नारी डेस्क : आटा हमारी रोजमर्रा की डाइट का अहम हिस्सा है। ऐसे में अगर गेहूं के आटे में किसी दूसरे पदार्थ की मिलावट की जाए तो यह सिर्फ उपभोक्ता के साथ धोखा नहीं, बल्कि गंभीर खाद्य सुरक्षा का मुद्दा बन सकता है। उत्तर प्रदेश की कुछ आटा मिलों को लेकर सामने आई एक अंडरकवर जांच ने इसी तरह के सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, आगरा और फिरोजाबाद की कुछ आटा मिलों में गेहूं के आटे में राजस्थान से लाए गए पत्थर के पाउडर को मिलाने का आरोप लगाया गया है। दावा है कि ऐसा आटे का वजन बढ़ाकर अतिरिक्त मुनाफा कमाने के लिए किया जा रहा था।
प्रति किलो कुछ पैसे का अतिरिक्त मुनाफा कमाने का दावा
वायरल अंडरकवर रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कथित मिलावट के जरिए मिल संचालकों को प्रति किलो करीब 70 से 80 पैसे का अतिरिक्त मार्जिन मिल रहा था। बड़ी मात्रा में आटा तैयार करने वाली मिलों के लिए यह रकम रोजाना हजारों रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह आंकड़ा अंडरकवर रिपोर्ट में किया गया दावा है। इसे आधिकारिक रूप से प्रमाणित आंकड़ा मानने से पहले संबंधित विभाग की जांच और दस्तावेजों को देखना जरूरी है।

अलीगढ़ में 400 किलो से ज्यादा पाउडर बरामद होने का मामला
ऐसा मामला पहली बार सामने आने का दावा नहीं है। इससे पहले अलीगढ़ की एक आटा मिल पर खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई की रिपोर्ट सामने आई थी, जहां 400 किलो से ज्यादा पत्थर जैसा पाउडर बरामद किए जाने की बात कही गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, उस मामले में बरामद पदार्थ को अलबास्टर बताया गया था और आरोप था कि इसे आटे में मिलाया जा रहा था। यह आटा 'पंचवटी आटा' ब्रांड से जुड़ा बताया गया था। इसलिए इस तरह के मामलों में केवल वायरल सोशल मीडिया पोस्ट पर निर्भर रहने के बजाय खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई और लैब रिपोर्ट को सबसे महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए।
क्या आटे में कैल्शियम कार्बोनेट मिलाना हमेशा खतरनाक है?
यहां एक जरूरी बात समझना बेहद जरूरी है। वायरल दावों में जिस पाउडर को कैल्शियम कार्बोनेट बताया जा रहा है, उसे सीधे 'जहर' कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा। कैल्शियम कार्बोनेट एक ऐसा पदार्थ है जिसका नियंत्रित मात्रा में कई वैध उपयोग होता है। FSSAI के दस्तावेजों में भी खाद्य उत्पादों में कैल्शियम कार्बोनेट की जांच के तरीके दिए गए हैं। लेकिन अगर किसी खाद्य पदार्थ में कोई पदार्थ बिना अनुमति, गलत गुणवत्ता या निर्धारित सीमा के बाहर मिलाया जाता है, तो यह खाद्य सुरक्षा और मिलावट का गंभीर मुद्दा बन सकता है। इसलिए कथित पत्थर पाउडर की वास्तविक संरचना, मात्रा और स्वास्थ्य प्रभाव जानने के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की जांच जरूरी है।
FSSAI के मुताबिक आटा कैसा होना चाहिए?
FSSAI के आधिकारिक खाद्य मानकों में Wheat Flour (Atta) को साफ गेहूं की मिलिंग या ग्राइंडिंग से प्राप्त उत्पाद के रूप में परिभाषित किया गया है। इसमें असामान्य गंध या अन्य अवांछित अशुद्धियां नहीं होनी चाहिए। इसका मतलब है कि किसी मिल में जानबूझकर गैर-मानक पदार्थ मिलाकर आटे का वजन बढ़ाना खाद्य गुणवत्ता के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। सोशल मीडिया पर एक आसान तरीका वायरल है, जिसमें एक गिलास पानी में एक चम्मच आटा डालकर नीचे बैठने वाले कणों को देखकर मिलावट पहचानने का दावा किया जाता है। लेकिन सिर्फ पानी वाले घरेलू टेस्ट से आटे में पत्थर का पाउडर होने की पक्की पुष्टि नहीं की जा सकती। अलग-अलग पदार्थ पानी में अलग तरीके से व्यवहार कर सकते हैं और सही पहचान के लिए वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी हो सकता है। FSSAI के पास खाद्य पदार्थों की मिलावट और गुणवत्ता जांचने के लिए आधिकारिक Manual of Methods of Analysis of Foods उपलब्ध है।

ग्राहक आटा खरीदते समय क्या सावधानी बरतें?
अगर आपको आटे की गुणवत्ता को लेकर संदेह है तो कुछ सामान्य सावधानियां अपनाई जा सकती हैं
पैकेट पर FSSAI लाइसेंस नंबर जरूर देखें।
पैकेजिंग, बैच नंबर और निर्माण/एक्सपायरी की जानकारी जांचें।
बहुत ज्यादा संदिग्ध या खराब पैकेजिंग वाले उत्पाद से बचें।
संभव हो तो भरोसेमंद ब्रांड या ऐसी स्थानीय मिल से आटा खरीदें जिसकी सफाई और पिसाई की प्रक्रिया आपके सामने हो।
आटे में असामान्य रंग, गंध या बाहरी कण नजर आएं तो उसे इस्तेमाल न करें।
मिलावट का संदेह होने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत करें।
क्या हर पैकेट वाला आटा संदिग्ध है?
बिल्कुल नहीं। कुछ आटा मिलों से जुड़ी कथित मिलावट की खबरों को पूरे बाजार या सभी ब्रांडों पर लागू नहीं किया जा सकता। किसी ब्रांड या मिल को दोषी तभी माना जाना चाहिए जब संबंधित अधिकारियों की जांच, सैंपल टेस्ट और अन्य कानूनी प्रक्रिया से आरोप साबित हों। आटा रोजाना खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों में शामिल है, इसलिए इसकी गुणवत्ता को लेकर जागरूक रहना जरूरी है।