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Nari

Health को लेकर भारतीयों का Report Card,  हफ्ते में 30 मिनट भी अपनी सेहत का नहीं रख रहे ख्याल

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 07 Apr, 2026 05:15 PM
Health को लेकर भारतीयों का Report Card,  हफ्ते में 30 मिनट भी अपनी सेहत का नहीं रख रहे ख्याल

नारी डेस्क:   एक सर्वेक्षण में मंगलवार को दावा किया गया है कि "42.5 प्रतिशत" भारतीय व्यस्त समय में अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं और "57.8 प्रतिशत" का कहना है कि उन्हें पता है कि उनके लिए क्या अच्छा है, लेकिन वे इसका नियमित रूप से पालन करने में असमर्थ हैं। यह सर्वे स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और वास्तव में अमल करने के बीच अंतर को उजागर करता है। 
 

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 महानगरों में रहने वालों का किया सर्वे

वेलनेस प्लेटफॉर्म 'हैबिल्ड' के आंकड़े-आधारित अध्ययन में देश के महानगरों और बड़े शहरों से 5,000 से अधिक लोगों के उत्तर शामिल हैं। यह सर्वे विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर किया गया। अध्ययन में यह भी पाया गया कि "46 प्रतिशत" प्रतिभागी सक्रियता के माध्यम से फिट रहने की कोशिश करते हैं, लेकिन नियमितता बनाए रखने में असफल रहते हैं। करीब 90 प्रतिशत प्रतिभागी 45 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाएं थीं। रिपोर्ट में कहा गया- "57.8 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि वे जानते हैं कि उनके स्वास्थ्य के लिए क्या अच्छा है, लेकिन इसे कायम रखने में असमर्थ हैं। 

 
जीवनशैली संबंधी दबाव नहीं रहने देता स्वस्थ

46 प्रतिशत सक्रिय तौर पर फिट रहने की कोशिश करते हैं, लेकिन नियमित रूप से ऐसा नहीं कर पाते। इसका अर्थ है कि चुनौती अब जागरूकता की नहीं, बल्कि स्वस्थ आदतों को रोजमर्रा के जीवन में शामिल करने की है।" सर्वे में रोजमर्रा के समझौते जैसे व्यायाम छोड़ना, घर के काम के कारण टहलने में देरी करना, या नींद में कटौती करना स्वास्थ्य को प्राथमिकताओं की सूची में नीचे रखने के उदाहरण बताए गए हैं। अध्ययन में लिंग-विशिष्ट बाधाओं का भी खुलासा हुआ। महिलाओं में परिवार और घरेलू जिम्मेदारियों के कारण स्वास्थ्य को कम प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति अधिक पाई गई, जिससे उनकी दिनचर्या असंगत हो जाती है, जबकि पुरुषों के मामले में उच्च इच्छाशक्ति होने के बावजूद अनुशासन और पालन में कठिनाई आती है। जीवनशैली संबंधी दबाव स्वास्थ्य बनाए रखने में मुख्य बाधाएं बने हुए हैं। 
 

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जागरूक होकर भी लापरवाह हैं भारतीय

सर्वे में "28 प्रतिशत" प्रतिभागियों ने परिवार की जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी। "19.6 प्रतिशत" ने कार्य संबंधी तनाव और "17.5 प्रतिशत" ने प्रेरणा की कमी को स्वास्थ्य को प्राथमिकता न देने का प्रमुख कारण बताया। अध्ययन में कहा गया- "दस में से एक भारतीय ने बताया कि वह अपने स्वास्थ्य पर सप्ताह में 30 मिनट भी नहीं देता। इससे साफ है कि प्रतिस्पर्धी प्राथमिकताओं के बीच स्वास्थ्य किस हद तक उपेक्षित होता है।'' सर्वेक्षण ने रोकथाम आधारित स्वास्थ्य (प्रीवेन्टिव हेल्थ) के प्रति बढ़ती जागरूकता की ओर भी संकेत किया। इसमें कहा गया है "51.5 प्रतिशत" प्रतिभागियों का मानना है कि आने वाले दशक में जीवनशैली संबंधी रोग भारत के लिए सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती होंगे, जबकि "27.4 प्रतिशत" ने मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ती चिंता के रूप में पहचाना।'' 

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