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पैरों में कंपन या दर्द को ना करें अनदेखा, बड़ी बीमारी का संकेत

  • Edited By Anjali Rajput,
  • Updated: 02 Mar, 2019 06:56 PM
पैरों में कंपन या दर्द को ना करें अनदेखा, बड़ी बीमारी का संकेत

अक्सर उम्रदराज लोगों के पैर में कंपन और पिंडियों में हल्की जलन महसूस की जाती है। हालांकि यह अनुभव किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। जब हमारे साथ ऐसा होता है तो हम समझते हैं कि हमने ज्यादा काम कर लिया था या कमजोरी की वजह से यह हो रहा है। लोग इसे 'ऑस्टियोपोरोसिस' समझकर डॉक्टर की सलाह के बिना ही कैल्शियम का सेवन शुरू कर देते हैं। फिर भी उन्हें दर्द से छुटकारा नहीं मिलता क्योंकि यह एक न्यूरोलॉजिकल डिज़ीज़ है। आपको बता दें कि पैरों में कंपन, खिंचाव या दर्द की शिकायत 'न्यूरोलॉजिकल डिज़ीज़' के लक्षण होते हैं। जब शरीर में आयरन और विटामिन बी-12 की कमी हो जाती है तो यह प्रॉब्लम होने लगती है। सही समय पर इलाज ना होने पर यह प्रॉब्लम 'पार्किंसंस' में तब्दील हो सकती है इसलिए इसके लक्षणों को पहचान कर सही समय पर उपचार बेहद ज़रूरी है। 

 

क्या है वजह?

आमतौर पर पैरों की मांसपेशियों और जोड़ों को काम करने के लिए ब्रेन से तरंगे मिलती रहती है लेकिन बैठते या लेटते वक्त यह तरंगे अपने आप रूक जाती है। अगर किसी वजह से रिलेक्स करते  समय भी ये तरंगे ना रुकें तो ऐसे में पैरों में कंपन होता रहता है। ब्रेन से निकलने वाला 'हॉर्मोन डोपामाइन' इन तरंगो को कंट्रोल करता है। इसकी कमी से तरंगो का प्रवाह लगातार होता रहता है जैसे नल को ठीक से बंद न करने पर उससे लगातार पानी की बूंदे टपकती रहती हैं।

 

इसके अलावा डायबिटीज़ और किडनी के मरीज़ों को भी ऐसी समस्या हो सकती है। प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ स्त्रियों को ऐसी दिक्कत होती है, जो डिलिवरी के बाद अपने आप दूर हो जाती है। शरीर में हॉर्मोन संबंधी असंतुलन की वजह से भी उन्हें ऐसी समस्या होती है। हाई ब्लडप्रेशर के मरीज़ों में भी कई बार ऐसे लक्षण देखने को मिलते हैं। कई बार आनुवंशिक कारण भी इस समस्या के लिए जि़म्मेदार होते हैं। आयरन और विटमिन बी-12 की कमी भी इसकी प्रमुख वजह है।

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प्रमुख लक्षण

वैसे तो यह प्रॉब्लम किसी को भी हो सकती है लेकिन आमतौर पर 40 साल की उम्र के बाद ही इसके लक्षण दिखने लगते हैं। अर्थराइटिस की तरह इसमें भी पैरों में दर्द होता है लेकिन रेस्टलेस लेग सिंड्रोम होने पर दर्द के साथ कंपन, झनझनाहट और बेचैनी महसूस होती है। इससे नींद भी खराब होती है। व्यक्ति को ऐसा लगता है कि उसके पैरों के भीतर कुछ रेंग रहा है और उन्हें हिलाने से उसे थोड़ा आराम मिलता है। इसलिए ऐसे मरीज़ अनजाने में ही अपने पैर हिला रहे होते हैं। सोने या बैठने पर तकलीफ और ज्य़ादा बढ़ जाती है लेकिन उठकर चलने पर थोड़ी राहत महसूस होती है। जबकि अर्थराइटिस की स्थिति में सुबह सोकर उठने के बाद व्यक्ति के पैरों में तेज़ दर्द होता है और रात को लेटने पर आराम मिलता है।

 

इलाज

1. भोजन में हरी पत्तेदार सब्जि़यों, अंडा, चिकेन और मिल्क प्रोडक्ट्स को शामिल करें।
2. एल्कोहॉल व सिगरेट से दूर रहें क्योंकि इनके अत्यधिक सेवन से डोपामाइन की कमी हो जाती है, जिससे रेस्टलेस लेग सिंड्रोम की समस्या हो सकती है।
3. दर्द से राहत के लिए पैरों की मालिश भी कारगर साबित होती है लेकिन यह लंबे वक्त तक कारगर नहीं हो सकता।
4. ऐसे वक्त में डॉक्टर से सलाह लें और उसके सभी निर्देशों का पालन करें। 
5. डोपामाइन हॉर्मोन का स्तर बढ़ाने वाली दवाओं के नियमित सेवन से यह बीमारी दूर हो जाती है।

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