नारी डेस्क: सिरदर्द एक ऐसी समस्या है जिससे लगभग हर व्यक्ति कभी न कभी गुजरता है। ज्यादातर मामलों में इसकी वजह तनाव, नींद की कमी, शरीर में पानी की कमी, लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल या फिर अत्यधिक थकान होती है। ऐसे सिरदर्द आमतौर पर आराम करने, पर्याप्त पानी पीने और जरूरत पड़ने पर दवा लेने से ठीक हो जाते हैं। लेकिन यदि सिरदर्द बार-बार होने लगे, पहले से अलग महसूस हो या लगातार बढ़ता जाए, तो इसे हल्के में लेना सही नहीं है। कई बार यह किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।
क्या हमेशा तेज सिरदर्द ही ब्रेन ट्यूमर का पहला लक्षण होता है
अक्सर लोगों की धारणा होती है कि ब्रेन ट्यूमर की शुरुआत असहनीय सिरदर्द से होती है, जबकि वास्तविकता इससे काफी अलग है। कई मरीजों में शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि उन्हें तनाव, बढ़ती उम्र या काम के दबाव का असर समझ लिया जाता है। यही कारण है कि बीमारी की पहचान समय पर नहीं हो पाती। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेन ट्यूमर के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि ट्यूमर दिमाग के किस हिस्से में है, उसका आकार कितना है और वह कितनी तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए हर मरीज में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं।

शुरुआत में दिखाई दे सकते हैं ये छिपे हुए संकेत
ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती दौर में कई लोगों को याददाश्त कमजोर होने लगती है। उन्हें छोटी-छोटी बातें भूलने, किसी काम पर ध्यान केंद्रित करने या सामान्य निर्णय लेने में परेशानी महसूस हो सकती है। कुछ मरीजों के व्यवहार में अचानक बदलाव आने लगता है। वे पहले की तुलना में ज्यादा चिड़चिड़े हो सकते हैं या सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाने लगते हैं। कई मामलों में बोलने में कठिनाई, सही शब्द खोजने में परेशानी या बातचीत के दौरान बार-बार रुकना भी शुरुआती संकेत हो सकते हैं। वहीं कुछ लोगों को धुंधला दिखना, डबल विजन या देखने की क्षमता में बदलाव महसूस होने लगता है।
शरीर के संतुलन और कमजोरी को भी नजरअंदाज न करें
यदि किसी व्यक्ति को चलते समय बार-बार संतुलन बिगड़ने लगे, बिना किसी कारण गिरने लगे या हाथ-पैरों में कमजोरी महसूस हो, तो यह भी दिमाग से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। कुछ मरीजों में अचानक दौरे (सीजर) पड़ना भी ब्रेन ट्यूमर का शुरुआती लक्षण बन सकता है, खासकर तब जब पहले कभी ऐसी समस्या न हुई हो।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए
हर सिरदर्द ब्रेन ट्यूमर का संकेत नहीं होता, लेकिन कुछ परिस्थितियों में तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है। यदि सिरदर्द लगातार बढ़ रहा हो, बार-बार हो रहा हो, रात में नींद से जगा दे या पहले की तुलना में बिल्कुल अलग महसूस हो रहा हो, तो इसकी जांच करानी चाहिए। इसके अलावा यदि सिरदर्द के साथ उल्टी, धुंधला दिखना, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, भ्रम, बोलने में दिक्कत, संतुलन बिगड़ना या अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

परिवार सबसे पहले पहचान सकता है बदलाव
ब्रेन ट्यूमर के कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें मरीज से पहले उसके परिवार के सदस्य महसूस कर लेते हैं। यदि किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव आ जाए, वह पहले की तुलना में ज्यादा गुस्सैल हो जाए, लोगों से मिलना-जुलना कम कर दे या बार-बार सामान्य बातें भूलने लगे, तो इसे केवल मानसिक तनाव मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते जांच कराने से बीमारी का पता जल्दी चल सकता है और इलाज की संभावना बेहतर हो सकती है।
क्या ब्रेन ट्यूमर से बचाव संभव है
फिलहाल ब्रेन ट्यूमर को पूरी तरह रोकने का कोई निश्चित तरीका उपलब्ध नहीं है। हालांकि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज न किया जाए। यदि लगातार सिरदर्द के साथ अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी दिखाई दें, तो समय रहते जांच और विशेषज्ञ की सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित कदम माना जाता है। शुरुआती पहचान से इलाज अधिक प्रभावी हो सकता है और गंभीर जटिलताओं का खतरा भी कम किया जा सकता है.