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शोहरत मिली, लेकिन निजी जिंदगी में झेला दर्द, बेटों की परवरिश के लिए Zeenat Aman ने नहीं मानी हार

  • Edited By Monika,
  • Updated: 06 Sep, 2026 12:00 PM
शोहरत मिली, लेकिन निजी जिंदगी में झेला दर्द, बेटों की परवरिश के लिए Zeenat Aman ने नहीं मानी हार

नारी डेस्क : 70-80 के दशक की मशहूर एक्ट्रेस Zeenat Aman बेटों का पेट पालने के लिए छोटे कस्बों में छोटे-मोटे काम करती थीं और Poise और Etiquette क्लासेज देती थी। जीनत का जन्म 19 नवंबर 1951 को Bombay में हुआ। पिता अमानुल्लाह खान एक मुस्लिम और माँ सिंधा हेंज एक महाराष्ट्रीयन हिंदू थीं। जीनत 13 साल की थी, जब पिता का निधन हो गया। इसके बाद जीनत Los Angeles में अकेले स्टडी के लिए चली गई। 1970 में Miss Asia Pacific International का खिताब जीतने वाली पहली इंडियन महिला बनीं। 1970 में फिल्म 'हलचल' से करियर शुरू किया, देव आनंद की फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' ने रातों-रात स्टार बना दिया।

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1947 में स्वतंत्रता मिलने के बाद जीनत पहली एक्ट्रेस थी जिन्होंने 'सत्यम शिवम सुंदरम' में शशि कपूर के साथ ऑन-स्क्रीन किसिंग सीन दिया था। जीनत को शादीशुदा और बच्चों के पिता संजय खान से प्यार हो गया। 1980 में संजय खान ने एक होटल पार्टी में जीनत के साथ खूब मारपीट की जिसमें उनकी दाईं आंख की मसल्स डैमेज हो गईं। करीब 40 साल बाद जीनत ने सक्सेसफुल सर्जरी करवाईं। 1985 में अभिनेता मजहर खान से शादी कीं।  शादी के एक साल के भीतर ही जीनत को पति की बेवफाई का पता चल गया था। बच्चों की खातिर करीब 12 साल इस रिश्ते में बंधी रही।

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जब मजहर खान गंभीर रूप से बीमार हुए, तब जीनत ने उनकी पूरी सेवा की और उनका इलाज करवाया। मजहर को प्रिस्क्रिप्शन ड्र/ग्स की बुरी लत थी, जिससे उनकी दोनों किडनी खराब हो गईं। 1998 में मजहर खान का निधन हो गया। पीछे छोड़ गए अपने 2 बेटे, ना ही कोई Money ना ही कोई Support।

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पति के निधन के बाद जीनत को काम मिलना बंद हो गया। पैसा कमाने के लिए जीनत छोटे शहरों में छोटे-मोटे इवेंट में हिस्सा लेने लगी और अपने बेटों के लिए सलाह कॉलम लिखती रही, जब तक कि... हालात बदलने लगे। आज वह 74 की हैं और इंस्टाग्राम पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं, वह हर मुद्दे पर खुलकर बात करती है। प्यार, जिंदगी व महिलाओं की च्वाइस के बारे इतना स्पष्ट बोलती है जितना बहुत कम लोग बोल पाते होंगे। कभी-कभी सबसे मजबूत महिलाएं जन्म से मजबूत नहीं होतीं। इनका निर्माण तब होता है जब वे बार-बार खुद को नए सिरे से ढ़लने का विकल्प चुनती हैं। ऐसी ही कहानी है जीनत अमान की।

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