20 JUNSATURDAY2026 9:49:44 PM
Life Style

डराने वाली रिपोर्ट! बिना लक्षण फैल रही ये बीमारी, हर 3 में से 1 शख्स चपेट में

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 18 Jun, 2026 03:04 PM
डराने वाली रिपोर्ट! बिना लक्षण फैल रही ये बीमारी, हर 3 में से 1 शख्स चपेट में

नारी डेस्क: देश के पूर्वोत्तर राज्यों से तपेदिक (टीबी) को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। हाल ही में किए गए एक बड़े स्क्रीनिंग अभियान में पता चला है कि टीबी से संक्रमित पाए गए लोगों में बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की है, जिनमें बीमारी के कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई ही नहीं दे रहे थे। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे टीबी नियंत्रण अभियान के लिए नई और गंभीर चुनौती मान रहे हैं।

जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

स्वास्थ्य मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, नेशनल ट्यूबरक्लोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम (NTEP) के तहत जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच पूर्वोत्तर राज्यों में विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य उन लोगों की पहचान करना था, जो टीबी के अधिक जोखिम वाले वर्गों में आते हैं। जांच के दौरान कुल 41,727 टीबी मरीजों की पहचान की गई। इनमें से 14,356 मरीज ऐसे पाए गए, जिनमें बीमारी के कोई सामान्य लक्षण मौजूद नहीं थे। यानी कुल मामलों में लगभग 34 प्रतिशत लोग ऐसे थे, जिन्हें खुद भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि वे टीबी से संक्रमित हैं।

PunjabKesari

बिना लक्षण वाले मरीज क्यों हैं चिंता का कारण

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी के ऐसे मरीज सबसे बड़ी चुनौती बन सकते हैं, क्योंकि उन्हें बीमारी का पता ही नहीं चलता। चूंकि उनमें खांसी, बुखार, वजन कम होना या कमजोरी जैसे सामान्य लक्षण नहीं दिखते, इसलिए वे इलाज कराने अस्पताल तक नहीं पहुंचते। ऐसे लोग सामान्य जीवन जीते रहते हैं और अनजाने में संक्रमण फैलाने का जोखिम भी बढ़ा सकते हैं। यही कारण है कि अब स्वास्थ्य विभाग केवल अस्पतालों में आने वाले मरीजों पर निर्भर रहने के बजाय समुदाय स्तर पर सक्रिय जांच अभियान चला रहा है।

39 लाख लोगों की हुई स्क्रीनिंग

टीबी उन्मूलन अभियान के तहत पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों में लगभग 39 लाख लोगों की जांच की गई। इनमें से करीब 6 लाख लोगों का चेस्ट एक्स-रे भी कराया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर हुई स्क्रीनिंग की वजह से उन मरीजों की पहचान संभव हो सकी, जो सामान्य परिस्थितियों में जांच नहीं करवाते और लंबे समय तक बीमारी के साथ जीते रहते।

असम में मिले सबसे ज्यादा मामले

रिपोर्ट के अनुसार, बिना लक्षण वाले टीबी मरीजों की सबसे अधिक संख्या असम में दर्ज की गई। यहां 10,362 ऐसे मरीज पाए गए जिन्हें टीबी था, लेकिन बीमारी के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे थे। इसके अलावा मेघालय में 1,055, नागालैंड में 857, त्रिपुरा में 510, अरुणाचल प्रदेश में 479, मणिपुर में 465, सिक्किम में 380 और मिजोरम में 248 ऐसे मामले सामने आए। ये आंकड़े बताते हैं कि टीबी केवल लक्षण दिखाने वाले लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में लोग बिना जानकारी के भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

ये भी पढ़ें:  Jaggery Vs Sugar: गुड़ या शक्कर, किससे ज्यादा बढ़ता है ब्लड शुगर

तकनीक की मदद से हो रही जल्द पहचान

टीबी की समय रहते पहचान करने के लिए कई राज्यों ने आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। मेघालय में 'कफ अगेंस्ट टीबी' ऐप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित पोर्टेबल एक्स-रे यूनिट्स का उपयोग किया जा रहा है।इन तकनीकों की मदद से दूर-दराज के इलाकों में भी मरीजों की जांच आसान हो रही है और बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही पहचान संभव हो पा रही है।

PunjabKesari

संभावित मरीजों की जांच में भी हुई बढ़ोतरी

रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 तक पूर्वोत्तर क्षेत्र में 10.7 लाख से अधिक संभावित टीबी मरीजों की जांच की गई। यह आंकड़ा दर्शाता है कि स्वास्थ्य विभाग अब पहले से अधिक सक्रियता के साथ टीबी की पहचान और रोकथाम पर काम कर रहा है। टीबी जांच दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में प्रति लाख आबादी पर संभावित टीबी जांच दर 2,062 थी, जो 2025 में बढ़कर 2,645 हो गई। यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहले की तुलना में अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी का जल्द पता लगना बेहद महत्वपूर्ण है। समय पर जांच और इलाज शुरू होने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है और संक्रमण के प्रसार को भी रोका जा सकता है।

अगर किसी व्यक्ति को लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना या कमजोरी महसूस हो रही है, तो उसे तुरंत जांच करवानी चाहिए। वहीं, जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और भी जरूरी हो जाती है।
 
 


 

Related News