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मानसून में दीमक से रहें सावधान! ये छोटी-छोटी गलतियां पड़ सकती हैं भारी

  • Edited By Monika,
  • Updated: 10 Jul, 2026 01:55 PM
मानसून में दीमक से रहें सावधान! ये छोटी-छोटी गलतियां पड़ सकती हैं भारी

नारी डेस्क :  बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन अपने साथ कई परेशानियां भी लेकर आता है। लगातार बारिश की वजह से घर में नमी और सीलन बढ़ जाती है, जो दीमक (Termites) के पनपने के लिए आदर्श वातावरण बनाती है। एक बार दीमक लग जाए तो यह लकड़ी के फर्नीचर, दरवाजों, खिड़कियों, अलमारियों और अन्य लकड़ी के सामान को अंदर ही अंदर खोखला कर सकती है। अगर आप चाहते हैं कि मानसून में आपका घर और फर्नीचर सुरक्षित रहे, तो इन जरूरी बातों का ध्यान रखें।

सबसे पहले दूर करें नमी और पानी का रिसाव

दीमक को सबसे ज्यादा नमी वाली जगह पसंद होती है। इसलिए घर में कहीं भी छत से पानी टपक रहा हो, दीवारों में सीलन हो, पाइप या नल लीक कर रहे हों, तो उन्हें तुरंत ठीक कराएं। जितनी कम नमी होगी, दीमक के पनपने की संभावना भी उतनी ही कम होगी।

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घर में रखें अच्छा वेंटिलेशन

बाथरूम, स्टोर रूम और बेसमेंट जैसी जगहों पर अक्सर सीलन बनी रहती है। इन स्थानों पर एग्जॉस्ट फैन का इस्तेमाल करें और मौसम साफ होने पर खिड़कियां खोलकर ताजी हवा आने दें। इससे नमी कम होगी और दीमक लगने का खतरा भी घटेगा।

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लकड़ी के फर्नीचर को सही तरीके से रखें

अगर घर में लकड़ी का फर्नीचर है, तो उसे दीवार या गीले फर्श से बिल्कुल सटाकर न रखें। फर्नीचर और दीवार के बीच थोड़ा गैप छोड़ें ताकि हवा का आवागमन बना रहे।
साथ ही समय-समय पर फर्नीचर की सफाई करें।
एंटी-टर्माइट पॉलिश या वार्निश करवाएं।
लंबे समय तक नमी जमा न होने दें।

इन चीजों को फर्श पर रखने से बचें

पुराने अखबार, गत्ते के डिब्बे, लकड़ी के टुकड़े और बेकार सामान नमी सोख लेते हैं, जिससे दीमक तेजी से आकर्षित होती है। यदि इन्हें रखना जरूरी हो, तो धातु की रैक पर रखें और नियमित सफाई करते रहें।

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घर के आसपास भी रखें सफाई

घर की दीवारों के पास लकड़ी के टुकड़े, सूखे पत्ते, मिट्टी का ढेर या कचरा जमा न होने दें। यह दीमक के लिए घर तक पहुंचने का आसान रास्ता बन सकता है। साथ ही खिड़कियों, दरवाजों और वेंटिलेशन वाली जगहों पर महीन जाली लगाना भी फायदेमंद रहता है।

शुरुआती स्तर पर आजमा सकते हैं ये घरेलू उपाय

अगर दीमक की समस्या शुरुआती अवस्था में है, तो सीमित रूप से इन घरेलू उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है। नीम का तेल, संतरे का तेल, सफेद सिरका और नींबू का मिश्रण हालांकि, ये उपाय केवल हल्की समस्या में ही कुछ हद तक मदद कर सकते हैं। गंभीर संक्रमण होने पर इन पर निर्भर रहना सही नहीं है।

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दीमक के इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

यदि आपको घर में ये संकेत दिखाई दें, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
दीवारों पर मिट्टी की पतली सुरंगें दिखाई देना।
लकड़ी थपथपाने पर खोखली आवाज आना।
फर्नीचर में छोटे-छोटे छेद नजर आना।
खिड़कियों या दरवाजों के पास दीमक के पंख दिखाई देना।
ये सभी गंभीर दीमक संक्रमण के संकेत हो सकते हैं।

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कब लें पेस्ट कंट्रोल की मदद?

अगर दीमक पूरे घर या फर्नीचर में फैल चुकी है, तो घरेलू उपायों की बजाय किसी अनुभवी पेस्ट कंट्रोल विशेषज्ञ से जांच और एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट कराना सबसे बेहतर विकल्प है। समय पर इलाज कराने से फर्नीचर और घर को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।

मानसून में थोड़ी-सी सावधानी आपके घर और महंगे लकड़ी के फर्नीचर को दीमक से बचा सकती है। घर को सूखा रखें, साफ-सफाई का ध्यान दें, नमी खत्म करें और शुरुआती संकेत मिलते ही तुरंत कार्रवाई करें। इससे दीमक की समस्या बढ़ने से पहले ही रोकी जा सकती है।

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