नारी डेस्क: इन दिनों सोशल मीडिया पर एक अजीब लेकिन तेजी से वायरल होता नाम चर्चा में है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’। मीम्स, व्यंग्य और राजनीतिक नाराजगी से शुरू हुआ यह डिजिटल ट्रेंड अब इंटरनेट मीडिया पर बड़ा आंदोलन बन चुका है। कुछ ही दिनों में लाखों लोग इससे जुड़ चुके हैं और लगातार इसे लेकर पोस्ट, मीम्स और बहसें चल रही हैं। कैसे शुरू हुआ यह पूरा ट्रेंड चलिए जानते हैं।
कैसे शुरू हुआ यह पूरा ट्रेंड?
इस ट्रेंड की शुरुआत एक हालिया अदालती टिप्पणी के बाद बने माहौल से मानी जा रही है। बताया जाता है कि देश के Chief Justice सूर्यकांत की एक सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई थी। हालांकि बाद में सामने आया कि टिप्पणी को लेकर गलतफहमी और अलग-अलग व्याख्याएं की गईं। सीजेआई ने भी स्पष्ट किया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया और इसका गलत अर्थ निकाला गया। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य देश के युवाओं पर कोई टिप्पणी करना नहीं था।

सोशल मीडिया पर बढ़ी नाराजगी और मीम कल्चर
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर युवाओं की नाराजगी और सिस्टम को लेकर बहस तेज हो गई। इसी माहौल में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक व्यंग्यात्मक डिजिटल मूवमेंट सामने आया, जिसने तेजी से लोगों का ध्यान खींचा। यह पूरा ट्रेंड मीम्स और राजनीतिक व्यंग्य के जरिए अपनी बात रख रहा है। देखते ही देखते यह इंटरनेट पर एक बड़े ऑनलाइन मूवमेंट के रूप में बदल गया।
क्या है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ कोई असली राजनीतिक पार्टी नहीं है, बल्कि यह एक ऑनलाइन व्यंग्य (सैटायर) आधारित डिजिटल ग्रुप है। इसे युवाओं और आम लोगों की उस नाराजगी और निराशा की आवाज के रूप में देखा जा रहा है, जो वे सिस्टम और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर महसूस करते हैं। इसका टैगलाइन भी काफी चर्चा में है “Voice of Lazy and Unapplied”, यानी उन लोगों की आवाज जो खुद को बेरोजगार, सिस्टम से असंतुष्ट या डिजिटल दुनिया में सक्रिय मानते हैं।
कौन चला रहा है यह अभियान
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस डिजिटल अभियान की शुरुआत अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स कर रहे 30 वर्षीय अभिजीत डिपके ने की थी। वह पहले 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम के साथ वॉलंटियर के तौर पर भी काम कर चुके हैं। बताया जाता है कि उन्होंने 16 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक गूगल फॉर्म शेयर किया था, जिसके जरिए लोगों को इस डिजिटल मूवमेंट से जुड़ने का न्योता दिया गया।

पार्टी की अनोखी “डिमांड्स” और घोषणापत्र
इस ऑनलाइन मूवमेंट ने एक व्यंग्यात्मक घोषणा पत्र भी जारी किया है, जिसमें गंभीर मुद्दों को हल्के-फुल्के अंदाज में रखा गया है। इसमें कई सुझाव और मांगें शामिल हैं जैसे कैबिनेट में महिलाओं को 50% आरक्षण, पार्टी बदलने वाले नेताओं पर 20 साल का चुनावी प्रतिबंध। सेवानिवृत्ति के बाद जजों को राज्यसभा में नियुक्त न करने की मांग। चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और वोट हटाने जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई। इसके अलावा इस समूह ने नीट से जुड़े छात्रों के मुद्दों पर भी समर्थन जताया है।
तेजी से बढ़ता डिजिटल फॉलोइंग बेस
कुछ ही दिनों में इस डिजिटल मूवमेंट की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स 60 लाख से ज्यादा पहुंच चुके हैं, जबकि एक्स (Twitter) पर भी यह संख्या लाखों में है। इस तेजी से बढ़ते ट्रेंड ने इसे भारत के सबसे चर्चित ऑनलाइन व्यंग्य आंदोलनों में से एक बना दिया है।