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आखिर क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का त्योहार? जानिए इसका इतिहास, महत्व और परंपराएं

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 12 Jan, 2026 04:10 PM
आखिर क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का त्योहार? जानिए इसका इतिहास, महत्व और परंपराएं

नारी डेस्क: उत्तर भारत, खासकर पंजाब की ठंडी जनवरी की रातों में जब अलाव की आग जलती है, ढोल की थाप गूंजती है और लोकगीतों की आवाज़ माहौल को गर्म कर देती है, तब समझिए कि लोहड़ी आ गई है। लोहड़ी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, मेहनत और सामूहिक खुशियों का उत्सव है। हर साल 13 जनवरी को लोहड़ी मनाई जाती है, यानी मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले। लेकिन सवाल यह है कि लोहड़ी इसी दिन क्यों मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है?  

लोहड़ी क्यों मनाई जाती है?

लोहड़ी मुख्य रूप से फसल कटाई का पर्व है। यह त्योहार रबी की फसलों जैसे गेहूं, गन्ना और सरसों की अच्छी पैदावार के लिए सूर्य देव और अग्नि देव का आभार व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। यह पर्व सर्दियों के धीरे-धीरे समाप्त होने और दिन बड़े होने की शुरुआत का प्रतीक भी है। लोग मानते हैं कि इस दिन से मौसम में बदलाव आने लगता है और नए समय की शुरुआत होती है।

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लोहड़ी और मकर संक्रांति का संबंध

लोहड़ी और मकर संक्रांति का आपस में गहरा संबंध है। लोहड़ी मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाई जाती है, जब सूर्य उत्तरायण की ओर बढ़ता है। इसी बदलाव को जीवन में सकारात्मकता, समृद्धि और नए अवसरों की शुरुआत माना जाता है।

अलाव, रेवड़ी और परिक्रमा की परंपरा

लोहड़ी की शाम को लोग अलाव जलाते हैं और उसकी परिक्रमा करते हैं। अग्नि में रेवड़ी, मूंगफली, गज्जक, तिल और मक्का अर्पित किए जाते हैं। यह परंपरा अग्नि देव को धन्यवाद देने और सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक है।

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नवविवाहितों और नवजात शिशुओं के लिए खास दिन

पंजाबी समाज में लोहड़ी का विशेष महत्व नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशु वाले परिवारों के लिए होता है। उनकी पहली लोहड़ी बड़े धूमधाम से मनाई जाती है और रिश्तेदार व पड़ोसी खुशियां बांटते हैं।

लोककथाएं और दुल्ला भट्टी की कहानी

लोहड़ी से जुड़ी एक प्रसिद्ध लोककथा दुल्ला भट्टी की है, जिन्हें पंजाब का लोकनायक माना जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने गरीब लड़कियों की रक्षा की और उनका विवाह करवाया। इसलिए आज भी लोहड़ी के गीतों में दुल्ला भट्टी का नाम लिया जाता है।

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इतिहास क्या कहता है?

आचार्य सोम प्रकाश शास्त्री के अनुसार, लोहड़ी का पर्व प्राचीन काल से चला आ रहा है। यह त्योहार पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में विशेष रूप से मनाया जाता है। यह पर्व सृष्टि की पूर्णता, प्रकृति के संतुलन और कृषि चक्र को सम्मान देने का प्रतीक है। इस समय खेतों में फसल पकने लगती है और ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती है।

लोहड़ी हमें क्या सिखाती है?

लोहड़ी हमें यह याद दिलाती है कि खुशियां अकेले नहीं, मिलकर मनाने से बढ़ती हैं। यह पर्व सिखाता है कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में भी परंपराओं की आग को बुझने नहीं देना चाहिए।
  

 
 

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