नारी डेस्क : डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी को आमतौर पर गर्मियों की समस्या माना जाता है, लेकिन मानसून के दौरान भी इसका खतरा बना रहता है। बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने से पसीना अधिक निकल सकता है और कई बार उमस के बावजूद लोगों को प्यास कम महसूस होती है। ऐसे में शरीर को जितने तरल पदार्थ की जरूरत होती है, उतना पानी न पीने से डिहाइड्रेशन हो सकता है। इसके अलावा मानसून में डायरिया, उल्टी, वायरल संक्रमण और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
मानसून में क्यों बढ़ता है डिहाइड्रेशन का खतरा?
बारिश के मौसम में हवा में नमी अधिक होती है। इस वजह से पसीना त्वचा से जल्दी नहीं सूखता और शरीर को ठंडा रखने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। उमस के कारण शरीर से लगातार पसीना निकल सकता है, लेकिन व्यक्ति को हमेशा इसका एहसास नहीं होता। इसके अलावा मानसून में होने वाली कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी शरीर में पानी की कमी का कारण बन सकती हैं। उल्टी, दस्त, बुखार और संक्रमण के दौरान शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स निकलने लगते हैं। अगर समय पर पर्याप्त तरल पदार्थ न लिया जाए, तो डिहाइड्रेशन की स्थिति गंभीर हो सकती है।

सिर्फ पानी नहीं, इलेक्ट्रोलाइट्स भी हैं जरूरी
शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पानी सबसे जरूरी है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में केवल पानी पर्याप्त नहीं होता। शरीर में सोडियम, पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स भी जरूरी होते हैं। ये शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ मांसपेशियों, नसों और सामान्य शारीरिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सामान्य परिस्थितियों में संतुलित आहार से इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत पूरी हो सकती है। नारियल पानी, छाछ, दही, केला और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। वहीं उल्टी या दस्त के कारण पानी की कमी होने पर डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी की सलाह के अनुसार ORS का इस्तेमाल किया जा सकता है।
डिहाइड्रेशन के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
शरीर में पानी की कमी होने पर कुछ सामान्य संकेत दिखाई दे सकते हैं।
जैसे, बार-बार मुंह या होंठ सूखना
सामान्य से कम पेशाब आना
पेशाब का रंग गहरा पीला होना
ज्यादा थकान या कमजोरी महसूस होना
सिरदर्द या चक्कर आना
ध्यान लगाने में परेशानी होना
मांसपेशियों में ऐंठन होना
तेज धड़कन महसूस होना
गंभीर डिहाइड्रेशन में बहुत कम पेशाब आना, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम की स्थिति, बेहोशी या ब्लड प्रेशर गिरने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे लक्षणों में तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।

मानसून में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय
प्यास का इंतजार न करें: बारिश के मौसम में प्यास कम लग सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शरीर को पानी की जरूरत नहीं है। पूरे दिन नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें।
उल्टी-दस्त में रखें खास ध्यान: उल्टी या दस्त होने पर शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से कम हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में ORS का इस्तेमाल डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी की सलाह के अनुसार किया जा सकता है।
पानी के साथ पौष्टिक तरल पदार्थ लें: पानी के अलावा छाछ, सूप और अन्य पौष्टिक तरल पदार्थ डाइट में शामिल किए जा सकते हैं। नारियल पानी भी एक विकल्प हो सकता है।
मानसून में साफ पानी ही पिएं: बारिश के मौसम में दूषित पानी से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए साफ और सुरक्षित पानी का ही सेवन करें। बाहर का असुरक्षित पानी और संदिग्ध खाद्य पदार्थों से बचना भी जरूरी है।
संक्रमण के लक्षणों को नजरअंदाज न करें: लगातार उल्टी, दस्त या तेज बुखार होने पर सिर्फ घर पर पानी पीते रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में।
क्या ज्यादा पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है?
हाइड्रेट रहने के लिए पर्याप्त पानी पीना जरूरी है, लेकिन जरूरत से बहुत ज्यादा पानी पीना भी सही नहीं है। अत्यधिक मात्रा में पानी लेने से शरीर में सोडियम का स्तर बहुत कम हो सकता है, जिसे हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है। हालांकि सामान्य परिस्थितियों में यह समस्या कम देखने को मिलती है। खासकर किडनी, हृदय या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अपनी रोजाना तरल पदार्थ की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।

मानसून में हाइड्रेशन का रखें खास ख्याल
बारिश का मौसम ठंडा और सुहावना जरूर लगता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शरीर को पानी की जरूरत कम हो जाती है। उमस, पसीना, बुखार, उल्टी और दस्त जैसी स्थितियां शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी कर सकती हैं। इसलिए मानसून में नियमित रूप से पर्याप्त पानी पीना, सुरक्षित पानी का सेवन करना और डिहाइड्रेशन के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। अगर अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, बेहोशी, भ्रम, बहुत कम पेशाब या लगातार उल्टी-दस्त जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।