
नारी डेस्क: प्रसिद्ध भजन गायक Narendra Chanchal को भला कौन नहीं जानता। उनके गाए हुए कुछ मशहूर भक्ति गीत - 'चलो बुलावा आया है', 'तूने मुझे बुलाया शेरोवालिए', 'अम्बे तू है जगदम्बे काली' आज भी ये घर-घर में सुनाई देते हैं। नवरात्रि के खास मौके पर तो यह गीत हर तरफ सुनने को मिलते हैं। उन्होंने फिल्मों में कई भक्ति गाने गाए लेकिन एक दौर ऐसा भी आया था जब मशहूर सिंगर का घमंड उन पर भारी पड़ गया और इसकी उन्हें बड़ी सजा भुगतनी पड़ी।
सफलता के बाद आया मुश्किल समय
1970 के दशक में जब उन्हें Narendra Chanchal बॉलीवुड में पहचान मिलने लगी, तो उनका करियर तेजी से आगे बढ़ रहा था। लेकिन इसी दौरान उनकी आवाज़ पर असर पड़ने लगा और कुछ समय के लिए उन्होंने अपनी गायकी की ताकत खो दी। नरेंद्र चंचल ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें अपनी सफलता पर घमंड हो गया था, वे भजन गायकी से दूर हो गए थे। और यही वजह उनकी आवाज़ जाने का कारण बनी। वे इसे एक तरह से “ईश्वर की चेतावनी” या “दिव्य दंड” मानते थे।
सिंगर को आ गया था घमंड
दरअसल, फिल्मों में काम मिलने के बाद उन्होंने मन बना लिया था कि वह अब भजन और माता के गीत नहीं गाएंगे। उन्होंने कहा था- ”मुझे फिल्मी गानों से पैसा और शोहरत मिल रही थी, मैंने फैसला कर लिया था कि अब भजन नही, सिर्फ फिल्मी गीत गाऊंगा. सफलता का नशा सिर पर चढ़ गया था। नरेंद्र चंचल ने बताया-”एक दिन में फिल्म म्यूजिक नाइट के लिए आगरा जा रहा था, उससे पहले काली माता के मंदिर माथा टेकने गया। वहां कुछ भक्त भजन-कीर्तन कर रहे थे. उन्होंने मुझसे एक भजन गाने के लिए कहा, मैंने तबीयत खराब होने का बहाना बनाया और गाए बिना वहां से चला गया, लेकिन उस रात ऐसा चमत्कार हुआ कि मेरी आवाज ही चली गई. मैं समझ गया कि माता रानी की मेरी गलती और अहंकार की सजा दे रही है.”।
माता से मांगी थी माफी
कई महीनों तक इलाज चलने के बाद वो ठीक हुए. जिसके बाद उन्होंने कभी फिल्मी गाने ना गाने का प्रण लिया, फिल्मों भी अगर गाएंगे तो वो भक्ति गीत ही होंगे। इस घटना के बाद उन्होंने खुद को आध्यात्मिक रूप से मजबूत किया। नरेंद्र चंचल की कहानी यह सिखाती है कि अपनी जड़ों को कभी न भूलें, अहंकार से बचें और अपने काम के प्रति सच्चे रहें। कभी-कभी जीवन हमें रोककर सही रास्ता दिखाता है।