
नारी डेस्क: ऑनलाइन गेमिंग की लत सिर्फ दिमाग पर ही असर नहीं डालती बल्कि आपकी जेब पर भी इसका बेहद गहरा असर पड़ता है। लाखों भारतीय इस बुरी लत का शिकार हो चुके हैं। ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी शुरू में समय बिताने का एक मजेदार तरीका लगता है, लेकिन जल्द ही यह एक पैसे के जाल में बदल जाता है। लोगों को तब एहसास होता है कि वे अब कोई खेल नहीं खेल रहे हैं, जब पैसे निकालना बंद हो जाता है और वॉलेट में कई दिनों तक प्रोसेसिंग दिखाता रहता है, या फिर KYC वेरिफिकेशन फीस मांगी जाती है।

गेमिंग के चक्कर में खुद मर रहे या दूसरों को मार रहे लोग
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि अकेले 2025 में ही लोगों के 20 हजार करोड़ रुपये गेमिंग में बर्बाद हो गए। कुछ ने तो अपना सब कुछ गंवाने के बाद खुद को ही खत्म कर दिया और अब तो यह लतहत्या के भी मामले बढ़ा रही है। पिछले साल 20 वर्षीय छात्र निखिल यादव ने गेमिंग में फंसने के बाद मां की ही गोली मारकर हत्या कर दी थी। मां ने उसे कर्ज चुकाने के लिए गहने चोरी करते हुए पकड़ लिया था। निखिल ने कई ऐप से कर्ज लिया था जिसको चुकाने के लिए वो दबाव में था। इस तरह के कई मामले देखने को मिल रहे हैं।
इस तरह लोगों को फंसाया जाता है जाल में
दरअसल मध्यम-वर्गीय परिवार के लोग पहले तो गेमिंग की लत में पड़ जाते हैं फिर उनकी जमा-पूंजी छोटी-छोटी, बार-बार की जाने वाली जमाओं में खत्म हो जाती है, उनके क्रेडिट कार्ड की लिमिट पूरी हो जाती है और वे शर्म के मारे इस बारे में किसी से बात भी नहीं कर पाते। ज़्यादातर रिकवरी के मामले इसलिए मुश्किल नहीं होते कि पीड़ित गलत है, बल्कि इसलिए मुश्किल होते हैं क्योंकि धोखाधड़ी का मकसद ही लोगों को भ्रमित करना और चीज़ों को धीमा करना होता है। नकली सट्टेबाजी और गेमिंग साइटें अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए कई तरह की रणनीतियां अपनाती हैं, जैसे कि लेयर्ड वॉलेट, बदलते हुए UPI ID, Telegram एजेंट और कई बैंक खाते।केंद्र सरकार ने पिछले साल अगस्त में ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम 2025 के मुख्य प्रावधान और नियम के मसौदे को जब लोकसभा में पेश किया था।

इस जाल से बचाएं खुद को
विशेषज्ञों के मुताबिक, गेमिंग ऐप से पैसा कमाने शुरुआत छोटी जीत से होती है। पहले व्यक्त्ति पांच- दस हजार रुपये जीतता है। इसके बाद कंपनियों उसका विश्वास बढ़ाती हैं। नोटिफिकेशन से बताती है कि आप ऐसे ही खेलते रहे तो मोटी रकम जीत सकते हैं। व्यक्ति झांसे में आकर पैसा लगाता है। इसके बाद एआई और बॉट खेल शुरू करते हैं, चंद मिनट में गेम खेलने वाले के हिस्से में बर्बादी रह जाती है। एक अच्छी कानूनी रिकवरी योजना इस बात पर ज़ोर देती है कि सबूतों को सही क्रम में रखा जाए, लेन-देन का पता लगाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया जाए, और साइबर धोखाधड़ी तथा ठगी से जुड़े कानूनों के तहत शिकायतें दर्ज की जाएं।
पूरी दुनिया में फैल रहा ये रैकेट
मार्केट रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में गेमिंग का कुल बाजार 318.42 अरब डॉलर था। 2032 तक इसके 649.51 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान है। भारत में गेमिंग और सट्टेबाजी ऐप का संचालन करने वाली कंपनियां आमतौर पर चीन, कोरिया, अमेरिका, फ्रांस और वियतनाम की है। वर्ष 2025 में थाईलैंड सरकार ने सभी गैरकानूनी ऑनलाइन गेमिंग ऐप और वेबसाइट को बंद कर दिया। सरकार के इस फैसले से सालाना कुल करीब 48.5 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ। कंबोडिया : कंबोडिया सरकार ने 2019 में ऑनलाइन गेमिंग पर रोक लगाई तो सात हजार नौकरियां चली गईं। वर्ष 2024 में ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी में लिप्त 187 लोगों को गिरफ्तार किया गया।