20 AUGTHURSDAY2026 10:07:38 PM
Life Style

अब आपके घर पर रखा सोना आएगा देश के काम, बड़े काम की है ये Golden Scheme

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 20 Aug, 2026 12:11 PM
अब आपके घर पर रखा सोना आएगा देश के काम, बड़े काम की है ये Golden Scheme

नारी डेस्क:  सरकार ज्वैलर्स के साथ गोल्ड मॉनेटाइजेशन के एक ऐसे तरीके पर बातचीत कर रही है जिसमें ज्वैलर्स घरों में रखा सोना स्वीकार करेंगे और यह जमा राशि एक डीमैट अकाउंट में रखी जाएगी, जिस पर जमा की गई कीमत के हिसाब से ब्याज मिलेगा। 2015 की बैंक-आधारित गोल्ड मॉनेटाइज़ेशन स्कीम के तहत मार्च 2025 तक सिर्फ़ 38 टन सोना ही जमा हो पाया, जबकि घरों में 20,000 टन से ज़्यादा सोना रखा हुआ है। इसलिए, इस स्कीम को नए सिरे से तैयार करने में यह बात ज़्यादा अहम है कि घर वाले अपना सोना किसके पास रखने पर भरोसा करते हैं, न कि इस बात पर कि कितना रिटर्न मिल रहा है।

PunjabKesari
क्या है ये स्कीम? 

योजना के तहत लोग अपना सोना ज्वैलर के पास जमा कर सकेंगे और इसके बदले उन्हें जमा सोने के मूल्य पर सालाना 2.5% ब्याज मिलने की संभावना है। जमा करने वाला व्यक्ति बैंक ब्रांच के बजाय अपने पास के ज्वेलर के पास असली सोना ले जाएगा। यह स्कीम डीमैट अकाउंट के ज़रिए लागू की जाएगी, ठीक वैसे ही जैसे शेयर होते हैं, और सोने की जमा राशि जमाकर्ता के डीमैट अकाउंट में दिखेगी। जमाकर्ता को जमा किए गए सोने की कीमत पर ब्याज मिलेगा।  ज्वेलर सोना इकट्ठा करने में अहम भूमिका निभाएंगे और वे कॉन्टैक्ट पॉइंट बनेंगे जो अभी मौजूदा स्कीम में बैंक होते हैं।


डीमैट अकाउंट क्या है?

डीमटेरियलाइज़्ड या डीमैट अकाउंट में सिक्योरिटीज़ इलेक्ट्रॉनिक रूप में डिपॉजिटरी के पास रखी जाती हैं, जिससे फिजिकल सर्टिफिकेट की ज़रूरत खत्म हो जाती है। डीमैट अकाउंट में सोना जमा करने से क्लेम को इलेक्ट्रॉनिक रूप में ट्रांसफर और ट्रेड किया जा सकता है, जबकि बैंक वॉल्ट में रखे असली सोने के साथ ऐसा नहीं होता। प्रस्ताव के तहत लोग ज्वैलर के पास भौतिक सोना जमा कर सकेंगे। इस योजना को शेयरों की तरह डीमैट अकाउंट के जरिए लागू किया जा सकता है। यानी जमा किया सोना डीमैट अकाउंट में दर्ज होगा और इसके बदले जमा करने वाले व्यक्ति को ब्याज मिलेगा। कोटक महिंद्रा एएमसी के निलेश शाह ने कहा- अगर घरों में रखे सोने का सिर्फ 10% भी मोनेटाइज किया जाए तो इसकी कीमत 400 अरब डॉलर हो सकती है। यानी देश का 38 लाख करोड़ रुपए के सोने के आयात बिल बच सकता है।

PunjabKesari
सरकार अब गोल्ड मॉनेटाइज़ेशन पर दोबारा क्यों विचार कर रही है?

 एक्सचेंज रेट पर एक साथ कई वजहों से दबाव है। वेस्ट एशिया संकट के बाद ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों से इंपोर्ट बिल बढ़ गया है। घरेलू शेयर बाज़ार को लेकर निवेशकों की चिंता का असर कैपिटल इनफ्लो पर पड़ा है। ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल के चेयरमैन ने कहा कि सरकार ने बताया है कि वह इस प्रस्ताव को लेकर गंभीर है और जल्द से जल्द इसे लागू करने का भरोसा दिया है। परिवार सोने-चांदी से जुड़े मामलों में अपने पारिवारिक जौहरियों के साथ लेन-देन करने में ज़्यादा सहज महसूस करते हैं, और जब बैंक यह भूमिका निभाते हैं तो वह सहजता नहीं होती। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट के अनुसार, मौजूदा प्रस्ताव में सबसे बड़ा बदलाव कलेक्शन पॉइंट को बैंकों से आगे ले जाना है।
 

Related News