
नारी डेस्क: जब बुधवार को दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) के कर्मी आखिरकार धुएं से भरी हौज रानी इमारत में ज़बरदस्ती घुस पाए, तो उन्हें वहां तबाही के मंज़र देखने को मिले। मरने वालों में एक जोड़ा भी शामिल था, जो पहली मंजिल पर एक बंद वॉशरूम के अंदर मिला महिला टॉयलेट पर बैठी थी और पुरुष उसके बगल में था, ऐसा लग रहा था मानो उसने महिला को अपनी बाहों में भर रखा हो, और वे उस बचाव का इंतजार कर रहे थे जो कभी नहीं आया।

दमकल अधिकारियों ने बताया कि बचाव अभियान बेहद मुश्किल परिस्थितियों में शुरू किया गया। इमारत के बेसमेंट का प्रवेश द्वार एक शटर से बंद था, जिसे अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए दमकलकर्मियों को काटकर खोलना पड़ा। अधिकारी ने बताया कि उन्हें पहली मंज़िल पर एक बंद वॉशरूम के अंदर वह जोड़ा मिला। उन्होंने कहा- "हमें शक है कि उन्होंने खुद को अंदर बंद कर लिया था, यह सोचकर कि वे वहां सुरक्षित रहेंगे। महिला टॉयलेट सीट पर बैठी थी और पुरुष उसके बगल में एक कुर्सी पर बैठा था। ऐसा लग रहा था कि वह महिला मरीज़ थी और वह पुरुष उसकी देखभाल करने वाला था।"

B&B में ठहरे ज़्यादातर मेहमान या तो साकेत के पास के एक प्राइवेट अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे थे, या फिर उन रिश्तेदारों के साथ आए थे जिनका वहां इलाज चल रहा था। दमकलकर्मियों के मुताबिक, ऊपरी मंज़िलों पर मौजूद कुछ लोग तो होश में थे और उन्हें मुख्य रूप से सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, लेकिन पहली और दूसरी मंज़िल पर मौजूद कई लोग धुआं अंदर चले जाने की वजह से बेहोश पाए गए।
बुधवार को दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में लगी भीषण आग में मारे गए 21 लोगों में 17 विदेशी नागरिक शामिल थे। बताया जा रहा है कि मरने वालों में ज़्यादातर लोग लाइबेरिया, नाइजीरिया, मोज़ाम्बिक और बांग्लादेश के रहने वाले थे। आग में घायल हुए आठ मरीज़ फ़िलहाल वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। इनमें से ज़्यादातर लोगों को दम घुटने से चोटें आई हैं, जो धुएं के संपर्क में आने से होती हैं। इन सभी को मामूली चोटें आई हैं, गहरे घाव नहीं हैं। डॉक्टर ने आगे बताया कि आग से बचने के लिए ऊपरी मंज़िलों से कूदने की वजह से कई मरीज़ों की हड्डियां टूट गईं।