नारी डेस्कः इन दिनों सोशल मीडिया की दुनिया में आप अजीत डोभाल या अजीत डोवाल (Ajit Doval) नाम बार-बार देख रहे या सुन रहे होंगे। धुरंधर द रिवेंज(Dhurandhar The Revenge) फिल्म में आर. माधवन द्वारा निभाया गया किरदार 'अजय सान्याल', भारत के वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल से प्रेरित है, जो इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के चीफ की भूमिका में हैं। यह फिल्म अजीत डोभाल के जासूसी जीवन, उनके पाकिस्तान में अंडरकवर मिशन और देश की सुरक्षा के प्रति समर्पण को दर्शाती है हालांकि बहुत से लोगों को ये नहीं पता कि वो कौन है चलिए उनके जीवन के बारे में आपको बताते हैं।
भारत के जेम्स बॉन्डः अजीत डोभाल
अजीत डोभाल (Ajit Doval) भारत के वर्तमान और 5वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) हैं, जो 2014 से इस पद पर कार्यरत हैं। वह भारत के सबसे प्रभावशाली सुरक्षा रणनीतिकारों में से एक माने जाते हैं। उन्हें देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा नीतियों का “मास्टरमाइंड” भी कहा जाता है। वे केरल कैडर के 1968 बैच के पूर्व IPS अधिकारी और एक खूंखार खुफिया जासूस रहे हैं, जिन्हें “India’s James Bond” भी कहा जाता है। उन्होंने 33 साल से अधिक समय तक कश्मीर, पंजाब और नॉर्थ-ईस्ट में उग्रवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया है।

अजीत डोभाल के बारे में मुख्य बातें
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल (Pauri Garhwal) में जन्मे 20 जनवरी 1945 में जन्मे अजीत डोभाल का पूरा नाम अजीत कुमार डोभाल है। उन्होंने Agra University (अब डॉ. भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी) से अर्थशास्त्र में मास्टर्स किया और करियर की शुरूआथ में साल 1968 में IPS बने और Kerala कैडर में नियुक्त हुए। 1968 बैच के IPS अधिकारी, डोभाल ने पाकिस्तान में 7 साल अंडरकवर रहकर और 1980-90 के दशक में उग्रवाद-विरोधी अभियानों (ऑपरेशन ब्लू स्टार) में अहम भूमिका निभाकर देश की रक्षा की है।
वे भारत की खुफिया एजेंसी Intelligence Bureau (IB) के प्रमुख भी रह चुके हैं। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे भरोसेमंद सलाहकारों में से एक, जो देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा नीति तय करते हैं। जासूसी और अनुभव: डोभाल ने पाकिस्तान में एक भेष बदलकर (भिखारी बनकर) कहूटा परमाणु संयंत्र की जानकारी जुटाई थी। उन्होंने 6 साल पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग में भी काम किया। ऑपरेशन ब्लू स्टार (1984): अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में छिपे आतंकवादियों की जासूसी के लिए वे खुद एक पाकिस्तानी जासूस के रूप में वहां दाखिल हुए।
अजीत डोभाल को सम्मान प्राप्त
कीर्ति चक्र: कीर्ति चक्र पाने वाले वह पहले पुलिस अधिकारी हैं। शांतिकाल में वीरता के लिए मिलने वाला दूसरा सबसे बड़ा सम्मान।
NSA के रूप में भूमिका: 2014 से NSA के रूप में उन्होंने म्यांमार सर्जिकल स्ट्राइक (2015), उरी सर्जिकल स्ट्राइक (2016), और बालाकोट एयर स्ट्राइक (2019) जैसी बड़ी रणनीतियों को अंजाम दिया।
द डोभाल डॉक्ट्रिन: उनका मुख्य सिद्धांत "रक्षात्मक आक्रामक" (Defensive Offensive) है, जिसमें हमला होने का इंतजार करने के बजाय दुश्मन के घर में घुसकर कार्रवाई करना शामिल है। वह अपनी रणनीतिक सोच और “डोभाल डॉक्ट्रिन” (आक्रामक सुरक्षा नीति) के लिए जाने जाते हैं। उनमें संकट के समय तेजी से और सटीक निर्णय लेने की क्षमता रही है।

अजीत डोभाल की प्रमुख उपलब्धियां
ऑपरेशन ब्लैक थंडर (1988): Operation Black Thunder में अहम भूमिका, जिसमें आतंकवादियों को हराया गया।
मिजोरम और पंजाब में शांति: उग्रवाद को खत्म करने में योगदान।
पाकिस्तान में अंडरकवर मिशन: कई साल तक गुप्त रूप से काम किया।
2016 सर्जिकल स्ट्राइक: भारत की रणनीति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका।
बालाकोट एयर स्ट्राइक (2019): Balakot airstrike के दौरान सुरक्षा रणनीति में योगदान।
पाकिस्तान में करीब 7 साल तक कैसे रहे?
अजीत डोभाल के बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने पाकिस्तान में करीब 7 साल तक अंडरकवर (गुप्त पहचान में) रहकर काम किया। हालांकि इस पूरी कहानी के आधिकारिक और विस्तार से प्रमाण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं, क्योंकि यह खुफिया ऑपरेशनों से जुड़ा मामला है। अजीत डोभाल ने Intelligence Bureau (IB) के लिए काम करते हुए गुप्त मिशन किए। उन्होंने अपनी असली पहचान छिपाकर एक स्थानीय मुस्लिम व्यक्ति का रूप धारण किया। वे आम नागरिक की तरह रहते थे, ताकि किसी को शक न हो। उन्होंने अपनी भाषा, पहनावा और रहन-सहन पूरी तरह स्थानीय लोगों जैसा बना लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने अपनी पहचान छिपाने के लिए कान की सर्जरी तक करवाई, ताकि वे एकदम स्थानीय दिखें। वे मस्जिदों में जाते थे और समाज में घुल-मिलकर रहते थे। हालांकि इस मिशन के बारे में कई बातें कहानियों और इंटरव्यू के आधार पर कही जाती हैं लेकिन पूरी सच्चाई आज भी गुप्त है। खुद अजीत डोभाल ने भी बहुत सीमित जानकारी ही सार्वजनिक रूप से साझा की है।
अजीत डोभाल के बच्चे, बिजनेस और पॉलिसी क्षेत्र में एक्टिव
अजीत डोभाल के दो बेटे हैं, जो बिजनेस और पॉलिसी के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनके बड़े बेटे का नाम शौर्य डोभाल है और छोटे बेटे का नाम विवेक डोभाल।
शौर्य डोभाल : वह एक इन्वेस्टमेंट बैंकर हैं और 'इंडिया फाउंडेशन' (India Foundation) नामक थिंक टैंक के सह-संस्थापक व निदेशक हैं, जो भाजपा से निकटता के लिए जाना जाता है। वे भाजपा की उत्तराखंड इकाई के साथ भी सक्रिय रहे हैं।
विवेक डोभाल: वे मुख्य रूप से सिंगापुर में एक इन्वेस्टमेंट फर्म (Torch Investment) और हेज फंड के प्रबंधन में शामिल हैं।
नोटः सारी जानकारी विकिपिडिया और अन्य रिपोर्ट्स से ली गई है।