नारी डेस्क: सीता नवमी , जिसे जानकी जयंती भी कहा जाता हैं , बता दे कि यह माता सीता जी के जन्म उत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह दिन माता लक्ष्मी जी प्रसन्न करने लिए बेहद ही खास माना जाता हैं। ऐसा इस लिए माना जाता हैं क्यों की सीता जी लक्ष्मी स्वरूपा हैं। बता दे कि यह त्योहार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन मिथिला के राजा जनक को खेत में हल चलाते समय धरती से माता सीता प्राप्त हुई थीं। इसे 'पृथ्वी पुत्री' का जन्म और उनके त्याग, समर्पण व आदर्शों का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है। ऐसे में सीता नवमी का मुहूर्त, विधि सब हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे।
माता सीता का जन्म कैसे हुआ
धार्मिक कथाओं के अनुसार माता सीता का जन्म सामान्य तरीके से नहीं हुआ था। उन्हें “अयोनिजा” कहा जाता है, यानी वे गर्भ से नहीं बल्कि पृथ्वी से प्रकट हुई थीं। कहा जाता है कि वैशाख शुक्ल नवमी के दिन राजा जनक खेत जोत रहे थे, तभी उन्हें धरती से एक दिव्य कन्या मिली। उन्होंने उस बालिका को अपनी पुत्री के रूप में अपनाया, वही आगे चलकर माता सीता के नाम से प्रसिद्ध हुईं। उन्हें लक्ष्मी जी का स्वरूप भी माना जाता है।

सीता नवमी का महत्व
सीता नवमी का दिन खासतौर पर सुख-समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन माता सीता और भगवान राम की पूजा करने से घर में शांति, धन-धान्य और खुशहाली आती है। विवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत बहुत खास होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन में मजबूती आती है।
पूजा कैसे करें
सीता नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के पूजा स्थान पर माता सीता और भगवान राम की विधि-विधान से पूजा करें। रामचरितमानस या सुंदरकांड का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है। क्योकि माता सीता का संबंध धरती से है, इसलिए इस दिन खेत, हल या मिट्टी की पूजा करना भी अच्छा माना जाता है। इसके साथ ही अन्न, फल, वस्त्र और जल का दान करने से घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। विवाहित महिलाएं इस दिन चूड़ी, सिंदूर जैसी सुहाग की चीजें अर्पित करती हैं और अपने दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना करती हैं। जरूरतमंद लोगों और कन्याओं को भोजन कराना भी बहुत पुण्यदायी माना गया है।

सीता जी की आरती
आरती के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। इस दिन श्रद्धा से सीता माता की आरती गाई जाती है
आरती श्री जनक दुलारी की,
सीता जी रघुवर प्यारी की।
जगत जननी जग की विस्तारिणी,
नित्य सत्य साकेत विहारिणी,
परम दयामयी दीनोद्धारिणी,
सीता मैया भक्तन हितकारी की।
विमल कीर्ति सब लोकन छाई,
नाम लेते ही बुद्धि निर्मल हो जाए,
स्मरण करने से दुख दूर हो जाए,
शरणागत का भय हरने वाली की।
आरती श्री जनक दुलारी की,
सीता जी रघुवर प्यारी की।
