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अब पेट के कीड़े रखेंगे शरीर का ख्याल, वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाली नई तकनीक

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 16 Jun, 2026 10:27 AM
अब पेट के कीड़े रखेंगे शरीर का ख्याल, वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाली नई तकनीक

नारी डेस्क: पेट के कीड़ों की बहुत बुरी छवि है। यह सोचना ही बहुत बुरा लगता है कि वे हमारे शरीर के अंदर घूमते हैं और हमें अंदर से खाते रहते हैं। लेकिन सिर्फ़ 100 साल पहले जब टॉयलेट और नल का पानी आम नहीं था तब हर किसी को पेट के कीड़ों का सामना करना पड़ता था। आज इंडस्ट्रियलाइज़्ड दुनिया में लोगों के शरीर से लगभग सभी कीड़े खत्म हो चुके हैं, बस कुछ बच्चों में कभी-कभार हुकवर्म  देखने को मिलते हैं।  पर क्या आप जानते हैं ये कीड़े शरीर को फायदा भी दे सकते हैं। 

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कीड़े के डीएनए में बदलवा

वैज्ञानिकों ने तकनीक के जरिये कीड़े के डीएनए में बदलाव कर दिया, जिससे वह शरीर में रहकर जानलेवा जहर के खिलाफ एंटीबॉडी बना सकता है। वैज्ञानिकों ने क्रिस्पर जीन-एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसमें हुकवॉर्म के अंडों के डीएनए में बदलाव करके एक जीन डाला। यह दुनिया के सबसे खतरनाक जहरों में से एक 'टेट्रोडोटॉक्सिन' को बेअसर करने वाली एंटीबॉडी बनाने में सक्षम रहा। शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब इन जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) कीड़ों को चूहों की एक प्रजाति के शरीर में डाला गया, तो इन कीड़ों ने हैम्स्टर्स के खून में सीधे इस एंटीटॉक्सिन को रिलीज किया, जिसने लैब टेस्ट में उस खतरनाक जहर को आंशिक रूप से बेअसर कर दिया।


एलर्जी को देगा मात

दावा किया जा रहा है कि कीड़ों को शरीर के अंदर इलाजों के लिए लिविंग ड्रग फैक्ट्री की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। जेम्स कुक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता एलेक्स लूकास ने बताया कि हुकवॉर्म ने लाखों वर्षों में यह महारत हासिल किया। इसने  दुनिया का सबसे खतरनाक जहर का एंटीबॉडी बनाया इन कीड़ों से पेट के अंदर बहुत ही कम मात्रा में फूड एलजेंस रिलीज करवाए जा सकते हैं, जिससे बच्चों का शरीर मूंगफली या अन्य चीजों की एलर्जी के प्रति प्रतिरोधी हो जाएगा।

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हुकवॉर्म नहीं पहुंचाता नुकसान

हुकवॉर्म लगभग एक सेंटीमीटर लंबा होता है और दिनभर में दो बूंद से भी कम खून पीता है। ये कीड़े आपके शरीर में दो साल या उससे अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं। वैज्ञानिकों ने आश्वस्त किया है कि यह पूरी तरह सुरक्षित है। हुकवॉर्म की एक जैविक खासियत है कि वे शरीर के अंदर अंडे तो देते हैं, लेकिन अंडे फूटते नहीं। टॉयलेट के जरिए शरीर से बाहर निकलते हैं। इसलिए पेट के अंदर कीड़ों की संख्या कभी बेकाबू नहीं होगी।
 

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