नारी डेस्क: गर्मी और बरसात का मौसम आते ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है, और इसके साथ ही मलेरिया का खतरा भी। आम तौर पर लोग इसे एक सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन गर्भावस्था में यही बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। इस दौरान मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों की सुरक्षा बेहद जरूरी होती है, इसलिए जरा सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है।
प्रेग्नेंसी में क्यों बढ़ जाता है खतरा?
गर्भावस्था के दौरान महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) थोड़ी कमजोर हो जाती है। यही वजह है कि इस समय किसी भी संक्रमण का असर जल्दी और ज्यादा होता है। अगर इस दौरान मलेरिया हो जाए तो यह केवल मां की सेहत ही नहीं, बल्कि बच्चे के विकास को भी प्रभावित कर सकता है।

प्रीमैच्योर डिलीवरी का बढ़ सकता है जोखिम
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रेग्नेंसी में मलेरिया होने पर समय से पहले डिलीवरी (प्रीमैच्योर बर्थ) का खतरा काफी बढ़ जाता है। मलेरिया का परजीवी खून को प्रभावित करता है, जिससे प्लेसेंटा तक सही मात्रा में ऑक्सीजन और पोषण नहीं पहुंच पाता। इसका असर सीधे बच्चे की ग्रोथ पर पड़ता है और कई मामलों में बच्चे का वजन कम रह जाता है या समय से पहले जन्म हो सकता है।
मां और बच्चे दोनों पर असर
मलेरिया सिर्फ बच्चे के लिए ही नहीं, बल्कि मां के लिए भी खतरनाक हो सकता है। तेज बुखार, कमजोरी, सिरदर्द और शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह एनीमिया (खून की कमी) का कारण भी बन सकता है। मां की सेहत बिगड़ने से बच्चे पर भी नकारात्मक असर पड़ता है, इसलिए किसी भी लक्षण को हल्के में लेना सही नहीं है।
किन लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें?
अगर गर्भवती महिला को बार-बार बुखार आना, ठंड लगना, पसीना आना, सिरदर्द या अत्यधिक थकान महसूस हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच और इलाज से बड़ी समस्या से बचा जा सकता है।

बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
प्रेग्नेंसी में मलेरिया से बचना ही सबसे सुरक्षित तरीका है। इसके लिए कुछ आसान सावधानियां अपनाई जा सकती हैं घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, शाम के समय विशेष सावधानी बरतें साथ ही, बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा लेने से बचें।