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इस देश में पड़ती है भारत की आखिरी सड़क, भगवान श्रीराम से जुड़ा है Road के नाम का रहस्य

  • Edited By palak,
  • Updated: 23 Nov, 2022 05:45 PM
इस देश में पड़ती है भारत की आखिरी सड़क, भगवान श्रीराम से जुड़ा है Road के नाम का रहस्य

भारत में ऐसी कई चीजें है जिनके बारे में बहुत से लोग नहीं जानते। खूबसूरती की बात करें तो दक्षिण भारत अपने सबसे खूबसूरत लोकेशन्स के लिए पूरे भारत में जाना जाता है। यहां पर ऐसे कई सारी टूरिस्ट प्लेसेज हैं जिन्हें लोग दूर-दूर से देखने आते हैं। देश से नहीं बल्कि विदेश से भी इन जगहों को लोग देखने आते हैं। दक्षिण भारत के तमिलनाडु में भारत की आखिरी सड़क भी स्थित है जिसे लोग दूर-दूर से देखने आते हैं। तो आइए बताते हैं आपको इस सड़क की कुछ दिलचस्प चीजें...

50 गज का क्षेत्रफल है सड़क का 

तमिलनाडु में स्थित इस सड़क का क्षेत्रफल 50 गज का है। यह तमिलनाडु के दक्षिण पूर्व में मौजूद धनुषकोडी में स्थित है। धनुषकोड़ी रामेश्वरम द्वीप के किनारे पर मौजूद है। यह इलाका भारत और श्रीलंका की स्थलीय सीमा के रुप में भी जाना जाता है। इस सड़क की खूबसूरती हर किसी को बहुत ही पसंद आती है। पहले यहां पर कोई नहीं आता था। लेकिन समय के साथ यहां पर टूरिस्टों की संख्या भी बढ़ने लगी है। 

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चक्रवात के कारण बर्बाद हो गया था धनुषकोड़ी 

धनुषकोड़ी भारत के खूबसूरत डेस्टीनेशन्स में से एक था। लेकिन एक चक्रवात के कारण यह हिस्सा बर्बाद हो गया था और आज भी खाली पड़ा है। पहले यहां पर घर, अस्पताल, होटल और पोस्ट ऑफिस भी थे। लेकिन चक्रवात के कारण सब बर्बाद हो गया था। इस चक्रवात में करीबन 1500 लोगों की जान गई थी। जिसके बाद यह जगह खाली हो गई थी। 

इसलिए पड़ा धनुषकोड़ी नाम 

यह जगह रामेश्वरम से केवल 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस जगह का संबंध भगवान राम से भी जुड़ा हुआ है। रामायण काल में भगवान राम ने भक्त हनुमान को राम सेतु बनाने का आदेश इसी जगह पर दिया था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने माता सीता को लंका से मुक्त करवानेके बाद अपने धनुष से राम सेतु को तोड़ दिया था। इसलिए इस जगह को धनुषकोड़ी कहा जाता है। 

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स्वामी विवेकानंद भी गुजर चुके हैं सड़क से 

भारत की इस लंबी सड़क से स्वामी विवेकानंद भी गुजर चुके हैं। साल 1893 में एक धर्म संसद में भाग लेने जब विवेकानंद जी अमेरिका गए थे उसके बाद भारत लौटने पर उन्होंने सबसे पहले धनुषकोड़ी में ही अपना समय बिताया था। वह श्रीलंका से होकर कोलंबो पहुंचे थे। 

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