है। हालिया फॉल सेमेस्टर में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नामांकन में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर केवल विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा। अनुमान है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या घटने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को करीब 1.1 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है और लगभग 23 हजार नौकरियां भी प्रभावित हुई हैं।

USCIS पर पहले से लंबित हैं करोड़ों मामले

FIIDS का कहना है कि अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी USCIS के पास पहले से ही लगभग 1.1 करोड़ आवेदन लंबित हैं। ऐसे में यदि छात्रों को बार-बार वीजा विस्तार के लिए आवेदन करना पड़ा, तो पूरी प्रक्रिया और अधिक जटिल हो जाएगी। संगठन का मानना है कि मौजूदा लंबित मामलों को निपटाने में ही लंबा समय लग सकता है।

अमेरिकी सरकार का क्या है पक्ष

अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य वीजा प्रणाली के दुरुपयोग को रोकना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है। विभाग का मानना है कि निश्चित समय सीमा तय होने से वीजा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। हालांकि, शिक्षा विशेषज्ञों और नीति विश्लेषकों का कहना है कि सुरक्षा और शिक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि योग्य छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

FIIDS ने दिए ये सुझाव

नीति समूह ने अमेरिकी प्रशासन के सामने कुछ अहम सुझाव भी रखे हैं। संगठन ने मांग की है कि जिन छात्रों का शैक्षणिक रिकॉर्ड अच्छा है, उन्हें वीजा विस्तार की सुविधा स्वतः मिलनी चाहिए। इसके अलावा वीजा विस्तार से जुड़े आवेदनों का तेजी से निपटारा किया जाए और पढ़ाई पूरी करने के बाद मिलने वाली 30 दिन की ग्रेस पीरियड को फिर से बढ़ाकर 60 दिन किया जाए, ताकि छात्रों को आगे की प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

भारत सरकार भी रख रही है नजर

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और भारतीय छात्रों तथा यात्रियों को होने वाली संभावित परेशानियों को कम करने के लिए अमेरिकी सरकार के साथ लगातार संपर्क में है। मंत्रालय का कहना है कि भारतीय छात्रों के हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।
 

 

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