नारी डेस्क: सितंबर में मानसून धीरे-धीरे खत्म होने लगता है और मौसम में बदलाव शुरू हो जाता है। कभी गर्मी तो कभी हल्की ठंड महसूस होने लगती है। इस बदलते मौसम में बच्चों को सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खराश और बुखार जैसी परेशानियां जल्दी घेर सकती हैं। ऐसे में उनकी डाइट पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। बच्चों की थाली में पोषक तत्वों से भरपूर चीजें शामिल करने से उनकी ओवरऑल हेल्थ और इम्यून सिस्टम को सपोर्ट मिल सकता है। सिर्फ इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए कोई एक फूड काफी नहीं होता। बच्चों के लिए बैलेंस डाइट, पर्याप्त नींद, साफ-सफाई और रोजाना की एक्टिविटी भी जरूरी है। वहीं बहुत ज्यादा जंक, पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड की जगह घर का पौष्टिक खाना देना बेहतर रहता है। आइए जानते हैं ऐसे 5 फूड्स जिन्हें बच्चों की डाइट में शामिल किया जा सकता है।
दही जरूर खिलाएं
दही बच्चों के लिए एक अच्छा फूड ऑप्शन हो सकता है। इसमें प्रोटीन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। दही में मौजूद कुछ प्रोबायोटिक बैक्टीरिया आंतों की सेहत को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं। अच्छी गट हेल्थ का शरीर की इम्यून सिस्टम से भी संबंध माना जाता है। बच्चों को सादा दही या बिना ज्यादा चीनी वाला योगर्ट दिया जा सकता है। इससे उन्हें कैल्शियम भी मिलता है, जो बढ़ती उम्र में हड्डियों के लिए जरूरी है।

खाने में लहसुन शामिल करें
लहसुन भारतीय रसोई का एक आम हिस्सा है और इसे खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें एलिसिन समेत कई सल्फर कंपाउंड पाए जाते हैं, जिन पर उनके संभावित स्वास्थ्य लाभों को लेकर अध्ययन हुए हैं। बच्चों के खाने में थोड़ी मात्रा में लहसुन सब्जी, दाल या सूप के जरिए शामिल किया जा सकता है। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज या इम्यूनिटी बढ़ाने की दवा नहीं समझना चाहिए।
मौसमी फल खिलाएं
बच्चों की डाइट में मौसमी फलों को जरूर जगह दें। फल विटामिन, मिनरल और फाइबर जैसे कई जरूरी पोषक तत्व देते हैं। विटामिन सी शरीर के सामान्य इम्यून फंक्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मौसम के हिसाब से बच्चों को अलग-अलग फल दिए जा सकते हैं। संतरा, मौसमी, अमरूद, कीवी जैसे फल विटामिन सी के अच्छे स्रोत हैं। बच्चों की पसंद के अनुसार फलों को सलाद, स्मूदी या सीधे काटकर भी दिया जा सकता है।
हल्दी वाला दूध
भारतीय घरों में हल्दी वाला दूध लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है। हल्दी में करक्यूमिन नाम का एक कंपाउंड पाया जाता है, जिस पर इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों को लेकर रिसर्च हुई है। अगर बच्चा दूध आसानी से पचा लेता है और उसे किसी तरह की एलर्जी नहीं है तो कभी-कभी हल्दी वाला दूध दिया जा सकता है। इसमें हल्दी की मात्रा बहुत ज्यादा रखने की जरूरत नहीं है। बच्चों को किसी भी घरेलू नुस्खे को बीमारी की दवा मानकर नहीं देना चाहिए।

बादाम भी हैं अच्छा विकल्प
बादाम बच्चों की डाइट में शामिल किए जाने वाले पौष्टिक खाद्य पदार्थों में से एक हैं। इनमें हेल्दी फैट, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन ई और कई दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं। छोटे बच्चों को बादाम देते समय उनकी उम्र और चबाने की क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है। साबुत बादाम छोटे बच्चों के लिए गले में अटकने का खतरा पैदा कर सकते हैं, इसलिए जरूरत के अनुसार इन्हें पीसकर या उपयुक्त रूप में दें। रोज कितनी मात्रा देनी है, यह बच्चे की उम्र और पूरी डाइट पर निर्भर करता है।
सिर्फ इन फूड्स से नहीं बढ़ेगी इम्यूनिटी
बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए केवल कुछ खास फूड्स पर निर्भर रहना सही नहीं है। उनकी डाइट में दाल, सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दूध या उसके विकल्प और पर्याप्त प्रोटीन शामिल होना चाहिए। इसके साथ बच्चे को पर्याप्त नींद और पानी भी मिलना जरूरी है। अगर बच्चे को बार-बार बुखार आता है, लगातार खांसी-जुकाम रहता है, वजन ठीक से नहीं बढ़ रहा या वह अक्सर बीमार पड़ता है, तो सिर्फ डाइट में बदलाव करने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।