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Nari

अब दूध का पैकेट नहीं पहुचाएंगा पर्यावरण काे नुकसान, Mother Dairy ने बनाया मिट्टी में गलने वाला पाउच

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 02 Jun, 2026 04:03 PM
अब दूध का पैकेट नहीं पहुचाएंगा पर्यावरण काे नुकसान, Mother Dairy ने बनाया मिट्टी में गलने वाला पाउच

नारी डेस्क:  मदर डेयरी ने मंगलवार को एक नया दूध का पाउच पेश किया, जो पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के तहत, मिट्टी में अपने-आप गल जाता है। मदर डेयरी, जो भारत में ताज़ा दूध सप्लाई करने वाली प्रमुख कंपनियों में से एक है, कई राज्यों में हर दिन लगभग 55 लाख लीटर दूध बेचती है। यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, मदर डेयरी ने "भारत का पहला, मिट्टी में अपने-आप गल जाने वाला दूध का पाउच" पेश किया, जो पर्यावरण में प्लास्टिक का कोई निशान नहीं छोड़ेगा।

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विश्व पर्यावरण दिवस से नए पैकेट में मिलेगा दूध

शुरुआत में, कंपनी इस नए गल जाने वाले दूध के पाउच का इस्तेमाल अपने गाय के दूध वाले वेरिएंट में करेगी, जो 5 जून यानी विश्व पर्यावरण दिवस से दिल्ली-NCR में बेचा जाएगा। कंपनी  ने बताया कि उसके नए दूध के पाउच में अपनी तरह की पहली, गल जाने वाली पैकेजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक पाउच को एक ऐसे मोम (wax) में बदल देती है, जिसे मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव (microbes) अपने-आप तोड़कर प्राकृतिक तत्वों में बदल देते हैं।
 

इससे दूध की कीमत पर नहीं पड़ेगा असर

NDDB के चेयरमैन मीनेश शाह ने कहा- "यह नई पैकेजिंग इस तरह से डिज़ाइन की गई है कि यह सदियों के बजाय कुछ ही सालों में मिट्टी में अपने-आप गल जाएगी और सबसे अहम बात यह है कि यह बदलाव, दूध की कीमतों पर बिना कोई असर डाले किया जा रहा है।" । शाह ने कहा, "मदर डेयरी द्वारा भारत का पहला, अपने-आप गल जाने वाला दूध का पाउच लॉन्च करना, इस क्षेत्र की एक और बड़ी उपलब्धि है। यह दिखाता है कि यह क्षेत्र लगातार आगे बढ़कर नए मानक स्थापित करने में सक्षम है, और साथ ही यह भविष्य के लिए तैयार और सस्टेनेबल इकोसिस्टम के प्रति भी पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।"
 

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 1974 में हुई थी  मदर डेयरी की शुरुआत

मदर डेयरी के मैनेजिंग डायरेक्टर जयतीर्थ चारी ने कहा- "हमने चार साल से भी ज़्यादा समय तक रिसर्च करके यह ऐसा दूध का पाउच तैयार किया है, जो पर्यावरण में प्लास्टिक का कोई निशान नहीं छोड़ता।" उन्होंने बताया कि ये दूध के पाउच रीसायकल तो होते ही रहेंगे, लेकिन इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये प्राकृतिक तत्वों में बदल जाते हैं। इस तरह, ये प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने में भी मदद करते हैं। मदर डेयरी की शुरुआत 1974 में हुई थी। यह 'मदर डेयरी' ब्रांड के तहत दूध और दूध से बने उत्पादों (जैसे- दही, आइसक्रीम, पनीर, घी आदि) का उत्पादन, मार्केटिंग और बिक्री करती है। कंपनी के पास एक विविध पोर्टफोलियो भी है, जिसमें 'धारा' ब्रांड के तहत खाद्य तेल और 'सफल' ब्रांड के तहत ताज़े फल और सब्ज़ियां फ्रोज़न सब्ज़ियाँ और स्नैक्स, पल्प और कॉन्संट्रेट आदि उत्पाद शामिल हैं। 
 

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