नारी डेस्क : गंभीर मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल का आईसीयू (ICU) सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, लेकिन यहां संक्रमण का खतरा भी काफी गंभीर हो सकता है। कोच्चि स्थित अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में आईसीयू में दवा-प्रतिरोधी रोगाणुओं की मौजूदगी को लेकर चिंता सामने आई है। अध्ययन में आईसीयू (ICU) मरीजों के लिए एकत्र किए गए कुल 8,704 नमूनों की जांच की गई। इनमें से 3,450 यानी करीब 39 फीसदी नमूनों में प्रतिरोधी रोगाणु पाए गए। शोध में बहु-दवा प्रतिरोधी यानी Multidrug-Resistant (MDR) संक्रमण को भी गंभीर समस्या बताया गया है।
ICU में संक्रमण बन रहा बड़ी चुनौती
आईसीयू में भर्ती मरीज पहले से ही गंभीर स्थिति में होते हैं और कई बार उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो सकती है। ऐसे में अस्पताल में संक्रमण होने पर इलाज और मुश्किल हो सकता है। अध्ययन के मुताबिक, जिन मरीजों में बहु-दवा प्रतिरोधी संक्रमण पाया गया, उनमें मृत्यु दर 25.5 फीसदी रही। कुल 750 संक्रमित मरीजों में से 191 की मृत्यु दर्ज की गई। इन मृत मरीजों में से 180 यानी करीब 94 फीसदी को संक्रमण अस्पताल में इलाज के दौरान हुआ था। इससे अस्पताल में संक्रमण की रोकथाम और निगरानी की अहमियत सामने आती है।

क्या है मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंस?
जब कोई रोगाणु एक से ज्यादा प्रकार की एंटीबायोटिक दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध विकसित कर लेता है, तो उसका इलाज मुश्किल हो सकता है। अध्ययन में बहु-दवा प्रतिरोधी संक्रमण को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के आधार पर परिभाषित कर उसकी पहचान की गई। ऐसे संक्रमण में डॉक्टरों के लिए प्रभावी दवा का चुनाव चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि सामान्य एंटीबायोटिक्स का असर कम या खत्म हो सकता है।
कौन से बैक्टीरिया पाए गए?
शोध में Klebsiella pneumoniae और Acinetobacter baumannii जैसे रोगाणुओं को प्रमुख बहु-दवा प्रतिरोधी रोगाणुओं में शामिल बताया गया। इसके अलावा अध्ययन में Carbapenem-resistant bacteria की मौजूदगी भी सामने आई। ये बैक्टीरिया उन एंटीबायोटिक्स के प्रति भी प्रतिरोधी हो सकते हैं जिनका इस्तेमाल गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज में किया जाता है।

अध्ययन में कितने नमूनों की जांच हुई?
यह अध्ययन अक्टूबर 2022 से मई 2025 के बीच किया गया। इस दौरान आईसीयू मरीजों से कुल 8,704 नमूने एकत्र किए गए।
जांच में: 3,450 नमूनों (करीब 39%) में प्रतिरोधी रोगाणु पाए गए।
750 नमूने बहु-दवा प्रतिरोधी रोगाणुओं से जुड़े थे।
बहु-दवा प्रतिरोधी संक्रमण वाले मरीजों में मृत्यु दर 25.5% दर्ज की गई।
750 संक्रमित मरीजों में से 191 की मृत्यु हुई।
मृतकों में करीब 94% मरीजों को संक्रमण अस्पताल में उपचार के दौरान हुआ था।
एंटीबायोटिक का सही इस्तेमाल क्यों जरूरी?
विशेषज्ञों के अनुसार, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को रोकने के लिए इन दवाओं का इस्तेमाल सोच-समझकर करना जरूरी है। जरूरत न होने पर एंटीबायोटिक लेना या गलत तरीके से इस्तेमाल करना बैक्टीरिया में दवा के खिलाफ प्रतिरोध बढ़ाने में योगदान दे सकता है। अस्पतालों में संक्रमण की नियमित निगरानी, हाथों की स्वच्छता, उपकरणों की सही सफाई और संक्रमण नियंत्रण के निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन भी बेहद महत्वपूर्ण है।

अस्पतालों में संक्रमण रोकना क्यों जरूरी?
आईसीयू में भर्ती मरीजों की स्थिति अक्सर गंभीर होती है, इसलिए किसी अतिरिक्त संक्रमण का असर ज्यादा गंभीर हो सकता है। ऐसे मरीजों में संक्रमण की जल्दी पहचान और सही उपचार के साथ-साथ संक्रमण को फैलने से रोकना भी जरूरी है। शोध में भी प्रतिरोधी रोगाणुओं की नियमित निगरानी और संक्रमण नियंत्रण के लिए ठोस उपायों की जरूरत पर जोर दिया गया है।
नोट: मृता इंस्टीट्यूट के इस अध्ययन ने आईसीयू में दवा-प्रतिरोधी रोगाणुओं और अस्पताल से जुड़े संक्रमण की गंभीरता को सामने रखा है। 8,704 नमूनों में से करीब 39 फीसदी में प्रतिरोधी रोगाणुओं की मौजूदगी और MDR संक्रमण वाले मरीजों में 25.5 फीसदी मृत्यु दर चिंता का विषय है। हालांकि, इन आंकड़ों को पूरे देश के सभी अस्पतालों या आईसीयू पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता। यह एक विशेष अध्ययन केंद्र और अध्ययन अवधि के आंकड़ों पर आधारित है। फिर भी, यह अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण और एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की अहमियत को रेखांकित करता है।