नारी डेस्क : महिलाओं को हर महीने पीरियड्स आते हैं, जिसके दौरान पेट दर्द, थकान, मूड स्विंग्स और ब्लीडिंग जैसी परेशानियां हो सकती हैं। लेकिन क्या पुरुषों को भी महिलाओं की तरह हर महीने पीरियड्स आते हैं? सोशल मीडिया और इंटरनेट पर अक्सर “Male Periods” और “Irritable Male Syndrome” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस दावे में कितनी सच्चाई है। दरअसल, पुरुषों को महिलाओं की तरह मासिक धर्म नहीं होता। पुरुषों में गर्भाशय और मासिक धर्म चक्र नहीं होता, इसलिए उन्हें पीरियड्स के दौरान होने वाली ब्लीडिंग भी नहीं होती। हालांकि, पुरुषों के शरीर में टेस्टोस्टेरोन समेत कई हार्मोन्स के स्तर में उतार-चढ़ाव जरूर हो सकता है, जिसकी वजह से कुछ लोगों को थकान, चिड़चिड़ापन या मूड में बदलाव जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।
क्या पुरुषों को भी आते हैं पीरियड्स?
सीधे शब्दों में कहें तो नहीं। पुरुषों में महिलाओं जैसा मासिक धर्म चक्र नहीं होता। महिलाओं में पीरियड्स प्रजनन चक्र का हिस्सा हैं, जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत झड़ने के कारण रक्तस्राव होता है। पुरुषों में ऐसा कोई जैविक चक्र नहीं होता। इसलिए “Male Menstruation” या “Male Periods” को वास्तविक पीरियड्स कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।

फिर क्या है Irritable Male Syndrome?
Irritable Male Syndrome (IMS) एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल कुछ पुरुषों में चिड़चिड़ापन, तनाव, मूड में बदलाव और थकान जैसे लक्षणों के लिए किया जाता है। इसे कई बार सोशल मीडिया पर “पुरुषों के पीरियड्स” के रूप में बताया जाता है, लेकिन यह महिलाओं के मासिक धर्म का पुरुष संस्करण नहीं है। पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर उम्र, तनाव, नींद, स्वास्थ्य और जीवनशैली जैसे कई कारणों से बदल सकता है। इन बदलावों के साथ कुछ शारीरिक या मानसिक लक्षण महसूस हो सकते हैं।
पुरुषों में कौन-कौन से बदलाव दिख सकते हैं?
हार्मोनल बदलाव या अन्य कारणों से पुरुषों में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
इनमें शामिल हैं, चिड़चिड़ापन और मूड में बदलाव
थकान या ऊर्जा की कमी
नींद में बदलाव, तनाव और बेचैनी
ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
यौन संबंध में बदलाव
भूख में बदलाव
कमजोरी या सुस्ती महसूस होना
हालांकि, इन सभी लक्षणों का कारण सिर्फ टेस्टोस्टेरोन में बदलाव हो, यह जरूरी नहीं है।
तनाव, नींद की कमी, खराब खानपान, ज्यादा काम और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं।

पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का क्या काम है?
टेस्टोस्टेरोन पुरुषों के शरीर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला हार्मोन है। यह यौन संबंध, मांसपेशियों, हड्डियों, लाल रक्त कोशिकाओं और प्रजनन स्वास्थ्य समेत कई शारीरिक प्रक्रियाओं से जुड़ा है। टेस्टोस्टेरोन का स्तर पूरे जीवन में एक जैसा नहीं रहता। उम्र बढ़ने के साथ इसमें धीरे-धीरे बदलाव हो सकता है। तनाव, नींद की कमी, मोटापा, कुछ बीमारियां और कुछ दवाएं भी इसके स्तर को प्रभावित कर सकती हैं।
महिलाओं के पीरियड्स और पुरुषों के हार्मोनल बदलाव में क्या अंतर है?
महिलाओं में पीरियड्स एक नियमित प्रजनन चक्र का हिस्सा हैं। इसमें गर्भाशय की परत झड़ती है और ब्लीडिंग होती है। पुरुषों में ऐसा कोई मासिक प्रजनन चक्र नहीं होता। हालांकि, थकान, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स और ऊर्जा में कमी जैसे कुछ लक्षण दोनों में दिखाई दे सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पुरुषों को भी पीरियड्स आते हैं। अगर किसी पुरुष को लंबे समय से अत्यधिक थकान, कमजोरी, सेक्स ड्राइव में कमी, लगातार मूड में बदलाव, नींद की समस्या या अन्य असामान्य लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो इसे सिर्फ “मेल पीरियड्स” समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षणों के पीछे हार्मोनल समस्या के अलावा कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच और उचित सलाह लेना बेहतर है।

नोट: पुरुषों को महिलाओं की तरह पीरियड्स नहीं आते। हां, पुरुषों के शरीर में टेस्टोस्टेरोन और अन्य हार्मोन्स में उतार-चढ़ाव हो सकता है, जिससे मूड, ऊर्जा और व्यवहार में बदलाव महसूस हो सकते हैं। इसलिए “Male Periods” या “Male Menstruation” को वास्तविक मासिक धर्म के रूप में समझना सही नहीं है।