नारी डेस्क: दिल की बीमारियां आज दुनिया भर में मौत की सबसे बड़ी वजह बन चुकी हैं। खराब लाइफस्टाइल, तनाव और अनहेल्दी खानपान की वजह से शरीर में बढ़ने वाला बैड कोलेस्ट्रॉल यानी LDL धीरे-धीरे धमनियों में जमने लगता है, जिससे हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। लेकिन अब वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च ने इस खतरे को कम करने की उम्मीद जगा दी है। हाल ही में सामने आई एक स्टडी में दावा किया गया है कि नई जीन थेरेपी शरीर में मौजूद खराब कोलेस्ट्रॉल को तेजी से कम करने में मदद कर सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह थेरेपी भविष्य में हार्ट डिजीज के इलाज का तरीका पूरी तरह बदल सकती है।
क्या है नई Gene Therapy VERVE-102
इस नई थेरेपी का नाम VERVE-102 है। रिसर्च के मुताबिक यह थेरेपी लिवर में मौजूद PCSK9 नाम के जीन को बंद कर देती है। यही जीन शरीर में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। जब यह जीन एक्टिव रहता है तो शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता है। नई थेरेपी इसी जीन को टारगेट करके LDL को तेजी से कम करने का काम करती है। सबसे खास बात यह है कि यह थेरेपी गुड कोलेस्ट्रॉल को प्रभावित नहीं करती।

कितनी असरदार साबित हुई ये थेरेपी
रिसर्च में शामिल मरीजों पर इसका असर काफी सकारात्मक देखा गया। वैज्ञानिकों के अनुसार, हाई डोज लेने वाले मरीजों में खराब कोलेस्ट्रॉल लगभग 62 प्रतिशत तक कम हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई मरीजों में यह असर एक साल तक बना रहा। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर आगे के ट्रायल्स में भी यही नतीजे सामने आते हैं तो भविष्य में लोगों को रोजाना कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने वाली दवाइयों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
किन मरीजों पर किया गया ट्रायल
इस रिसर्च में कुल 35 मरीजों को शामिल किया गया था। इन सभी को फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया नाम की बीमारी थी। यह एक ऐसी जेनेटिक समस्या है जिसमें शरीर में बहुत ज्यादा खराब कोलेस्ट्रॉल बनने लगता है और कम उम्र में ही हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों ने मरीजों को अलग-अलग मात्रा में थेरेपी दी और फिर उनके कोलेस्ट्रॉल लेवल को मॉनिटर किया। जिन लोगों को हाई डोज दी गई, उनमें सबसे ज्यादा सुधार देखने को मिला।
कैसे काम करती है यह तकनीक
इस थेरेपी में Base Editing Technology का इस्तेमाल किया गया है। यह एक आधुनिक जीन एडिटिंग तकनीक है, जो DNA में बहुत सटीक बदलाव कर सकती है। यह तकनीक शरीर के उस हिस्से को टारगेट करती है जो खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में भूमिका निभाता है। डॉक्टरों का कहना है कि यह इलाज भविष्य में कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में बड़ी क्रांति ला सकता है।
डॉक्टरों ने कहा
डॉक्टरों के मुताबिक यह रिसर्च कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम है। उनका कहना है कि अगर लंबे समय तक इसकी सुरक्षा और प्रभाव साबित हो जाता है, तो यह हार्ट डिजीज के इलाज का तरीका बदल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन मरीजों में दवाइयों के बावजूद कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल नहीं हो पाता, उनके लिए यह थेरेपी भविष्य में बड़ी राहत बन सकती है।

हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण है खराब कोलेस्ट्रॉल
डॉक्टरों के अनुसार शरीर में बढ़ता LDL कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे धमनियों में ब्लॉकेज पैदा करता है। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और कार्डियक अरेस्ट जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। कई लोग नियमित दवाइयां लेने के बावजूद पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह पाते। ऐसे में यह नई थेरेपी मेडिकल साइंस के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
अभी आम लोगों के लिए उपलब्ध है ये इलाज
फिलहाल यह थेरेपी शुरुआती रिसर्च और ट्रायल के दौर में है। अभी इसे आम मरीजों के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया है। कंपनी ऐली लिली ने जानकारी दी है कि इस साल इसके Phase-2 Clinical Trials शुरू किए जाएंगे। अगर आने वाले ट्रायल सफल रहते हैं तो आने वाले वर्षों में यह इलाज हार्ट डिजीज के मरीजों के लिए नई उम्मीद बन सकता है।
हेल्दी लाइफस्टाइल अभी भी है सबसे जरूरी हालांकि नई थेरेपी को लेकर उत्साह जरूर है, लेकिन डॉक्टर अब भी हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने की सलाह दे रहे हैं। संतुलित खानपान, नियमित एक्सरसाइज, तनाव कम रखना और स्मोकिंग से दूरी आज भी हार्ट को स्वस्थ रखने के सबसे प्रभावी तरीके माने जाते हैं।