नारी डेस्क: हर साल बजट के दिन एक तस्वीर सबसे ज्यादा चर्चा में रहती है संसद की सीढ़ियों पर खड़े वित्त मंत्री और उनके हाथ में एक लाल रंग का ब्रीफकेस। यह लाल ब्रीफकेस सालों तक बजट की पहचान बना रहा है। सवाल यह है कि आखिर बजट और लाल रंग का रिश्ता कहां से शुरू हुआ और इसके पीछे क्या वजह है? इस साल भी 1 फरवरी को आम बजट पेश किया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार बजट रविवार को पेश होगा। इसी मौके पर जानते हैं बजट के लाल रंग से जुड़ी पूरी कहानी।
बजट और लाल रंग का संबंध कैसे शुरू हुआ?
भारत में बजट और लाल रंग का रिश्ता ब्रिटिश शासन के समय से जुड़ा है। ब्रिटेन में लंबे समय से सरकारी, कानूनी और वित्तीय दस्तावेजों को लाल रंग के कवर में रखा जाता था। वहां लाल रंग को सत्ता, अधिकार और गंभीर फैसलों का प्रतीक माना जाता था। जब अंग्रेजों ने भारत में प्रशासनिक व्यवस्था बनाई, तो उन्होंने बजट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों के लिए भी वही परंपरा अपनाई। इसी वजह से बजट को लाल कवर या लाल ब्रीफकेस में रखने की शुरुआत हुई।
भारत में यह परंपरा कब शुरू हुई?
भारत का पहला बजट 1860 में पेश किया गया था। उस समय भारत पूरी तरह अंग्रेजों के शासन में था और प्रशासनिक नियम भी ब्रिटिश परंपराओं पर आधारित थे। उसी समय से बजट को लाल रंग की फाइल या ब्रीफकेस में रखने की परंपरा शुरू हुई, जो आज़ादी के बाद भी कई दशकों तक चली।
लाल रंग का क्या मतलब था?
लाल रंग सिर्फ दिखावे के लिए नहीं चुना गया था। इसे जिम्मेदारी, शक्ति, और गंभीर फैसलों का प्रतीक माना जाता है। बजट एक ऐसा दस्तावेज होता है जिसमें देश की आय, खर्च, टैक्स, योजनाएं और आर्थिक नीतियां तय होती हैं। इसलिए लाल रंग यह दिखाता था कि इस फाइल में देश के भविष्य से जुड़े अहम फैसले दर्ज हैं।

आम लोगों के लिए बजट की पहचान बना लाल ब्रीफकेस
समय के साथ लाल ब्रीफकेस सिर्फ एक सरकारी परंपरा नहीं रहा, बल्कि आम जनता के लिए बजट का प्रतीक बन गया। जैसे ही टीवी पर वित्त मंत्री के हाथ में लाल फाइल दिखाई देती थी, लोग समझ जाते थे कि बजट आने वाला है। बिना लाल ब्रीफकेस के बजट की कल्पना करना भी लोगों के लिए मुश्किल हो गया था।
2019 में बदली परंपरा
साल 2019 में पहली बार यह परंपरा बदली गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लाल ब्रीफकेस की जगह लाल रंग के साधारण फोल्डर में बजट दस्तावेज पेश किए। इसे औपनिवेशिक दौर की परंपराओं से बाहर निकलने का प्रतीक माना गया। सरकार का संदेश साफ था कि देश अब न सिर्फ अपनी नीतियां, बल्कि अपने प्रतीकों और परंपराओं को भी नए नजरिए से देख रहा है।
रंग बदला, लेकिन इतिहास आज भी ज़िंदा
हालांकि अब बजट लाल ब्रीफकेस में नहीं आता, लेकिन लाल रंग का इतिहास आज भी बजट की कहानी का अहम हिस्सा है। यह रंग उस दौर की याद दिलाता है जब बजट सिर्फ एक आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि सत्ता और शासन का प्रतीक माना जाता था। यही वजह है कि आज भी बजट और लाल रंग का ज़िक्र होते ही लोगों की जिज्ञासा बढ़ जाती है।