नारी डेस्क: आप जो खाते हैं उसका सीधा- सीधा असर आपकी सेहत पर पड़ता है। डॉक्टरों ऐसी कई चीजों को लेकर चेतावनी जारी कर चुके हैं जो कैंसर का कारण बनत हैं। हालांकि भारतीय खान-पान की तारीफ़ लंबे समय से इसके प्राकृतिक और सुरक्षा देने वाले फ़ायदों के लिए होती रही है। हल्दी, मेथी, दाल, नट्स और हरी सब्ज़ियों जैसी कई चीज़ों को सेहत के लिए फ़ायदेमंद माना जाता है। चलिए जानते हैं आज उस खाने के बारे में जो सेहत को नुकसान नहीं फायदे ही देता है।
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क्या हर बीमारी का इलाज का पारंपरिक खाना ?
HT लाइफ़स्टाइल में छपे एक आर्टिकल में डॉक्टर ने भारतीय थाली के बारे में विस्तार से बताया। पीढ़ियों से भारतीय रसोई एक बिना कही बात पर चलती रही है, यह खाना सिर्फ़ शरीर को ऊर्जा देने का ज़रिया नहीं, बल्कि दवा भी है, पाचन के लिए मेथी, दिमाग के लिए अखरोट, इम्यूनिटी के लिए आंवला। लेकिन जैसे-जैसे आधुनिक विज्ञान खान-पान और बीमारियों के बीच संबंध पर ध्यान दे रहा है, उसे पता चल रहा है कि यह पारंपरिक खाना बीमारियों के खिलाफ कोई जादुई ढाल नहीं बन सकता यह बस शरीर को ज़्यादा मज़बूत बनाने में मदद कर सकता है।
भारतीय खान-पान से मिलने वाला फायदा
न्यूरोसर्जन का मानना है कि दिमाग के लिए फायदेमंद कुछ चीज़ें पहले से ही भारतीय खान-पान का हिस्सा हैं। इनमें चमकीले रंग की सब्ज़ियां और पत्तेदार साग-सब्ज़ियां जैसे मेथी, पालक, साग, मोरिंगा की पत्तियां और फूलगोभी जैसी सब्ज़ियाँ शामिल हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनोल जैसे प्लांट कंपाउंड से भरपूर होती हैं। ये उन अस्थिर मॉलिक्यूल को बेअसर करने में मदद करती हैं जो समय के साथ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। भारतीय खान-पान में कई तरह की दालें और फलियां भी शामिल हैं, जैसे मूंग दाल, मसूर दाल, तूर दाल, अरहर दाल, चना दाल, और साथ ही बाजरा, ज्वार और रागी जैसे साबुत अनाज। ये चीज़ें गट माइक्रोबायोम को बेहतर बनाती हैं, जो 'गट-ब्रेन एक्सिस' (आंत और दिमाग के बीच बातचीत का रास्ता) की वजह से बहुत ज़रूरी है।
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इन चीजों को डाइट में करें शामिल
भारतीय माताएं बच्चों को दिमाग की बेहतर सेहत के लिए अखरोट देती हैं, और इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो सूजन कम करने और दिमाग की कोशिकाओं की झिल्ली (मेम्ब्रेन) को बनाए रखने में मदद करता है। इसी तरह, मछली कई भारतीय खान-पान शैलियों का अहम हिस्सा है, जैसे बंगाली, गोअन, असमिया, ओडिया, तटीय महाराष्ट्रियन, केरल और कोंकणी। फैटी मछली से भी ओमेगा-3 फैटी एसिड मिल सकता है, जो दिमाग और सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। न्यूरोसर्जन कहते हैं कि अगर आप ऐसी डाइट लेते हैं जिसमें सब्ज़ियां, साबुत अनाज, नट्स और मछली शामिल हों, तो आपको क्रोनिक इन्फ्लेमेशन (लंबे समय तक रहने वाली सूजन) का ख़तरा कम होता है। भारतीय डाइट में ये चीज़ें प्राकृतिक रूप से शामिल होती हैं। लेकिन अगर आप ज़्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ूड और रिफ़ाइंड शुगर खाते हैं, तो शरीर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) की समस्या बढ़ जाती है।