नारी डेस्क: शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ दिखने पर लोग अक्सर इसे मामूली सूजन, मांसपेशियों में खिंचाव, चर्बी की गांठ या चोट समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और सोचते हैं कि यह अपने आप ठीक हो जाएगी। डॉक्टर कहते हैं कि हर बर ऐसा नहीं होता,कई गांठें नुकसानदायक नहीं होतीं, लेकिन कुछ गांठें सारकोमा का शुरुआती संकेत हो सकती हैं। यह एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है जो शरीर के कनेक्टिव टिश्यू (जैसे मांसपेशियां, फैट, नसें, रक्त वाहिकाएं, त्वचा की गहरी परतें या हड्डियां) में पनपता है।
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हर गांठ नहीं होती आम
HT लाइफस्टाइल को दिए एक इंटरव्यू में डॉक्टर ने बताया कि- " सारकोमा आम नहीं हैं फिर भी इन पर ध्यान देना जरूरी है क्योंकि इन्हें आसानी से आम सूजन समझ लिया जाता है, जिससे बीमारी का पता चलने में देरी हो सकती है।" ध्यान रखने वाली मुख्य बात यह है कि अगर कोई गांठ बढ़ रही है, गहराई में है,दर्दनाक है या असामान्य है, तो डॉक्टर से उसकी जांच करवानी चाहिए। सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा के मामले में शुरुआत में कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। गांठ चुपचाप बन सकती है और कुछ समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के दर्द-रहित रह सकती है।
हड्डी के कैंसर का लक्षण होता है अलग
डॉक्टर ने बताया- "क्योंकि इसमें बुखार, कमजोरी या कोई साफ बीमारी नहीं दिखती, इसलिए मरीज डॉक्टर से सलाह लेने में देरी कर सकते हैं। इसके अलावा, कुछ मामलों में गांठ का पता तब चलता है जब वह इतनी बड़ी हो जाती है कि उससे हिलने-डुलने में दिक्कत हो, आस-पास की नसों पर दबाव पड़े या साफ सूजन दिखे। हालांकि, बोन सारकोमा (हड्डी का कैंसर) के लक्षण अलग हो सकते हैं। इनसे लगातार दर्द, सूजन, छूने पर दर्द या प्रभावित अंग को इस्तेमाल करने में दिक्कत हो सकती है। शुरू में दर्द का कारण कसरत, उम्र या मामूली चोट को माना जा सकता है, लेकिन आमतौर पर इसमें उम्मीद के मुताबिक सुधार नहीं होता।
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गांठ में इन लक्षणों को बिल्कुल ना करें इग्नोर
डॉक्टर कहते हैं अगर गांठ में ये लक्षण हों तो उसकी जांच करवानी चाहिए जैसे- अगर उसका आकार दिनों हफ़्तों या महीनों में बढ़ रहा हो, अगर वह सिर्फ़ त्वचा के नीचे नहीं, बल्कि मांसपेशियों के अंदर गहराई में महसूस हो, अगर वह उम्मीद से ज़्यादा बड़ी हो या उसका आकार कुछ सेंटीमीटर से ज़्यादा हो, अगर उससे दर्द, दबाव, सुन्नपन या हिलने-डुलने में दिक्कत हो, अगर पहले हटाने के बाद वह दोबारा हो जाए, अगर वह बिना किसी साफ़ चोट के दिखे या चोट लगने के बाद ठीक न हो, अगर वह हड्डी में लगातार दर्द या सूजन से जुड़ी हो
तो इसे बिल्कुल भी ना करें नजरअंदाज
सारकोमा का इलाज
सारकोमा का इलाज सबसे असरदार तब होता है जब बीमारी का जल्दी पता चल जाए और एक स्पेशल मल्टीडिसिप्लिनरी टीम उसे मैनेज करे। डायग्नोसिस के लिए क्लिनिकल जांच, MRI या CT स्कैन जैसे इमेजिंग टेस्ट और बायोप्सी की ज़रूरत हो सकती है। यह ज़रूरी है कि बायोप्सी और सर्जरी की प्लानिंग ध्यान से की जाए, क्योंकि किसी संदिग्ध गांठ को बिना प्लान किए हटाने से आगे का इलाज मुश्किल हो सकता है। सारकोमा के टाइप, साइज़, जगह और स्टेज के आधार पर, इलाज में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी या कई तरीकों का कॉम्बिनेशन शामिल हो सकता है।”