
नारी डेस्क: सोचिए कि आप सोते समय अपनी सपनों की दुनिया में आज़ादी से घूम सकें, कहानी को अपने हिसाब से चला सकें और अपने आस-पास की चीज़ों को ऐसे देख-परख सकें जो असल ज़िंदगी की तरह ही असली लगें। अपने सपने के अंदर जाकर उसे अपनी मर्ज़ी से कंट्रोल करने की क्षमता को 'ल्यूसिड ड्रीमिंग' (lucid dreaming) कहा जाता है। आसान शब्दों में कहें तो यह अपने सपनों को कंट्रोल करने का तरीका है और यह अनुभव आपके लिए सुरक्षित तरीके से क्रिएटिविटी और एडवेंचर को आज़माने के अनगिनत मौके खोल सकता है।
ल्यूसिड ड्रीमिंग क्या है?
आम तौर पर, जब हम सपने देखते हैं तो हमें पता नहीं होता कि सपना असली नहीं है। विशेषज्ञ बताते हैं- "ल्यूसिड ड्रीम का मतलब है ऐसा सपना जिसमें सपने देखने वाले को पता होता है कि वह सपना देख रहा है।" ल्यूसिड ड्रीमिंग का सबसे पहला ज़िक्र प्राचीन यूनानी दार्शनिक अरस्तू की किताब 'ऑन ड्रीम्स' (On Dreams) में मिलता है। इसमें उन्होंने सपने की हालत में खुद के बारे में जागरूकता (self-awareness) के एक उदाहरण का वर्णन किया है। सपनों को इस तरह नियंत्रित करने की क्षमताएं हमारी असल ज़िंदगी में शायद उस हद तक मुमकिन न लगें, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि ये चीज़ें होती ही नहीं हैं।
ल्यूसिड ड्रीमिंग आम सपनों से कैसे अलग है
आमतौर पर हमें पता नहीं होता कि हम सपना देख रहे हैं। हमारे सपने के अनुभव असली लगते हैं, और हम सपने की घटनाओं को स्वीकार कर लेते हैं, चाहे वे कितनी भी अजीब या असंभव क्यों न हों। हालांकि, ल्यूसिड ड्रीमिंग में 'मेटाकॉग्निशन' (अपनी सोच के बारे में सोचना) का एक स्तर शामिल होता है जहां आप पहचानते हैं कि आप सपना देख रहे हैं। कभी-कभी यह जागरूकता कुछ पल के लिए होती है, जबकि दूसरी बार, आप सपने को कंट्रोल कर सकते हैं।
नींद के चरण
नींद को कई चरणों में बांटा गया है जो रात भर एक चक्र (साइकिल) में चलते हैं; आमतौर पर हर चक्र लगभग 90 मिनट का होता है।
चरण 1 (हल्की नींद): यह एक बदलाव वाला चरण है जहां आप नींद में आते-जाते रहते हैं।
चरण 2 (थोड़ी गहरी हल्की नींद): आपके शरीर का तापमान गिरता है और दिल की धड़कन धीमी होने लगती है।
चरण 3 (गहरी नींद): इसे 'स्लो-वेव स्लीप' के नाम से जाना जाता है; यह चरण शारीरिक रिकवरी और सेहत को बढ़ावा देता है।
चरण 4 (REM नींद): रैपिड आई मूवमेंट (REM) नींद, जिसमें आपके दिमाग की एक्टिविटी बढ़ जाती है और आपकी आंखें पलकों के नीचे तेज़ी से घूमती हैं। इसी दौरान सबसे साफ़ और जीवंत सपने आते हैं और ल्यूसिड ड्रीमिंग की संभावना सबसे ज़्यादा होती है।
ल्यूसिड ड्रीमिंग के फायदे
सपनों की दुनिया को एक्सप्लोर करने और उसे प्रभावित करने से क्रिएटिव आइडिया और समाधान मिल सकते हैं। सपनों में समस्याओं को सुलझाने से असल जिंदगी में आपकी समस्या सुलझाने की क्षमता बेहतर हो सकती है। बुरे सपनों का सामना करने और उन्हें बदलने से उनकी संख्या और तीव्रता कम हो सकती है। डर का सामना करने के लिए एक सुरक्षित जगह देकर PTSD और एंग्जायटी (चिंता) के इलाज में इसका इस्तेमाल किया जाता है। अपने अवचेतन मन (सबकॉन्शियस माइंड) को एक्सप्लोर करने से खुद को जानने और पर्सनल ग्रोथ में मदद मिल सकती है।