नारी डेस्क: अंबानी परिवार हमेशा अपने ग्रैंड और स्टाइलिश अंदाज़ के लिए सुर्खियों में रहता है, और अब इस चर्चा में शामिल हो गई हैं आकाश अंबानी की साली दीया मेहता। मेट गाला 2026 के बाद उनकी तस्वीरें लगातार वायरल हो रही हैं, जहां उन्होंने साड़ी को एक नए ग्लोबल फैशन स्टेटमेंट के रूप में पेश किया। लेकिन इस बार उनका लुक सिर्फ स्टाइल नहीं, बल्कि बंगाल की पारंपरिक और धीरे-धीरे खत्म होती जा रही “शोला आर्ट” को दुनिया के सामने लाने की एक खूबसूरत कोशिश भी बन गया।
मेट गाला में भारतीय विरासत की झलक
दीया मेहता ने मेट गाला की रेड कार्पेट पर एक खास डिजाइनर गाउन पहना था, जिसे बंगाल की शोला आर्ट से प्रेरित होकर तैयार किया गया था। इस आउटफिट ने न सिर्फ फैशन लवर्स का ध्यान खींचा, बल्कि भारतीय हस्तकला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी एक नई पहचान दी। इसी थीम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने ऑफ्टर पार्टी के लिए साड़ी चुनी, जो चर्चा का सबसे बड़ा कारण बनी।

ब्लैक साड़ी में दिखा शोला आर्ट का जादू
ऑफ्टर पार्टी के लिए दीया ने मयूर गिरोत्रा की कस्टम ब्लैक साड़ी पहनी, जिसमें पारंपरिक और मॉडर्न स्टाइल का खूबसूरत मेल देखने को मिला। साड़ी के पल्लू पर सफेद शोला आर्ट से बने मोर (पीकॉक) मोटिफ्स ने इसे बेहद खास बना दिया। हल्के 3D टेक्सचर ने इस पूरे आउटफिट को एक आर्ट पीस जैसा लुक दिया, जिसे देखकर हर किसी की नजरें टिक गईं।
ब्लाउज ने बढ़ाया लुक का रॉयल टच
दीया का ब्लाउज आइवरी टोन में था, जिसे भी शोला आर्ट से डिटेल किया गया था। स्ट्रैपी डिजाइन पर बने लीफ जैसे पैटर्न ने पूरे लुक को क्रिएटिव और रॉयल अपील दी। ब्लाउज का मिनिमल लेकिन डिटेल्ड डिजाइन, भारी साड़ी के साथ बैलेंस बनाते हुए लुक को बेहद एलीगेंट बनाए रखता है।
क्या है शोला आर्ट, जिससे सजा यह पूरा लुक?
शोला आर्ट बंगाल की एक पारंपरिक हस्तकला है, जो एक खास जलीय पौधे से तैयार की जाती है। इसके अंदर का सफेद और हल्का हिस्सा बेहद नरम होता है, जिसे आसानी से आकार देकर खूबसूरत डिजाइन बनाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे “आइवरी प्लांट” भी कहा जाता है। इस कला का इस्तेमाल खासकर पूजा-पाठ, शादी और त्योहारों में सजावट के लिए किया जाता रहा है।

क्यों खत्म होती जा रही है यह पारंपरिक कला?
हाल के वर्षों में शोला आर्ट धीरे-धीरे कम होती जा रही है। इसके पीछे कई कारण हैं। दलदली इलाकों की कमी से कच्चा माल कम होता जा रहा है। इसके अलावा इसे बनाने में समय और मेहनत ज्यादा लगती है, लेकिन आमदनी सीमित है। युवाओं की इस काम में कम रुचि और बाजार में सस्ते प्लास्टिक विकल्पों ने भी इस कला को पीछे धकेल दिया है।
सदियों पुरानी है इस कला की विरासत
शोला आर्ट का इतिहास लगभग 200 से 300 साल पुराना माना जाता है। इसकी शुरुआत बंगाल के ग्रामीण इलाकों में हुई थी, जहां मालाकार समुदाय पीढ़ियों से इसे संभालता आ रहा है। ब्रिटिश काल में यह कला और भी लोकप्रिय हुई और धार्मिक आयोजनों से लेकर शादियों तक इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होने लगा।

सादगी में भी दिखा पूरा स्टाइल स्टेटमेंट
अपने पूरे लुक में दीया मेहता ने जूलरी और मेकअप को बेहद सादा रखा। उन्होंने हैवी नेकलेस की जगह फ्लोरल स्टाइल इयररिंग्स चुने, जो आउटफिट के साथ खूबसूरती से मेल खाते थे। हाई पोनीटेल और न्यूड मेकअप ने उनके पूरे लुक को और भी क्लीन और ग्रेसफुल बना दिया।