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स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के बाद प्रेगनेंट होना क्यों नहीं आसान, जानिए क्या है यह ट्रीटमेंट

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 14 Apr, 2021 02:08 PM
स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के बाद प्रेगनेंट होना क्यों नहीं आसान, जानिए क्या है यह ट्रीटमेंट

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट एक ऐसी प्रक्रिया है, कैंसर या खराब बोन मैरो पेशेंट को दी जाती है। इस प्रक्रिया के द्वारा अस्थि मज्जा का कार्यक्षमता को बेहतर बनाया जाता है। वहीं, कैंसर रोगियों में इस प्रकिया द्वारा स्टेम कोशिकाओं को डिसफंक्शनल या स्वस्थ कोशिकाओं में बदल दिया जाता है। इसके अलावा यह हेमैटोलॉजिकल या रक्त संबंधी विकृतियों, कमजोर इम्यूनिटी या अन्य बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के लिए भी यह तकनीक काफी फायदेमंद है। मगर, यह ट्रीटमेंट लेने के बाद महिलां कंसीव करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के बाद प्रेग्नेंट काफी मुश्किल हो जाता है। हालांकि स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के बाद कंसीव करना रेडिएशन, कीमोथेरेपी और उम्र जैसे कारकों पर निर्भर करता है। ऐसे में अगर आप स्टेम सेल ट्रांसप्लांट करवाने से पहले इसके बारे में जरूर जान लें...

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के बाद प्रेगनेंसी मुश्किल क्यों है?

ल्यूकेमिया या लिम्फोमा जैसे कैंसर के इलाज में स्टेम सेल ट्रांसप्लांट बहुत मददगार है क्योंकि इससे मरीज की जिंदगी बढ़ जाती है। मगर, इसके कारण अंडाशय के प्रजनन अंगों को नुकसान पहुंचता है इसलिए इसकी वजह से कंसीव करने में दिक्कत आ सकती है। वहीं, प्रीट्रांसप्लांट कंडीशनिंग प्रोटोकॉल शरीर के टॉक्सिक इफेक्ट पर असर डालते हैं।

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क्या IVF से हो सकती हैं प्रेगनेंट?

हालांकि महिलाएं IVF द्वारा नेचुरली या मकैनिकली तरीकों से कंसीव कर सकती हैं लेकिन इससे शिशु का कम वजन, ग्रभपात या प्रेगनेंसी में अन्य जटिलताओं का खतरा रहता है। शोध के मुताबिक ट्रीटमेंट के लिए यूज किए गए एल्काइलेटिंग एजेंट और रेडिएशन प्रजनन क्षमता को अधिक नुकसान पहुंचाते हैं।

क्या नुकसान को रिवर्स किया जा सकता है?

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट महिलाओं को स्थायी रूप से बांझ बना सकता है जबकि अकुछ मामलों में महिलाएं प्रजनन क्षमता का वापिस हासिल भी कर सकती हैं जो इन कारकों पर निर्भर करता है...

• समय रहते बीमारी का इलाज करवाना और ट्रीटमेंट के समय महिला की आयु 25 से कम होना
• रेडिएशन और अल्काइलेटिंग एजेंटों के साथ साइकल की संख्या।
• हालांकि शोध के मुताबिक, अलकाइलेटिंग एजेंटों की कम खुराक से प्रजनन क्षमता को होने वाले नुकसान को कम या उल्टा किया जा सकता है।

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किन महिलाओं को होती है अधिक दिक्कत?

जिन महिलाओं के शरीर में इम्युनोसप्रेसिव थेरेपी के दौरान बॉडी इरेडीएशन ना हुआ हो। ऐसी महिलाओं में रिकवरी की दर 79% तक होती है। जिन महिलाओं की उम्र अधिक हो और टोटल बॉडी में इरेडीएशन हुआ हो उन्हें हाई रिस्क ग्रुप में रखा जाता है। इनमें रिकवरी दर भी कम हो जाती है।

कैसे हो सकती हैं गर्भवती?

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के बाद महिलाएं Mature oocyte cryopreservation द्वारा बिना किसी खर्च व जटिलता के गर्भवती हो सकती है। यह एक ऐसी विधि है, जिसके जरिए अंडाशय से अंडों को निकालकर हार्वेस्ट फ्रोजन व स्टोर किया जाता है। इससे महिलाएं बाद में उन्हें इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन एग्स को ट्रांसप्लांट से पहले स्टोर करवाना पड़ता है।

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