
नारी डेस्क: क्या मोबाइल फ़ोन से ब्रेन ट्यूमर हो सकता है? इस सवाल ने दशकों से बहस और चिंता को जन्म दिया है। दुनिया भर में अरबों लोग रोजाना अपने फ़ोन को सिर के पास रखते हैं, इसलिए यह जानना ज़रूरी है कि विज्ञान असल में क्या कहता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) ने बड़े पैमाने पर रिसर्च की समीक्षा (रिव्यू) पब्लिश की। इसमें पाया गया कि सेल फ़ोन के इस्तेमाल और ब्रेन कैंसर होने के बढ़ते जोखिम के बीच कोई संबंध नहीं है, यहां तक कि उन लोगों में भी नहीं जो सबसे ज़्यादा सेल फ़ोन इस्तेमाल करते हैं।
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आखिर चिंता क्यों थी?
रेडियो तरंगें जिन्हें रेडियोफ़्रीक्वेंसी (RF) रेडिएशन भी कहा जाता है हर जगह मौजूद हैं। सेल फोन, मोबाइल फोन टावर, वाई-फ़ाई कनेक्शन, रेडियो और टीवी ट्रांसमिशन, GPS सिस्टम, बेबी मॉनिटर और दूसरे वायरलेस इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस RF रेडिएशन छोड़ते हैं। जबकि दूसरे तरह के रेडिएशन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कैंसर वाले ट्यूमर बना सकते हैं, RF रेडिएशन को आम तौर पर लोगों के लिए नुकसानदायक नहीं माना जाता है। क्योंकि कॉल करते समय हम मोबाइल फ़ोन को अपने सिर के बहुत पास रखते हैं, इसलिए चिंता यह रही है कि लंबे समय तक सिर और गर्दन के सेल फ़ोन रेडिएशन के संपर्क में रहने से समय के साथ ट्यूमर बन सकते हैं।
रिसर्च में क्या कहा गया?
WHO के विश्लेषण में, विशेषज्ञों ने 5,000 से ज़्यादा स्टडीज की समीक्षा की। इन स्टडीज में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से निकलने वाले रेडिएशन और सिर व गर्दन के कैंसर के जोखिम के बीच संभावित संबंध की जांच की गई थी। समीक्षा करने वालों ने पाया कि यह जोखिम नहीं बढ़ा, यहां तक कि उन सेल फ़ोन यूज़र्स में भी नहीं जिन्होंने: सबसे लंबे समय (10 साल या उससे ज़्यादा) तक सेल फोन का इस्तेमाल किया। सेल फोन पर सबसे ज़्यादा समय बिताया। पिछले दो दशकों में हुई स्टडीज में सेल फ़ोन और ब्रेन कैंसर के बढ़ते जोखिम के बीच संबंध दिखाने वाला शायद सबसे मज़बूत सबूत कुछ खास तरह के नॉन-कैंसरस (कैंसर न बनाने वाले) ब्रेन ट्यूमर के लिए था। लेकिन उन ट्यूमर के प्रकारों के मामले में भी, हालिया समीक्षा में कोई बढ़ा हुआ जोखिम नहीं पाया गया।
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रेडिएशन को लेकर है लोगों में डर
हालांकि रेडियोफ़्रीक्वेंसी के संपर्क में आने और सेहत पर इसके संभावित असर को लेकर शोध जारी है, लेकिन मौजूदा सबूतों से यह साबित नहीं होता है कि मोबाइल फ़ोन टावर के पास रहने या सेलफ़ोन का इस्तेमाल करने से ब्रेन ट्यूमर होता है। मोबाइल फ़ोन ब डर अक्सर इसलिए पैदा होता है क्योंकि लोग सभी तरह के रेडिएशन को एक जैसा नुकसानदायक मान लेते हैं। हालांकि, अलग-अलग तरह के रेडिएशन का एनर्जी लेवल और बायोलॉजिकल असर अलग-अलग होता है। मोबाइल फ़ोन और टावर से निकलने वाली रेडियोफ़्रीक्वेंसी एनर्जी नॉन-आयोनाइज़िंग होती है और इसमें आयोनाइज़िंग रेडिएशन की तरह DNA को नुकसान पहुंचाने वाले गुण नहीं होते हैं। इसलिए, यह दावा कि मोबाइल फ़ोन टावर या सेलफ़ोन के इस्तेमाल से ब्रेन ट्यूमर होता है, मौजूदा वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर एक मिथक है।