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मेनोपॉज के बाद क्यों बढ़ता है दिल की बीमारी का खतरा?  इन 4 तरीके से रखें दिल का ख्याल

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 06 Sep, 2025 03:32 PM
मेनोपॉज के बाद क्यों बढ़ता है दिल की बीमारी का खतरा?  इन 4 तरीके से रखें दिल का ख्याल

नारी डेस्क:  हर महिला की जिंदगी में एक समय ऐसा आता है, जब शरीर धीरे-धीरे बदलाव की ओर बढ़ता है। इस बदलाव को हम मेनोपॉज के नाम से जानते हैं। यह एक नेचुरल प्रक्रिया है, जिसमें महिलाओं के पीरियड्स हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं। हालांकि यह जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत होती है, लेकिन इसके साथ कुछ स्वास्थ्य चुनौतियाँ भी सामने आती हैं। खासकर, मेनोपॉज के बाद दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ने लगता है। यह जानना जरूरी है कि क्यों ऐसा होता है और हम कैसे अपनी और अपनों की सेहत का ख्याल रख सकते हैं। चलिए, आपको बताते हैं इसके पीछे की वजह और कुछ आसान लेकिन असरदार उपाय।

मेनोपॉज के बाद दिल की बीमारी का खतरा क्यों बढ़ता है?

जब महिलाएं मेनोपॉज की स्टेज में पहुंचती हैं, तो उनके शरीर में एक अहम हार्मोन – एस्ट्रोजन – का स्तर कम होने लगता है। यह हार्मोन सिर्फ प्रजनन से ही जुड़ा नहीं है, बल्कि यह दिल की सेहत को बनाए रखने में भी बेहद अहम भूमिका निभाता है।

एस्ट्रोजन की मौजूदगी में ब्लड वेसल्स लचीलापन बनाए रखते हैं, ब्लड प्रेशर सामान्य रहता है और शरीर में सूजन कम होती है। लेकिन जब एस्ट्रोजन की मात्रा गिरती है, तो ये सारी चीजें प्रभावित होती हैं – जिससे हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल असंतुलन और यहां तक कि स्ट्रोक तक का खतरा बढ़ सकता है।

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 हेल्दी डाइट – दिल का सबसे सच्चा दोस्त

जैसे हमारे शरीर को रोज़ पानी की जरूरत होती है, वैसे ही हमारे दिल को सही पोषण की जरूरत होती है। मेनोपॉज के बाद खानपान में थोड़े बदलाव करना जरूरी हो जाता है। आपको ऐसे खाने को अपनी थाली में शामिल करना चाहिए, जो दिल को मजबूत बनाए।

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हर दिन की शुरुआत ऐसे करें, जिसमें प्लेट में हों ताजे फल और सब्जियां, ओट्स, ब्राउन राइस, और मल्टीग्रेन जैसी चीजें प्रोटीन के लिए दालें, लो-फैट दूध, टोफू या अंडे हेल्दी फैट्स जैसे अलसी के बीज, बादाम, अखरोट, और जैतून का तेल , कोशिश करें कि ज्यादा तला-भुना, पैकेज्ड फूड और मीठा खाने से परहेज करें। क्योंकि ये चीजें दिल पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती हैं।

एक्सरसाइज – हर उम्र में जरूरी है हरकत

मेनोपॉज के बाद शरीर सुस्त पड़ सकता है। लेकिन यही समय है जब हमें खुद को एक्टिव बनाए रखना होता है। रोज़ की थोड़ी सी फिजिकल एक्टिविटी दिल को मजबूत बनाती है और मूड को भी अच्छा रखती है। अगर आप शुरुआत कर रही हैं, तो रोज़ 20-30 मिनट की ब्रिस्क वॉक (तेज चाल से चलना) से शुरुआत करें। इसके बाद धीरे-धीरे योग, साइक्लिंग, स्विमिंग या हल्की दौड़ जैसी चीजों को अपनी रूटीन में शामिल करें। अच्छा यह होगा कि हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की मध्यम एक्सरसाइज करें। यह न सिर्फ दिल को, बल्कि आपके हड्डियों, मसल्स और नींद को भी बेहतर बनाएगा।

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 रेगुलर हेल्थ चेकअप – वक्त रहते सचेत होना जरूरी

कई बार हम खुद को ठीक-ठाक मानते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर कुछ गड़बड़ चल रही होती है। इसलिए मेनोपॉज के बाद नियमित मेडिकल जांच कराना बेहद जरूरी हो जाता है।

डॉक्टरों की सलाह के अनुसार

ब्लड प्रेशर: हर 2 साल में एक बार

कोलेस्ट्रॉल लेवल: हर 5 साल में

ब्लड शुगर: हर 3 साल में

अगर फैमिली में पहले से हार्ट डिजीज या डायबिटीज का इतिहास रहा है, तो ये टेस्ट और भी जरूरी हो जाते हैं। साथ ही, वजन पर भी ध्यान दें। मोटापा खुद एक बड़ा रिस्क फैक्टर है।

 तनाव कम करें – सुकून में ही है सच्ची सेहत

मेनोपॉज एक शारीरिक ही नहीं, मानसिक बदलाव भी है। इस समय कई महिलाएं मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन, अकेलापन या डिप्रेशन जैसी भावनाओं से भी जूझती हैं। ये सभी बातें दिल की सेहत पर बुरा असर डाल सकती हैं। , खुद को मेंटली स्ट्रॉन्ग और पॉजिटिव बनाए रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए

हर दिन थोड़ी देर मेडिटेशन करें

योग या प्राणायाम करें

अपने पसंद की चीजों में समय बिताएं (जैसे किताबें पढ़ना, गार्डनिंग, पेंटिंग आदि)

परिवार और दोस्तों से बात करते रहें

साथ ही, स्मोकिंग और शराब की आदत अगर है, तो इसे धीरे-धीरे छोड़ने की कोशिश करें। क्योंकि ये दोनों चीजें सीधे तौर पर दिल की बीमारियों को बढ़ावा देती हैं।

PunjabKesariएक नई शुरुआत – अपनी सेहत को दें प्राथमिकता

मेनोपॉज कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक जीवनचक्र है। लेकिन यह समय है सतर्क होने का, खुद को समझने का और सेहत को पहली प्राथमिकता देने का। दिल की सेहत का ख्याल रखना सिर्फ आपकी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक प्यार भरा निवेश है – अपने परिवार, अपनों और खुद के लिए।

आज अगर आपने एक छोटा कदम भी लिया – जैसे हेल्दी खाना खाना या 15 मिनट की वॉक – तो यही कदम कल आपको किसी बड़ी बीमारी से बचा सकता है। अपने शरीर की सुनिए, और उसे वह दीजिए जिसकी उसे ज़रूरत है।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी हेल्थ से जुड़ी समस्या में डॉक्टर से सलाह लेना हमेशा जरूरी है   -

 

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