नारी डेस्क : अक्सर ऐसा होता है कि हम जिन लोगों के साथ प्यार और अच्छे व्यवहार से रहते हैं, वही कई बार हमारी कद्र नहीं कर पाते। कभी उनके बिना सोचे-समझे बोले गए शब्द हमें अंदर तक ठेस पहुंचा देते हैं, तो कभी किसी काम को शुरू करने से पहले ही मन में सवाल उठने लगता है कि “पता नहीं मैं इसे सही से कर पाऊंगी या नहीं?” ऐसी भावनाएं धीरे-धीरे तनाव, ओवरथिंकिंग और आत्मविश्वास की कमी को बढ़ा सकती हैं। लंबे समय तक किसी बीमार या कमजोर जीवनसाथी की देखभाल करना भी भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। वहीं, लोगों के जज करने का डर और किसी करीबी की सेहत को लेकर लगातार चिंता मानसिक सुकून छीन सकती है। ऐसे ही सवालों को लेकर काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट अमानत गिल ने जरूरी सलाह दी है। आइए जानते हैं, ऐसी परिस्थितियों में खुद को भावनात्मक रूप से मजबूत रखने और अपनी मानसिक शांति बनाए रखने के लिए क्या करना चाहिए।
50 साल की शादी के बाद भी पति नहीं देते सम्मान, क्या करें?
एक महिला ने बताया कि उनकी शादी को 50 साल से ज्यादा हो चुके हैं। उनके बच्चे विदेश में सेटल हैं और उनके पति घुटनों के दर्द की वजह से ठीक से चल-फिर नहीं पाते। ऐसे में वह उनकी प्राथमिक देखभाल करने वाली हैं। महिला का कहना है कि पति उनकी परवाह और मेहनत को समझने के बजाय उन्हें कई बार ऐसी बातें कह देते हैं, जिससे उन्हें बहुत दुख होता है। उनकी सबसे बड़ी जरूरत सिर्फ सम्मान की है, लेकिन उन्हें वह नहीं मिलता। ऐसे में उन्हें क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट की सलाह
एक्सपर्ट के मुताबिक, जब आपकी देखभाल और समर्पण के बदले आपको सम्मान नहीं मिलता और जीवनसाथी की बातें आपको बार-बार चोट पहुंचाती हैं, तो दुखी होना स्वाभाविक है। पति की सीमित गतिशीलता और आप पर उनकी निर्भरता से रिश्ते की भूमिकाएं जरूर बदल सकती हैं, लेकिन यह किसी को भी अपमानजनक या तकलीफ देने वाला व्यवहार करने का अधिकार नहीं देता। ऐसे में पति से शांत समय में खुलकर बातचीत करें। बहस के दौरान बात करने के बजाय उन्हें बताएं कि उनकी कौन-सी बातें आपको दुख पहुंचाती हैं और आप उनसे किस तरह के व्यवहार की उम्मीद करती हैं।
यह समझना भी जरूरी है कि किसी की देखभाल करना और उसके हर तरह के व्यवहार को सहते रहना एक ही बात नहीं है। आप अपने पति की मदद कर सकती हैं, लेकिन इसके साथ अपनी भावनात्मक सीमाएं तय करना भी जरूरी है। बच्चों के विदेश में रहने की वजह से अपनी पूरी भावनात्मक दुनिया को पति तक सीमित न करें। दोस्तों और अपने करीबी लोगों से संपर्क बनाए रखें। अपनी पसंद की चीजों के लिए समय निकालें और कभी-कभी ऐसे लोगों के साथ वक्त बिताएं, जहां आपकी पहचान सिर्फ एक केयरगिवर की न हो। आपकी जिंदगी सिर्फ किसी दूसरे की देखभाल करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। आप यह नियंत्रित नहीं कर सकतीं कि आपका पति अपना व्यवहार बदलेंगे या नहीं, लेकिन आप यह तय जरूर कर सकती हैं कि आप किस तरह का व्यवहार स्वीकार करेंगी।
16 साल की लड़की को हर बात पर लगता है लोग उसे जज करेंगे, कैसे बढ़ाएं कॉन्फिडेंस?
एक 16 वर्षीय छात्रा ने बताया कि वह 11वीं कक्षा में पढ़ती है और काफी अंतर्मुखी है। किसी काम को करने से पहले ही वह उसके नतीजों के बारे में बहुत ज्यादा सोचने लगती है। उसे डर रहता है कि लोग उसे जज करेंगे। यहां तक कि वह दुकान पर जाकर सामान खरीदने में भी झिझकती है। उसे अपने लुक्स को लेकर भी असुरक्षा महसूस होती है। परिवार या दोस्तों के साथ बाहर जाते समय भी वह यही सोचती रहती है कि लोग उसके बारे में क्या सोच रहे होंगे। वह आगे चलकर कानून की पढ़ाई करना चाहती है और जानती है कि इस क्षेत्र में आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखना जरूरी होगा। जल्द ही उसे पढ़ाई के लिए दूसरे शहर में भी जाना है। ऐसे में वह अपने डर और ओवरथिंकिंग को कैसे कम करे?

एक्सपर्ट की सलाह
एक्सपर्ट के अनुसार, दुकान पर जाने या किसी से बात करने से पहले ही कुछ गलत हो जाने की कल्पना करना चिंता को बढ़ा सकता है। जब भी ऐसे विचार आएं, उन्हें पूरी तरह खत्म करने की कोशिश करने के बजाय यह अभ्यास करें कि डर के बावजूद काम करना है। अपनी शक्ल-सूरत को लेकर असुरक्षा भी इस भावना को बढ़ा सकती है कि हर कोई आपको लगातार देख रहा है और आपके बारे में राय बना रहा है। लेकिन हकीकत में ज्यादातर लोग उतना ध्यान हम पर नहीं देते, जितना हम सोचते हैं। याद रखें, कॉन्फिडेंस कोई जन्मजात व्यक्तित्व नहीं, बल्कि एक स्किल है जिसे लगातार अभ्यास से विकसित किया जा सकता है।
अगर आप कानून के क्षेत्र में जाना चाहती हैं तो अभी से छोटी-छोटी शुरुआत करें। रोज कुछ मिनट जोर से पढ़ें, परिवार के किसी सदस्य के साथ किसी विषय पर चर्चा करें, क्लास डिस्कशन में हिस्सा लें या थिएटर और पब्लिक स्पीकिंग जैसी गतिविधियों से जुड़ें। सबसे जरूरी बात यह है कि कॉन्फिडेंट महसूस होने का इंतजार न करें। अभ्यास करते-करते ही आत्मविश्वास बढ़ेगा। आपका शांत स्वभाव कोई कमी नहीं है। लक्ष्य यह होना चाहिए कि आप शांत इसलिए रहें क्योंकि आप ऐसा चाहती हैं, न कि इसलिए कि डर आपको अपनी बात कहने से रोक रहा है। अगर चिंता इतनी ज्यादा बढ़ जाए कि पढ़ाई, सामाजिक जीवन या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या थेरेपिस्ट से बात करना मददगार हो सकता है।
पति की हार्ट सर्जरी हो चुकी है, फिर भी रोज खेलते हैं टेनिस; पत्नी को रहती है चिंता, कैसे संभालें तनाव?
एक महिला ने बताया कि उनके पति हार्ट पेशेंट हैं और करीब 10 साल पहले उनकी बाईपास सर्जरी हुई थी। उन्हें टेनिस खेलने का बहुत शौक है और वह रोज 1-2 घंटे टेनिस खेलते हैं। हाल ही में रूटीन टेस्ट के बाद एक डॉक्टर ने उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक खेल खेलने से सख्ती से मना किया, क्योंकि उनके हृदय में दोबारा ब्लॉकेज विकसित हुए हैं। पति टेनिस छोड़ने को तैयार नहीं हैं और इस बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर बहस होती है। परिवार ने दूसरी मेडिकल राय भी ली, जिसमें डॉक्टर ने टेनिस खेलने की अनुमति दी। इसके बावजूद महिला की चिंता कम नहीं हुई। उन्हें लगातार डर लगा रहता है कि कहीं टेनिस खेलना उनके पति के लिए खतरनाक न हो। वह इस चिंता से कैसे निपटें?

एक्सपर्ट की सलाह
एक्सपर्ट के अनुसार, पति की सेहत को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। लेकिन टेनिस को लेकर बार-बार बहस करने से दोनों के बीच तनाव और असहायता की भावना बढ़ सकती है। पति के लिए टेनिस सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि उनकी पहचान, पसंद और स्वतंत्रता का महत्वपूर्ण हिस्सा भी हो सकता है। इसलिए बातचीत को सिर्फ इस सवाल तक सीमित न रखें कि उन्हें टेनिस खेलना चाहिए या नहीं। इसके बजाय उनके कार्डियोलॉजिस्ट से विस्तार से बात करें कि उनके लिए किस स्तर और कितनी तीव्रता की शारीरिक गतिविधि सुरक्षित है। अगर दो डॉक्टरों की राय अलग-अलग है तो दोनों से संभावित जोखिम, सावधानियां और सुरक्षित गतिविधि की सीमा स्पष्ट रूप से पूछें।
इससे बार-बार होने वाली अनिश्चितता को एक स्पष्ट और जानकारी पर आधारित योजना में बदला जा सकता है। साथ ही, आपको यह भी स्वीकार करना होगा कि आप अपने पति से जुड़ा हर जोखिम खत्म नहीं कर सकतीं। आप उनका सहयोग कर सकती हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह समझने में मदद कर सकती हैं और उनकी सेहत का ध्यान रख सकती हैं, लेकिन हर संभावित खतरे को नियंत्रित करना आपके हाथ में नहीं है। बार-बार यह सोचने के बजाय कि आगे क्या गलत हो सकता है, उन चीजों पर ध्यान दें जो वास्तव में आपके नियंत्रण में हैं। अगर पति की सेहत को लेकर चिंता इतनी बढ़ जाए कि वह आपके रिश्ते और रोजमर्रा की जिंदगी पर हावी होने लगे, तो किसी काउंसलर से बात करना भी मददगार हो सकता है। इससे चिंता को संभालने और रिश्ते में अनावश्यक तनाव कम करने में मदद मिल सकती है।
एक्सपर्ट की सलाह का सार
चाहे जीवनसाथी की देखभाल का दबाव हो, लोगों के जज करने का डर या किसी करीबी की सेहत को लेकर लगातार चिंता—हर स्थिति में अपनी भावनाओं को समझना जरूरी है। दूसरों की मदद करते हुए अपनी मानसिक शांति और सीमाओं का ख्याल रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।