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मेरे पापा मेरे हीरो थे...’, पिता यश जौहर को याद कर भावुक हुए करण जौहर

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 06 Sep, 2026 06:03 PM
मेरे पापा मेरे हीरो थे...’, पिता यश जौहर को याद कर भावुक हुए करण जौहर

नारी डेस्क:  दिवंगत फिल्ममेकर यश जौहर की आज 6 सितंबर को 97वीं बर्थ एनिवर्सरी है। इस खास दिन पर उनके परिवार, दोस्तों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग उन्हें याद कर रहे हैं। वहीं, बेटे करण जौहर ने भी अपने पिता को याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट शेयर किया है। करण ने यश जौहर की कुछ अनदेखी तस्वीरें पोस्ट कीं और उनके साथ जुड़ी यादों को अपने फैन्स के साथ साझा किया।

करण ने शेयर कीं पिता की अनदेखी तस्वीरें

यश जौहर की बर्थ एनिवर्सरी पर करण जौहर ने इंस्टाग्राम पर पुरानी तस्वीरों का एक सेट शेयर किया। इनमें एक तस्वीर उनके बचपन के दिनों की भी है। तस्वीरों के साथ करण ने अपने पिता को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि उन्हें उनकी हर दिन याद आती है। इस भावुक पोस्ट में करण ने सिर्फ अपने पिता को याद नहीं किया, बल्कि उनसे जुड़ा एक मजेदार किस्सा भी सुनाया। यह किस्सा फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ की रिलीज के बाद का है, जब करण ने अपनी पहली डिजाइनर जैकेट खरीदी थी।

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‘बर्बरी नहीं... बहुत बुरी है’

करण ने बताया कि ‘कुछ कुछ होता है’ की रिलीज के बाद उन्होंने फिल्म की सफलता का जश्न मनाने के लिए अपने लिए एक डिजाइनर जैकेट खरीदने का फैसला किया था। वह बड़े उत्साह के साथ ‘बर्बरी’ के स्टोर पहुंचे और उन्हें जो जैकेट पसंद आई, उसे खरीद लिया। करण के मुताबिक, जैकेट पहनकर उन्हें लग रहा था कि वह काफी शानदार दिख रहे हैं। लेकिन जब उन्होंने अपने पिता यश जौहर को यह जैकेट दिखाई तो उनका रिएक्शन कुछ और ही था। यश जौहर ने बेटे को देखकर पूछा कि उन्होंने क्या पहन रखा है। करण ने जवाब दिया, “पापा, ये बर्बरी है।” इसके बाद यश जौहर ने पंजाबी अंदाज में मजाक करते हुए कहा, “बेटा, ये बर्बरी नहीं... बहुत बुरी है।” करण ने बताया कि उस वक्त उन्हें काफी बुरा लगा, लेकिन कुछ ही पल बाद वह खुद भी जोर-जोर से हंसने लगे।

पिता को बताया जमीन से जुड़े और मजाकिया इंसान

करण ने अपने पिता को याद करते हुए लिखा कि यश जौहर बेहद सरल, जमीन से जुड़े और मजाकिया इंसान थे। वह करण के सबसे बड़े प्रशंसक थे और बेटे की हर बात में उसका हौसला बढ़ाते थे। करण ने अपने वजन और लुक को लेकर भी पिता की मजेदार बातें याद कीं। उन्होंने बताया कि उस समय भले ही वह खुद को लेकर असहज महसूस करते हों, लेकिन उनके पिता हमेशा कहते थे कि यह सिर्फ ‘पप्पी फैट’ है और समय के साथ चला जाएगा। यहां तक कि यश जौहर कभी-कभी करण से कहते थे कि वह इतने हैंडसम हैं कि उन्हें हीरो बन जाना चाहिए और घुड़सवारी सीखनी चाहिए। करण ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि क्या लोग उन्हें जुहू बीच पर घोड़े पर सवार होकर या फिर हीरो के रूप में कल्पना कर सकते हैं।

मां ने दिखाई हकीकत, पिता देते रहे हौसला

करण ने आगे बताया कि जहां उनके पिता उन्हें लेकर बेहद उत्साहित रहते थे, वहीं उनकी मां उन्हें हकीकत से रूबरू कराती थीं। करण के मुताबिक, उनकी मां उन्हें अलग ले जाकर समझाती थीं कि वह कैमरे के सामने नहीं आ सकते। इसके बावजूद करण के लिए उनके पिता हमेशा एक हीरो रहे। यश जौहर का भरोसा और उनका बेटे को प्रोत्साहित करने का अंदाज करण के दिल में आज भी उसी तरह बसा हुआ है।

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पिता की आखिरी सलाह आज भी याद है

करण जौहर के पोस्ट का सबसे भावुक हिस्सा उनके पिता के आखिरी दिनों से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि जब यश जौहर अपने कीमोथेरेपी सेशन के बाद थे, तब उन्होंने करण से ऐसी बात कही थी, जिसे वह आज तक नहीं भूल पाए। यश जौहर ने अपने बेटे से कहा था कि वह करण और उसकी मां को छोड़कर नहीं जाना चाहते, लेकिन उन्हें महसूस हो रहा है कि उनका वक्त करीब है। इसके बाद उन्होंने करण से एक वादा लिया था कि वह हमेशा दयालु रहेंगे। उनका मानना था कि अगर इंसान के भीतर दयालुता नहीं है, तो सफलता का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने करण से अपनी मां का उसी तरह ख्याल रखने के लिए भी कहा था, जैसे उन्होंने हमेशा रखा।

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‘जब माता-पिता को खोते हैं तो एक भगवान मिल जाता है’

करण ने बताया कि जब उनके पिता वेंटिलेटर पर थे और उन्हें एहसास हो गया था कि अब उम्मीद की कोई किरण नहीं बची, तब से उनकी जिंदगी में एक ऐसा खालीपन आया, जिसे वह कभी भर नहीं पाए। उन्होंने लिखा कि माता-पिता को खोने के बाद इंसान को एक भगवान मिल जाता है और उनके लिए उनके पिता वही भगवान हैं। करण के मुताबिक, वह आज भी हर दिन अपने पिता से प्रार्थना करते हैं और उन्हें अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा आशीर्वाद मानते हैं।करण ने पोस्ट के आखिर में अपने पिता को याद करते हुए लिखा कि उन्हें उनकी हर दिन याद आती है। पिता के साथ जुड़ी इन यादों ने एक बार फिर दिखा दिया कि यश जौहर का करण की जिंदगी और सोच पर कितना गहरा असर रहा है।

फिल्म इंडस्ट्री में यश जौहर का बड़ा योगदान

यश जौहर ने 1950 के दशक की शुरुआत में पब्लिसिस्ट और स्टिल फोटोग्राफर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने 1951 में आई फिल्म ‘बादल’ से फिल्म इंडस्ट्री में काम करना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने 1976 में धर्मा प्रोडक्शंस की नींव रखी। बतौर निर्माता उन्होंने ‘दोस्ताना’, ‘दुनिया’, ‘अग्निपथ’, ‘गुमराह’, ‘डुप्लीकेट’, ‘कुछ कुछ होता है’ और ‘कभी खुशी कभी गम’ जैसी फिल्मों से अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी फिल्मों में कहानी के साथ-साथ भव्यता और मजबूत स्टारकास्ट भी देखने को मिलती थी।

शाहरुख खान, प्रीति जिंटा और सैफ अली खान स्टारर ‘कल हो ना हो’ यश जौहर का आखिरी प्रोजेक्ट था। 26 जून 2004 को कैंसर की वजह से उनका निधन हो गया था। उनके जाने के 22 साल बाद भी करण जौहर की यादों और उनकी बातों में यश जौहर आज भी उतने ही करीब नजर आते हैं।
 

 

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