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महंगा हुआ कैंसर और टिटनेस का इलाज, कई जरूरी दवाओं के दाम बढ़े

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 22 Jul, 2026 10:27 AM
महंगा हुआ कैंसर और टिटनेस का इलाज, कई जरूरी दवाओं के दाम बढ़े

नारी डेस्क: देश में पहले से ही कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज आम लोगों के लिए काफी महंगा माना जाता है। ऐसे समय में कैंसर, टिटनेस और कुछ अन्य गंभीर संक्रमणों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली चुनिंदा दवाओं की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की मंजूरी मिलने से मरीजों की चिंता बढ़ गई है। इस फैसले का सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिन्हें लंबे समय तक नियमित रूप से दवाओं की जरूरत होती है।

किसने लिया यह फैसला

नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने कुछ आवश्यक दवाओं की अधिकतम कीमतों में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। यह फैसला सभी दवाओं पर लागू नहीं किया गया है, बल्कि केवल उन चुनिंदा दवाओं के लिए लिया गया है, जिनके उत्पादन और उपलब्धता से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही थीं। इन दवाओं में कैंसर के इलाज में उपयोग होने वाली कुछ दवाएं, टिटनेस की दवाएं और कुछ जरूरी एंटीबायोटिक शामिल हैं।

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कीमतें बढ़ाने की क्या रही वजह

एनपीपीए के अनुसार, पिछले कुछ समय में दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल, पैकेजिंग सामग्री, परिवहन और उत्पादन लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है। दवा कंपनियों का कहना था कि मौजूदा कीमतों पर इन दवाओं का उत्पादन करना आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं रह गया है। इसके कारण कई कंपनियों ने उत्पादन कम कर दिया, जिससे बाजार में इन दवाओं की उपलब्धता प्रभावित होने लगी। ऐसी स्थिति में सरकार और नियामक संस्था का मानना है कि कीमतों में सीमित बढ़ोतरी से कंपनियों को उत्पादन जारी रखने में मदद मिलेगी और आवश्यक दवाओं की आपूर्ति बनी रहेगी।

किन दवाओं की कीमतों पर पड़ेगा असर

इस निर्णय का असर केवल कुछ विशेष दवाओं पर पड़ेगा। इनमें कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं, टिटनेस के उपचार में उपयोग होने वाली दवाएं तथा कुछ महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक शामिल हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कैंसर या टिटनेस के इलाज में इस्तेमाल होने वाली हर दवा महंगी हो गई है। अधिकांश दवाओं की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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मरीजों पर क्या होगा प्रभाव

दवाओं की कीमत बढ़ने से इलाज का कुल खर्च बढ़ सकता है। विशेष रूप से ऐसे मरीज, जिन्हें महीनों या वर्षों तक लगातार दवा लेनी पड़ती है, उनके लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित हो सकता है। कई परिवार पहले से ही इलाज और जांच पर बड़ी रकम खर्च कर रहे हैं, ऐसे में दवाओं की बढ़ी हुई कीमतें उनकी मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इलाज लंबे समय तक चलता है, तो दवाओं की कीमत में हुई बढ़ोतरी का असर मरीजों के मासिक मेडिकल बजट पर साफ दिखाई दे सकता है।

सरकार का क्या है पक्ष

सरकार और एनपीपीए का कहना है कि यह फैसला दवा कंपनियों की लागत बढ़ने और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। नियामक संस्था का मानना है कि यदि कंपनियों को उचित मूल्य नहीं मिलेगा, तो उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे मरीजों को दवाएं मिलना और भी मुश्किल हो जाएगा।

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क्या सभी दवाएं महंगी हो जाएंगी

फिलहाल ऐसा नहीं है। कीमतों में बढ़ोतरी केवल कुछ चुनिंदा आवश्यक दवाओं तक सीमित है। अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है, जिसमें सभी कैंसर, टिटनेस या अन्य दवाओं की कीमत बढ़ाने की बात कही गई हो। बाकी दवाएं पहले की तरह ही निर्धारित कीमतों पर उपलब्ध रहेंगी, जब तक कि एनपीपीए की ओर से कोई नया निर्देश जारी नहीं किया जाता।
 
 
 

 

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