नारी डेस्क : कई बार जिंदगी में घटा कोई बुरा अनुभव, असफलता या किसी की कही हुई बात हमारे मन पर इतनी गहरी छाप छोड़ देती है कि हम चाहकर भी उसे भुला नहीं पाते। धीरे-धीरे वही बातें बार-बार दिमाग में घूमने लगती हैं और निगेटिव थॉट्स का रूप ले लेती हैं। मन में बैठा डर और नकारात्मक सोच न सिर्फ आत्मविश्वास को कमजोर करती है, बल्कि व्यक्ति को हर परिस्थिति में केवल बुराई और असफलता ही नजर आने लगती है। अगर आप भी किसी पुराने डर, चिंता या लगातार आने वाले निगेटिव विचारों से परेशान हैं, तो एक आसान मानसिक अभ्यास आपकी सोच को बदलने में मदद कर सकता है।
मन में बैठे डर को कैसे पहचानें?
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी डर या नकारात्मक सोच से छुटकारा पाने का पहला कदम उसे पहचानना है। यदि कोई बात बार-बार आपको परेशान कर रही है, तो उसे कागज पर लिखें। फिर खुद से पूछें।
क्या यह डर वास्तविक है?
क्या यह केवल किसी पुराने अनुभव का असर है?
क्या इसमें मेरी गलती थी या किसी और की?
क्या आज भी वह स्थिति वैसी ही है?
जब आप अपने डर का तर्कसंगत विश्लेषण करते हैं, तो दिमाग धीरे-धीरे उसे वास्तविक खतरे की बजाय एक पुराने अनुभव के रूप में स्वीकार करने लगता है।

क्या कहती है साइको साइबरनेटिक्स?
प्रसिद्ध लेखक और प्लास्टिक सर्जन डॉ. मैक्सवेल माल्ट्ज़ ने अपनी किताब The New Psycho-Cybernetics: The Science of Self-Improvement में बताया है कि हमारा मस्तिष्क वर्तमान में काम करता है। यदि हम उसे किसी डर या नकारात्मक सोच के खिलाफ तार्किक प्रमाण देते हैं, तो वह पुरानी मानसिक प्रोग्रामिंग (Programming) को बदलना शुरू कर देता है।
15 दिनों तक करें यह आसान अभ्यास
डॉ. माल्ट्ज़ ने अपनी किताब में एक सेल्समैन का उदाहरण दिया है, जो हमेशा खुद को बदकिस्मत मानता था और अपने चेहरे को लेकर हीन भावना से ग्रस्त था। वह प्लास्टिक सर्जरी करवाना चाहता था। सर्जरी से पहले डॉक्टर ने उसे 15 दिनों का एक अभ्यास करने को कहा। निर्देश बेहद सरल था। जब भी मन में कोई निगेटिव थॉट या हीन भावना आए, तुरंत "कैंसिल" बोलें। यह प्रक्रिया ठीक वैसे ही है जैसे आप अपने मोबाइल में किसी अनचाहे मैसेज को डिलीट कर देते हैं। हर बार "कैंसिल" कहने से दिमाग उस नकारात्मक विचार को आगे बढ़ने से पहले ही रोकने का अभ्यास करने लगता है।

क्या मिला परिणाम?
15 दिनों तक इस अभ्यास को करने के बाद उस सेल्समैन के सोचने का तरीका बदलने लगा। उसके मन में आने वाले नकारात्मक विचार कम हो गए और आत्मविश्वास बढ़ने लगा। जब वह दोबारा डॉक्टर के पास पहुंचा, तो उसे प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत ही महसूस नहीं हुई।
क्यों असरदार हो सकता है यह तरीका?
नकारात्मक विचारों की श्रृंखला टूटती है।
दिमाग को नया मानसिक संकेत मिलता है।
आत्मविश्वास बढ़ने लगता है।
पुराने डर और हीन भावना का प्रभाव कम हो सकता है।
सकारात्मक सोच विकसित करने में मदद मिलती है।

ध्यान रखें : यदि नकारात्मक विचार बहुत ज्यादा हों, लगातार चिंता, घबराहट, अवसाद या आत्महानि जैसे विचार आते हों, तो केवल स्वयं-सहायता तकनीकों पर निर्भर न रहें। किसी योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।