नारी डेस्क: नई दिल्ली में बदलते मौसम के बीच फ्लू (इन्फ्लूएंजा) के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। बारिश के बाद बड़ी संख्या में लोग खांसी, जुकाम, गले में दर्द और बुखार जैसी शिकायतों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इस बार सामान्य वायरल बुखार के मामलों में भी स्वाइन फ्लू (एच1एन1) का संक्रमण ज्यादा सामने आ रहा है। कुछ मरीजों में संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचने और सांस लेने में परेशानी होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। वहीं, अस्पतालों में कोरोना के कुछ मामले भी सामने आए हैं। ऐसे में विशेषज्ञ लोगों को सावधानी बरतने और संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
वायरल बुखार के मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि
जुलाई के दूसरे सप्ताह में बारिश के बाद मौसम में बदलाव आया, जिसके बाद अस्पताल में इन्फ्लूएंजा ए के मरीजों की संख्या बढ़ी है। इन दिनों खांसी, जुकाम, गले में दर्द और तेज बुखार की शिकायत लेकर आने वाले ज्यादातर मरीजों में इन्फ्लूएंजा संक्रमण पाया जा रहा है। जांच में करीब 50 फीसदी मामलों में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) की पुष्टि हो रही है, जबकि लगभग 25 फीसदी मरीजों में एच3एन2 संक्रमण देखा जा रहा है। बाकी मरीजों में इन्फ्लूएंजा बी के मामले सामने आ रहे हैं। स्वाइन फ्लू से संक्रमित कुछ मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है। इनमें अधिकतर मरीज 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के हैं। इसके अलावा कोरोना संक्रमण का एक मरीज भी अस्पताल में भर्ती हुआ है।

फेफड़ों तक पहुंच रहा संक्रमण, कुछ मरीजों को भर्ती करने की जरूरत
स्वाइन फ्लू के लक्षणों के साथ कई मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। कुछ मरीजों में संक्रमण बढ़कर फेफड़ों तक पहुंच गया, जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। उन्होंने बताया कि फिलहाल तीन मरीजों को फेफड़ों में संक्रमण के कारण भर्ती किया गया था, जिनमें से एक मरीज अभी भी अस्पताल में इलाज करा रहा है।
स्वाइन फ्लू और कोरोना के लक्षणों में समानता
इस समय वायरल बुखार से पीड़ित कई मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो रही है। हालांकि कोरोना के मामले भी सामने आए हैं, लेकिन फिलहाल लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू और कोरोना दोनों के शुरुआती लक्षण काफी हद तक एक जैसे हो सकते हैं। इनमें खांसी, जुकाम, सिर दर्द, बुखार, पेट दर्द, उल्टी-दस्त और कमजोरी जैसी परेशानियां शामिल हैं। संक्रमण गंभीर होने पर सांस लेने में दिक्कत भी हो सकती है।
किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत
डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को संक्रमण से बचने के लिए ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। खास तौर पर मधुमेह, हाइपरटेंशन, किडनी की बीमारी, हृदय रोग, अस्थमा और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों में संक्रमण बढ़ने का खतरा अधिक हो सकता है।

फ्लू और संक्रमण से बचाव के लिए डॉक्टरों की सलाह
डॉक्टरों ने लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है खांसी, जुकाम या वायरल बुखार होने पर कम से कम तीन दिन तक अलग कमरे में रहें। घर में बच्चे, बुजुर्ग या गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग हों तो उनसे दूरी बनाए रखें। नियमित रूप से हाथ धोते रहें और साफ-सफाई का ध्यान रखें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और पौष्टिक भोजन लें। ज्यादा खांसी-जुकाम होने पर भाप ले सकते हैं। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल करें।
डॉक्टरों ने कहा- सावधानी ही बचाव है
विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में बदलाव के दौरान वायरल संक्रमण तेजी से फैलता है। ऐसे में लापरवाही करने के बजाय शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। खासकर कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को संक्रमण से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।