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बार- बार सुन्न हो रहे हैं हाथ- पैर, तो समझ लो Nerves हो गई डैमेज और मंडरा रहा Stroke का खतरा

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 11 Jun, 2026 10:08 AM
बार- बार सुन्न हो रहे हैं हाथ- पैर, तो समझ लो Nerves हो गई डैमेज और मंडरा रहा Stroke का खतरा

नारी डेस्क: अकसर हम महसूस करते हैं कि  कुर्सी पर ज्यादा देर हाथ रखने से वह सुन्न हो जाता है। पालथी मारकर ज़्यादा देर तक बैठने पर पैर में झुनझुनी होने लगती है। आम तौर पर यह एहसास कुछ ही मिनटों में चला जाता है और जिंदगी चलती रहती है। बहुत से लोग इन लक्षणों को थकान, गलत पोस्चर या बस "उम्र बढ़ने" का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार इससे नर्वस सिस्टम किसी गंभीर समस्या की चेतावनी दे रहा है। 

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नसें देती हैं ये इशारा

नर्वस सिस्टम बिजली के तारों के एक बड़े नेटवर्क की तरह काम करता है जो दिमाग, रीढ़ की हड्डी और शरीर के हर हिस्से को जोड़ता है। यह लगातार ऐसे संदेश भेजता है जिनसे लोग हिल-डुल सकते हैं, महसूस कर सकते हैं सोच सकते हैं और प्रतिक्रिया दे सकते हैं।  अगर बीमारी या किसी बाहरी वजह से नसों, रीढ़ की हड्डी या दिमाग को चोट पहुंचती है तो अंगों तक असामान्य इलेक्ट्रिकल सिग्नल जा सकते हैं, जिससे झुनझुनी, जलन, सुन्नपन या बिजली का झटका लगने जैसा महसूस हो सकता है। आसान शब्दों में कहें तो, जब नसें परेशान होती हैं, डैमेज हो जाती हैं, दब जाती हैं या ठीक से काम नहीं कर पातीं  तो वे दिमाग को गलत सिग्नल भेज सकती हैं। इसके नतीजे में झुनझुनी, जलन, सुन्नपन, रेंगने जैसा एहसास या अचानक तेज दर्द हो सकता है, जिसका कोई साफ कारण समझ नहीं आता।


 हल्के-फुल्के होते हैं इसके लक्षण

मुश्किल बात यह है कि ये लक्षण अक्सर बहुत हल्के-फुल्के तरीके से शुरू होते हैं। हो सकता है कि किसी व्यक्ति को सोते समय पैरों की उंगलियों में कभी-कभी झुनझुनी महसूस हो या दिन भर के काम के बाद उंगलियों के पोरों में हल्की जलन हो। लेकिन समय के साथ, ये लक्षण बार-बार हो सकते हैं और इन्हें नजरअंदाज़ करना मुश्किल हो सकता है। लगातार झुनझुनी और जलन वाले दर्द के सबसे आम न्यूरोलॉजिकल कारणों में से एक है 'पेरिफेरल न्यूरोपैथी', जो शरीर की पेरिफेरल नसों (परिधीय तंत्रिकाओं) को प्रभावित करती है। अमेरिकी सरकार के 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स एंड स्ट्रोक' (NINDS) के अनुसार, पेरिफेरल न्यूरोपैथी तब होती है जब मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के बाहर की नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे शरीर और नर्वस सिस्टम के बीच सामान्य संचार बाधित हो जाता है। इसके आम लक्षणों में दर्द, झुनझुनी, जलन, सुन्नपन और मांसपेशियों की कमजोरी शामिल हैं।

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इन लक्षणों को ना लें हल्के में 

चेतावनी के अन्य लक्षणों में ये शामिल हो सकते हैं लगातार सिरदर्द, दौरे पड़ना, देखने में बदलाव, संतुलन की समस्याएं, व्यक्तित्व में बदलाव हाथ या पैर में कमज़ोरी। सबसे ज़रूरी बात यह है कि सिर्फ़ झुनझुनी होने का मतलब यह नहीं है कि किसी को ब्रेन ट्यूमर है। हालांकि, न्यूरोलॉजिस्ट इस बात पर ज़ोर देते हैं कि बिना किसी साफ वजह के दिखने वाले न्यूरोलॉजिकल लक्षणों की ठीक से जांच होनी चाहिए, न कि अंदाज़ा लगाना चाहिए। एक और मेडिकल इमरजेंसी जिसमें अचानक सुन्नपन या झुनझुनी हो सकती है, वह है स्ट्रोक। डॉक्टर कहते हैं- "शरीर के एक हिस्से में झुनझुनी और सुन्नपन इस बात का संकेत हो सकता है कि व्यक्ति को स्ट्रोक हो रहा है, खासकर अगर मरीज़ को चेहरे का लकवा, बोलने में साफ़-साफ़ दिक्कत, भ्रम की स्थिति और चलने-फिरने या शरीर के अंगों को हिलाने-डुलाने में परेशानी हो रही हो।" ऐसे मामलों में, तुरंत मेडिकल मदद लेना बहुत ज़रूरी है।

न्यूरोलॉजिस्ट को कब दिखाना चाहिए

कई न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का इलाज शुरुआती दौर में आसानी से हो जाता है। इसलिए, लगातार बने रहने वाले लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज़ नहीं करना चाहिए। अगर झुनझुनी, सुन्नपन और जलन वाला दर्द कई हफ़्तों तक परेशान करता रहे और रोजमर्रा के कामों या सोने के तरीके पर असर डाले, तो न्यूरोलॉजिकल जांच करवानी चाहिए।  अगर इन लक्षणों के साथ ये समस्याएं भी हों, तो तुरंत जाच करवानी चाहिए जैसे: कमज़ोरी, चलने में दिक्कत, शरीर के अंगों के तालमेल में कमी, याददाश्त की समस्याएं, देखने में दिक्कत, बार-बार सिरदर्द। असली वजह का पता लगाने के लिए, डॉक्टर ब्लड टेस्ट, नर्व कंडक्शन स्टडीज़ (NCS), इलेक्ट्रोमायोग्राफ़ी (EMG), दिमाग या रीढ़ की हड्डी का MRI स्कैन करवाने की सलाह दे सकते हैं।  अच्छी बात यह है कि कई न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का इलाज या उन्हें कंट्रोल प्रभावी ढंग से किया जा सकता है, अगर उनका पता जल्दी चल जाए।

नोट: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है।
 

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