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कोलकाता पुलिस की वर्दी सफेद क्यों होती है? जानिए इसके पीछे की दिलचस्प वजह

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 29 Apr, 2026 04:20 PM
कोलकाता पुलिस की वर्दी सफेद क्यों होती है? जानिए इसके पीछे की दिलचस्प वजह

नारी डेस्क: जब भी पुलिस की बात होती है, हमारे दिमाग में सबसे पहले खाकी वर्दी की तस्वीर उभरती है। फिल्मों से लेकर असल जिंदगी तक, खाकी रंग ही पुलिस की पहचान बन चुका है। लेकिन अगर आप कोलकाता की सड़कों पर नजर डालें तो यहां का नजारा थोड़ा अलग दिखता है। यहां पुलिसकर्मी सफेद वर्दी में नजर आते हैं, जो उन्हें बाकी राज्यों से अलग पहचान देती है। आखिर ऐसा क्यों है, आइए इसे विस्तार में बताते हैं इस आर्टिकल में......

इतिहास से जुड़ी है सफेद वर्दी की परंपरा

कोलकाता पुलिस की सफेद वर्दी का इतिहास काफी पुराना है। इसकी शुरुआत ब्रिटिश शासन के समय से मानी जाती है। 17वीं सदी के अंत में जब अंग्रेज इस क्षेत्र में आए और धीरे-धीरे प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की, तब एक संगठित पुलिस बल की जरूरत महसूस हुई। साल 1845 में कोलकाता पुलिस की औपचारिक स्थापना हुई। उसी समय ब्रिटिश अधिकारियों ने इस पुलिस बल को एक अलग पहचान देने के लिए सफेद वर्दी को चुना। यह परंपरा तब से चली आ रही है और आज भी बरकरार है।

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मौसम भी एक बड़ी वजह

कोलकाता का मौसम गर्म और उमस भरा होता है, खासकर गर्मियों में यहां बाहर काम करना आसान नहीं होता। ऐसे में वर्दी का रंग भी काफी मायने रखता है। वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो सफेद रंग सूरज की किरणों को परावर्तित करता है, जिससे शरीर कम गर्म होता है। इसके विपरीत, खाकी जैसे गहरे रंग ज्यादा गर्मी को सोख लेते हैं। इसलिए लंबे समय तक बाहर ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों के लिए सफेद वर्दी ज्यादा आरामदायक मानी गई।

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शहर पुलिस और राज्य पुलिस में फर्क

कोलकाता पुलिस और पश्चिम बंगाल पुलिस के बीच अंतर समझने के लिए भी वर्दी का रंग अहम भूमिका निभाता है।जहां कोलकाता पुलिस सफेद वर्दी पहनती है, वहीं पश्चिम बंगाल की राज्य पुलिस खाकी वर्दी में नजर आती है। इससे आम लोगों को आसानी से पता चल जाता है कि कौन सा पुलिसकर्मी शहर पुलिस से जुड़ा है और कौन राज्य पुलिस से।

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खाकी वर्दी की अपनी कहानी

अब सवाल उठता है कि बाकी भारत में खाकी वर्दी ही क्यों प्रचलित है। इसकी शुरुआत भी ब्रिटिश काल में ही हुई थी। साल 1847 में अंग्रेज अधिकारी हैरी लम्सडेन ने खाकी वर्दी को अपनाया। इसके पीछे एक व्यावहारिक कारण था सफेद वर्दी जल्दी गंदी हो जाती थी, जबकि खाकी रंग धूल, मिट्टी और दाग-धब्बों को आसानी से छुपा लेता है। यही वजह है कि धीरे-धीरे पूरे देश में खाकी वर्दी पुलिस की पहचान बन गई।

पहचान बनी परंपरा

आज कोलकाता पुलिस की सफेद वर्दी सिर्फ एक ड्रेस कोड नहीं, बल्कि शहर की पहचान बन चुकी है। यह परंपरा इतिहास, मौसम और प्रशासनिक जरूरतों का एक अनोखा मिश्रण है, जो इसे बाकी राज्यों से अलग बनाता है। इस तरह देखा जाए तो कोलकाता की सड़कों पर दिखने वाली सफेद वर्दी सिर्फ रंग का फर्क नहीं, बल्कि एक लंबी कहानी का हिस्सा है।
 

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