
नारी डेस्क : गणित की दुनिया में एक ऐसी जोड़ी ने इतिहास रच दिया है, जिसकी कहानी किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं लगती। 99 वर्षीय गणितज्ञ डॉ. जोन एस. बिरमन और भारतीय मूल की 22 वर्षीय गणितज्ञ वसुधा भरतराम ने यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो की गणितज्ञ तारा ब्रेंडल के साथ मिलकर करीब एक सदी पुराने गणितीय सवाल का समाधान किया है। यह सवाल ब्रेड ग्रुप और Burau representation से जुड़ा था और करीब 90 वर्षों से गणितज्ञों के लिए एक चुनौती बना हुआ था। जुलाई 2026 में प्रकाशित शोधपत्र में तीनों ने साबित किया कि चार धागों वाले classical braid group के लिए Burau representation faithful है।
15 साल की उम्र में प्रोफेसर बिरमन को लिखा था ईमेल
वसुधा भरतराम और जोन बिरमन की मुलाकात भी बेहद खास रही। जब वसुधा सिर्फ 15 साल की थीं, तब उन्होंने बिरमन को संपर्क किया और गणित को स्कूल की किताबों से आगे समझने की इच्छा जताई। उस समय बिरमन 92 वर्ष की थीं और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से रिटायर हो चुकी थीं। इसके बाद दोनों के बीच गणित को लेकर बातचीत और अध्ययन का सिलसिला शुरू हुआ। बिरमन ने वसुधा को उन्नत गणित की किताबें पढ़ने के लिए दीं और धीरे-धीरे दोनों ने कठिन गणितीय समस्याओं पर साथ काम करना शुरू किया।
क्या है ब्रेड थ्योरी?
ब्रेड यानी चोटी की तरह जब कई धागों को आपस में घुमाकर और लपेटकर अलग-अलग पैटर्न बनाया जाता है, तो गणित में इन संरचनाओं का अध्ययन Braid Theory के तहत किया जाता है। इन जटिल आकृतियों को बीजगणितीय रूप में समझने के लिए गणितज्ञ Burau representation जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। यहां एक बड़ा सवाल यह था कि क्या इस प्रक्रिया में मूल ब्रेड की पूरी जानकारी सुरक्षित रहती है या कुछ जानकारी खो जाती है। यही सवाल faithfulness से जुड़ा है।
4 धागों वाला मामला क्यों था इतना खास?
इस समस्या का कुछ हिस्सा पहले ही हल हो चुका था। गणितज्ञों को पता था कि Burau representation तीन या उससे कम strands के मामले में faithful है, जबकि पांच या उससे अधिक strands के लिए unfaithful है। लेकिन चार strands का मामला बीच में अटका हुआ था। दशकों तक कोई यह साबित नहीं कर पाया कि इस स्थिति में representation faithful है या नहीं। 2026 में Bharathram, Birman और Brendle ने आखिरकार इस सवाल का जवाब हां में दिया। वसुधा ने किशोरावस्था में ही बिरमन के साथ कठिन गणितीय विषयों पर काम करना शुरू कर दिया था। समय के साथ यह रिश्ता एक छात्रा और मेंटर से आगे बढ़कर शोध सहयोग में बदल गया। वसुधा ने बाद में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में गणित की पढ़ाई शुरू की। उनके शोध का संबंध भी ब्रेड थ्योरी और Burau representation से रहा। 2021 में वसुधा और बिरमन ने “On the Burau representation of B4” नाम से शोधपत्र भी प्रकाशित किया था।
करीब एक सदी पुरानी समस्या का आखिर हुआ समाधान
2026 के नए शोधपत्र “The Burau representation of the braid group is faithful for n = 4” में वसुधा भरतराम, जोन एस. बिरमन और तारा ई. ब्रेंडल ने चार strands वाले मामले को साबित किया। इसका एक महत्वपूर्ण परिणाम यह भी है कि इसी स्थिति में Jones representation भी faithful साबित होती है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने भी इस उपलब्धि को लंबे समय से चले आ रहे “century-old braid mystery” के समाधान के तौर पर रेखांकित किया है। इस उपलब्धि की खास बात सिर्फ यह नहीं है कि एक पुरानी गणितीय समस्या हल हुई, बल्कि यह भी है कि इसमें अलग-अलग पीढ़ियों के गणितज्ञों की साझेदारी दिखाई देती है। एक ओर 99 वर्षीय जोन बिरमन का दशकों का अनुभव है, तो दूसरी ओर 22 वर्षीय वसुधा भरतराम की नई सोच। इनके साथ तारा ब्रेंडल की विशेषज्ञता ने इस कठिन समस्या को समाधान तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।