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इंडोनेशिया में फटा ज्वालामुखी, 50 हजार फीट तक उठा राख का गुबार! हजारों उड़ानें प्रभावित

  • Edited By Monika,
  • Updated: 08 Sep, 2026 01:43 PM
इंडोनेशिया में फटा ज्वालामुखी, 50 हजार फीट तक उठा राख का गुबार! हजारों उड़ानें प्रभावित

नारी डेस्क : इंडोनेशिया में माउंट अनाक क्राकाटोआ के लगातार हो रहे विस्फोटों ने हवाई यातायात को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। ज्वालामुखी से निकली राख करीब 50 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंची, जिसके बाद पश्चिमी इंडोनेशिया के कई एयरपोर्ट पर उड़ानें रोकनी पड़ीं। शुरुआती चरण में 8 एयरपोर्ट बंद किए गए और हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंस गए। हालांकि, अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। 8 सितंबर तक जकार्ता के सोएकार्नो-हट्टा एयरपोर्ट समेत पांच एयरपोर्ट दोबारा खोल दिए गए हैं, जबकि कुछ एयरपोर्ट पर उड़ानें अभी भी प्रभावित हैं। अधिकारियों ने विमान संचालन से पहले सुरक्षा जांच और विमानों के निरीक्षण के निर्देश दिए हैं।

करीब 3 हजार उड़ानें प्रभावित, 3.4 लाख यात्री परेशान

ज्वालामुखी की राख के कारण हवाई यातायात पर असर शुरुआती अनुमान से कहीं ज्यादा बढ़ गया। इंडोनेशिया के परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, करीब 2,961 उड़ानें प्रभावित हुईं और लगभग 3.41 लाख यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इनमें उड़ानों में देरी, रद्दीकरण और परिचालन बाधित होना शामिल है। राख के कारण विमानों की उड़ान सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। ज्वालामुखीय राख विमान के इंजन और दूसरे महत्वपूर्ण हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए अधिकारियों ने प्रभावित हवाई क्षेत्र में उड़ानों को रोकने का फैसला लिया।

50 हजार फीट तक पहुंचा राख का गुबार

इंडोनेशिया की मौसम एजेंसी BMKG ने उपग्रहों के जरिए ज्वालामुखी से निकलने वाले राख के बादलों को ट्रैक किया। एक राख का बादल करीब 20 हजार फीट तक पहुंचा, जबकि दूसरा बड़ा राख का गुबार लगभग 50 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया। इसका असर जकार्ता, बैंटन, पश्चिमी जावा और सुमात्रा के कुछ हिस्सों तक देखा गया। राख के फैलाव की दिशा हवा और मौसम की स्थिति के साथ बदलती रही, जिससे विमान संचालन के लिए स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी रही।

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जुलाई से बढ़ रही थी ज्वालामुखी की गतिविधि

इंडोनेशिया की जियोलॉजिकल एजेंसी के अनुसार, अनाक क्राकाटोआ में जुलाई से गतिविधियां बढ़ी थीं। सितंबर की शुरुआत में इसकी गतिविधि और तेज हुई और कई विस्फोट दर्ज किए गए। अधिकारियों ने कहा कि ज्वालामुखी के नीचे मैग्मा और गैस की आपूर्ति के संकेत मिले हैं। फिलहाल यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता कि इससे इससे भी बड़ा विस्फोट होगा या नहीं, लेकिन आगे और विस्फोट होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।

जकार्ता में एयरपोर्ट बंद होने से बढ़ी परेशानी

ज्वालामुखीय राख के कारण इंडोनेशिया के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सोएकार्नो-हट्टा का संचालन भी प्रभावित हुआ। जकार्ता का दूसरा प्रमुख एयरपोर्ट हलीम पेरदानाकुसुमा भी प्रभावित एयरपोर्ट में शामिल था। बाद में राख की स्थिति में सुधार और सुरक्षा जांच के बाद जकार्ता के एयरपोर्ट समेत कई जगहों पर उड़ानें दोबारा शुरू कर दी गईं। हालांकि, अधिकारियों ने विमानों की एयरवर्थीनेस की जांच और प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

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स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई, लोगों को मास्क की सलाह

ज्वालामुखीय राख का असर सिर्फ हवाई सेवाओं तक सीमित नहीं रहा। राख के कारण प्रभावित इलाकों में कुछ स्कूलों ने बच्चों की सुरक्षा के लिए ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की। आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने लोगों को बाहर निकलते समय मास्क पहनने और राख के सीधे संपर्क से बचने की सलाह दी। कुछ इलाकों में आंखों में जलन और सांस से जुड़ी परेशानी की शिकायतें भी सामने आईं।

सिंगापुर एयरलाइंस समेत कई उड़ानें रद्द

ज्वालामुखी की राख का असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ा। Singapore Airlines ने 6 और 7 सितंबर को सिंगापुर-जकार्ता रूट की 10 उड़ानें रद्द की थीं। एयरलाइन ने यात्रियों को स्थिति के अनुसार रीबुकिंग या रिफंड के विकल्प दिए। अन्य अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस की उड़ानों पर भी असर पड़ा और यात्रियों को वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था करने में परेशानी हुई।

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अनाक क्राकाटोआ का इतिहास क्यों डराता है?

अनाक क्राकाटोआ का अर्थ है ‘क्राकाटोआ का बच्चा’। यह उसी क्षेत्र में बना ज्वालामुखीय द्वीप है जहां ऐतिहासिक क्राकाटोआ ज्वालामुखी स्थित था। 1883 में क्राकाटोआ के विनाशकारी विस्फोट के बाद आई सुनामी में करीब 35 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इस विस्फोट का असर वैश्विक स्तर पर भी देखा गया था। इसके बाद 2018 में अनाक क्राकाटोआ के विस्फोट से ज्वालामुखी के एक हिस्से का समुद्र में भूस्खलन हुआ, जिससे सुनामी पैदा हुई। इस आपदा में जावा और सुमात्रा में 430 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

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क्या अभी खतरा टला है?

फिलहाल स्थिति शुरुआती दौर की तुलना में बेहतर हुई है और कई एयरपोर्ट पर उड़ानें फिर शुरू हो चुकी हैं। लेकिन अनाक क्राकाटोआ अभी भी सक्रिय है और अधिकारियों की निगरानी जारी है। मंगलवार को भी छोटे विस्फोट दर्ज किए गए, इसलिए आगे भी हवाई सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। लोगों को ज्वालामुखी के सक्रिय क्षेत्र से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। अनाक क्राकाटोआ इंडोनेशिया के उस Pacific Ring of Fire क्षेत्र में स्थित है जहां ज्वालामुखीय और भूकंपीय गतिविधियां आम हैं।

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