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सिर्फ उम्र नहीं, ये 3 चीजें भी बढ़ा सकती हैं डिमेंशिया का खतरा! स्टडी में हुआ खुलासा

  • Edited By Monika,
  • Updated: 20 Aug, 2026 03:53 PM
सिर्फ उम्र नहीं, ये 3 चीजें भी बढ़ा सकती हैं डिमेंशिया का खतरा! स्टडी में हुआ खुलासा

नारी डेस्क : बढ़ती उम्र के साथ भूलने की समस्या आम हो सकती है, लेकिन अगर याददाश्त लगातार कमजोर होने लगे और इसका असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगे, तो यह डिमेंशिया का संकेत हो सकता है। डिमेंशिया सिर्फ उम्र बढ़ने की वजह से होने वाली समस्या नहीं है। कई स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े कारक भी इसके खतरे को बढ़ा सकते हैं। हालिया शोध में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और धूम्रपान जैसे कारकों को डिमेंशिया के बढ़ते जोखिम से जोड़ा गया है। लंबे समय तक ये समस्याएं रहने पर शरीर की रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव मस्तिष्क के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

डायबिटीज, बीपी और स्मोकिंग से क्यों बढ़ता है डिमेंशिया का खतरा?

डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और धूम्रपान तीनों ही हृदय और रक्त वाहिकाओं के लिए नुकसानदायक माने जाते हैं। अगर लंबे समय तक ब्लड शुगर या ब्लड प्रेशर नियंत्रित न रहे, तो रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। मस्तिष्क को सही तरीके से काम करने के लिए लगातार पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन की जरूरत होती है। ऐसे में रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याएं मस्तिष्क के कामकाज को प्रभावित कर सकती हैं और डिमेंशिया के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

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स्टडी में क्या सामने आया?

अमेरिका में किए गए एथेरोस्क्लेरोसिस रिस्क इन कम्युनिटीज यानी ARIC अध्ययन में लंबे समय तक लोगों के स्वास्थ्य और हृदय संबंधी जोखिम कारकों का अध्ययन किया गया है। शोध में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और धूम्रपान जैसे कारकों तथा डिमेंशिया के बीच संबंध को देखा गया। शोध से यह संकेत मिलता है कि जिन लोगों में कई तरह के हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़े जोखिम कारक एक साथ मौजूद होते हैं, उनमें आगे चलकर डिमेंशिया का खतरा अधिक हो सकता है। यानी केवल याददाश्त पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं है। मिडिल एज से ही ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और वजन को नियंत्रित रखना भी दिमाग की सेहत के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

उम्र बढ़ने के साथ क्यों बढ़ता है खतरा?

डिमेंशिया का सबसे बड़ा ज्ञात जोखिम कारक उम्र है। उम्र बढ़ने के साथ डिमेंशिया की संभावना बढ़ती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर बुजुर्ग व्यक्ति को डिमेंशिया होगा। अगर उम्र बढ़ने के साथ किसी व्यक्ति में हाई बीपी, डायबिटीज, धूम्रपान, मोटापा या शारीरिक निष्क्रियता जैसे कई जोखिम कारक मौजूद हों, तो खतरा और बढ़ सकता है।

डिमेंशिया का खतरा कैसे कम करें?

विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइंस के मुताबिक, डिमेंशिया के कई जोखिम कारकों को नियंत्रित करके इसके खतरे को कम करने की कोशिश की जा सकती है। WHO के अनुसार, जीवनशैली और स्वास्थ्य से जुड़े कुछ ऐसे कारक हैं, जिन्हें नियंत्रित करके डिमेंशिया के जोखिम को काफी हद तक कम या देर से शुरू होने में मदद मिल सकती है।

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ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखें: अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है तो इसे नजरअंदाज न करें। नियमित रूप से बीपी की जांच करवाएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लें।

ब्लड शुगर पर नजर रखें: डायबिटीज को नियंत्रित रखना सिर्फ हृदय और किडनी के लिए ही नहीं, बल्कि दिमाग की सेहत के लिए भी जरूरी है। ब्लड शुगर की नियमित जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार खान-पान और दवाओं का पालन करें।

म्रपान छोड़ दें: स्मोकिंग रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ाती है। इसलिए डिमेंशिया के जोखिम को कम करने के लिए धूम्रपान छोड़ना भी एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

रोजाना शारीरिक रूप से एक्टिव रहें: लंबे समय तक बैठे रहने की बजाय रोजाना कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए निकालें। तेज चलना, साइकिल चलाना, तैराकी या अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना फायदेमंद हो सकता है।

वजन और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करें: मोटापा और हाई कोलेस्ट्रॉल हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी कई समस्याओं का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसलिए संतुलित डाइट और नियमित एक्सरसाइज के जरिए वजन और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने की कोशिश करें।

वायु प्रदूषण से बचाव करें: वायु प्रदूषण को भी डिमेंशिया के संभावित जोखिम कारकों में शामिल किया गया है। प्रदूषण ज्यादा होने पर बाहर निकलते समय सावधानी बरतना और स्थानीय वायु गुणवत्ता की जानकारी रखना मददगार हो सकता है।

डिमेंशिया क्या होता है?

डिमेंशिया किसी एक बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि यह लक्षणों का एक समूह है, जिसमें व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने, भाषा, निर्णय लेने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। डिमेंशिया का सबसे आम कारण अल्जाइमर रोग है। इसके अलावा कई अन्य बीमारियां और मस्तिष्क से जुड़ी स्थितियां भी डिमेंशिया का कारण बन सकती हैं।

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डिमेंशिया के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

डिमेंशिया के लक्षण धीरे-धीरे सामने आ सकते हैं। इनमें शामिल हैं
हाल की बातें बार-बार भूलना
सामान रखकर उसकी जगह भूल जाना
जरूरी बिल या काम करना भूल जाना
अपॉइंटमेंट याद रखने में परेशानी
परिचित जगह पर रास्ता भूल जाना
बातचीत के दौरान सही शब्द खोजने में परेशानी
समस्या हल करने या निर्णय लेने में कठिनाई
रोजमर्रा के काम करने में परेशानी
व्यवहार या व्यक्तित्व में बदलाव

हालांकि, हर भूलने की समस्या डिमेंशिया नहीं होती। कभी-कभी तनाव, नींद की कमी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से भी याददाश्त प्रभावित हो सकती है। लेकिन अगर भूलने की समस्या लगातार बढ़ रही है और इसका असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगा है, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

मिडिल एज से ही रखें दिमाग की सेहत का ख्याल

डिमेंशिया से बचाव की कोशिश सिर्फ बढ़ती उम्र में ही नहीं, बल्कि मिडिल एज से शुरू की जा सकती है। ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना, धूम्रपान से बचना, नियमित व्यायाम करना, स्वस्थ वजन बनाए रखना और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना दिमाग और पूरे शरीर की सेहत के लिए जरूरी है। इसलिए अगर आप या आपके परिवार में किसी को डायबिटीज, हाई बीपी या स्मोकिंग की आदत है, तो इसे हल्के में न लें। इन समस्याओं को समय रहते नियंत्रित करना भविष्य में डिमेंशिया समेत कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

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