नारी डेस्क : कैंसर एक गंभीर बीमारी है और इसके कई प्रकार होते हैं। हर कैंसर का कारण एक जैसा नहीं होता, लेकिन तंबाकू, शराब, अस्वास्थ्यकर खानपान और शारीरिक निष्क्रियता जैसे कई जोखिम कारकों को जीवनशैली में बदलाव के जरिए कम किया जा सकता है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद यानी ICMR की कैंसर संबंधी सामग्री में भी तंबाकू और शराब जैसे जोखिम कारकों से बचने तथा स्वस्थ जीवनशैली पर जोर दिया गया है। ध्यान रखें, कैंसर से बचाव की कोई 100 फीसदी गारंटी नहीं होती। लेकिन अपनी रोजमर्रा की आदतों में कुछ जरूरी बदलाव करके कई ज्ञात जोखिम कारकों को कम किया जा सकता है। साथ ही, शरीर में लगातार बने रहने वाले असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज न करना और जरूरत के अनुसार डॉक्टर से जांच करवाना भी जरूरी है।
क्या होता है कैंसर और शरीर में कैसे बनता है?
कैंसर ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की कुछ कोशिकाएं सामान्य नियंत्रण से बाहर होकर असामान्य तरीके से बढ़ने और विभाजित होने लगती हैं। सामान्य तौर पर शरीर पुरानी या क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को हटाकर उनकी जगह नई कोशिकाएं बनाता है। लेकिन जब इस प्रक्रिया में गड़बड़ी होती है तो असामान्य कोशिकाएं लगातार बढ़ सकती हैं। कुछ कैंसर में ये कोशिकाएं गांठ या ट्यूमर बना सकती हैं और आसपास के ऊतकों को प्रभावित कर सकती हैं। कुछ कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों तक भी फैल सकते हैं।

कितने प्रकार के होते हैं कैंसर?
कैंसर एक अकेली बीमारी नहीं है, बल्कि इसके कई प्रकार होते हैं। आमतौर पर कैंसर की पहचान इस आधार पर की जाती है कि वह शरीर के किस अंग या ऊतक से शुरू हुआ है। इनमें स्तन कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, मुंह और गले का कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर, पेट का कैंसर, लिवर कैंसर और ब्लड कैंसर समेत कई प्रकार शामिल हैं। ICMR की आधिकारिक गाइडलाइंस में भी अलग-अलग प्रकार के कैंसर के लिए अलग-अलग दस्तावेज और उपचार संबंधी दिशानिर्देश उपलब्ध हैं।
कैंसर का खतरा कम करने के लिए क्या करें?
शराब से बचें
शराब का सेवन कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा है और कुछ कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। ICMR की सामग्री में शराब को कई कैंसर समेत अन्य बीमारियों से जुड़े जोखिम कारक के रूप में बताया गया है। इसलिए कैंसर का जोखिम कम करने के लिहाज से शराब न पीना सबसे सुरक्षित विकल्प है।
तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाएं
सिगरेट, बीड़ी, सिगार और दूसरे तरह के तंबाकू के साथ-साथ चबाने वाला तंबाकू भी कैंसर के जोखिम से जुड़ा है। ICMR के कैंसर मोनोग्राफ में तंबाकू को ओरल कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल किया गया है। पान और सुपारी/बेटल नट का सेवन भी जोखिम से जुड़ा है। इसलिए तंबाकू का सेवन नहीं करना कैंसर की रोकथाम की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है।

रोजमर्रा की जिंदगी में शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं
लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत को कम करें। रोजाना अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। सीढ़ियों का इस्तेमाल करना, पैदल चलना, घर के काम करना या नियमित व्यायाम जैसी गतिविधियां आपको सक्रिय रखने में मदद कर सकती हैं।
वजन को स्वस्थ सीमा में रखने की कोशिश करें
अधिक वजन और मोटापा कई गैर-संचारी बीमारियों के जोखिम से जुड़े हैं। इसलिए संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि के जरिए स्वस्थ वजन बनाए रखने की कोशिश करें।
डाइट में फल और सब्जियां शामिल करें
रोज के भोजन में पर्याप्त मात्रा में ताजे फल और सब्जियां शामिल करना बेहतर खानपान का हिस्सा है। ICMR की सामग्री में भी फल और सब्जियों के सेवन को कैंसर और हृदय रोग जैसे गैर-संचारी रोगों के कम जोखिम से जोड़ा गया है। इसके साथ ही भोजन में विविधता रखें और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड या अत्यधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों पर निर्भरता कम करें।
शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज न करें
शरीर में कोई ऐसा बदलाव जो लंबे समय तक बना रहे, उसे नजरअंदाज न करें। जैसे किसी जगह लगातार गांठ, लंबे समय तक न भरने वाला घाव, असामान्य रक्तस्राव, बिना वजह वजन कम होना या शरीर के किसी हिस्से में लगातार परेशानी। इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने का मतलब सीधे कैंसर नहीं है, लेकिन ऐसे बदलाव लगातार बने रहें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्क्रीनिंग करवाएं
कुछ कैंसर की स्क्रीनिंग शुरुआती चरण में बीमारी या कैंसर से पहले होने वाले बदलावों का पता लगाने में मदद कर सकती है। लेकिन हर व्यक्ति को हर तरह की कैंसर स्क्रीनिंग की जरूरत नहीं होती। स्क्रीनिंग उम्र, लिंग, पारिवारिक इतिहास और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर अलग हो सकती है। इसलिए अपने डॉक्टर से बात करके उचित स्क्रीनिंग के बारे में जानकारी लें। ICMR कैंसर की रोकथाम और स्क्रीनिंग से जुड़े कार्यक्रमों पर भी काम कर रहा है।
कैंसर से बचाव के लिए क्या नहीं करना चाहिए?
सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, खैनी, जर्दा और अन्य तंबाकू उत्पादों से दूरी बनाएं।
कैंसर के जोखिम को देखते हुए शराब से बचना बेहतर है।
लगातार कई घंटे एक ही जगह बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठकर चलें और अपनी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं।
बहुत ज्यादा तला-भुना, अत्यधिक प्रोसेस्ड और पोषण की दृष्टि से कमजोर भोजन को रोज की डाइट का आधार न बनाएं। इसके बजाय फल, सब्जियों और संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें।
क्या परिवार में कैंसर होने से आपको भी कैंसर होगा?
जरूरी नहीं। परिवार में कैंसर का इतिहास होने से कुछ लोगों में कुछ विशेष कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें निश्चित रूप से कैंसर होगा। ऐसे लोगों को अपने पारिवारिक इतिहास की जानकारी डॉक्टर को देनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर उम्र और जोखिम के अनुसार उचित जांच या स्क्रीनिंग की सलाह दे सकते हैं।

याद रखें, बचाव के साथ जागरूकता भी जरूरी
कैंसर से बचाव के लिए सिर्फ एक आदत बदलना पर्याप्त नहीं है। तंबाकू से दूरी, शराब से बचाव, स्वस्थ खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन और जरूरत के अनुसार स्क्रीनिंग ये सभी मिलकर बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में मदद कर सकते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि शरीर में दिखाई देने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज न करें। किसी लक्षण को देखकर खुद से कैंसर का निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर से उचित जांच और सलाह लें।