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अभी भी अच्छे से सुन नहीं पाती हैं अलका याग्निक, बोली- इस बीमारी के कारण नहीं कर पा रही काम

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 31 Mar, 2026 10:57 AM
अभी भी अच्छे से सुन नहीं पाती हैं अलका याग्निक, बोली- इस बीमारी के कारण नहीं कर पा रही काम

नारी डेस्क:  2024 में, जानी-मानी प्लेबैक सिंगर अलका याग्निक ने यह खुलासा करके अपने फैंस को चौंका दिया था कि वह सुनने से जुड़ी एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रही हैं, जिसके चलते उन्हें लाइमलाइट से दूर होना पड़ा। अब, अपनी सेहत से जुड़े एक नए अपडेट में, सिंगर ने बताया है कि वह अभी भी इस बीमारी से परेशान हैं। अपनी इसी बीमारी की वजह से उन्होंने कोई नया काम नहीं लिया है।  

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सालों से इस बीमारी से जूझ रही सिंगर

 एक इंटरव्यू में, सिंगर ने एक दुर्लभ बीमारी सेंसरी न्यूरल नर्व हियरिंग लॉस से अपनी लड़ाई के बारे में एक नया अपडेट दिया। रिपोर्ट में बताया गया कि सिंगर इस बारे में बात करने में हिचकिचा रही थीं, और उन्होंने यह भी माना कि वह अभी भी इस बीमारी से जूझ रही हैं। उन्होंने कहा- "कंपोज़र कभी-कभी मेरे पास आते हैं। लेकिन मैं काम नहीं कर पा रही हूं।" उनकी आवाज़ आखिरी बार इम्तियाज़ अली की फ़िल्म 'अमर सिंह चमकीला' में सुनाई दी थी, जो 2024 में रिलीज़ हुई थी। इस फ़िल्म में उन्होंने 'नरम कालजा' गाना गाया था, जिसे ए.आर. रहमान ने कंपोज़ किया था।


गायिका ने लोगों को किया अलर्ट

 इसी साल की शुरुआत में, अलका को भारत सरकार की ओर से 'पद्म भूषण' सम्मान से नवाज़ा गया था।  साल 2024 में, अलका ने इंस्टाग्राम पर बताया कि 'अचानक हुए एक वायरल अटैक' के कारण उन्हें 'एक दुर्लभ सेंसरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस' (सुनने की शक्ति में कमी) का पता चला है, जो एक वायरल अटैक की वजह से हुआ है। उन्होंने कहा था कि  यह अचानक लगा बड़ा झटका मेरे लिए पूरी तरह से अप्रत्याशित था,” । गायिका ने इसके साथ ही ‘बहुत तेज़ संगीत और हेडफ़ोन के इस्तेमाल’ के प्रति एक चेतावनी भी साझा की। अलका ने भारतीय सिनेमा के कुछ प्रमुख गानों में अपनी आवाज दी है, जैसे मोहरा का टिप टिप बरसा पानी, कयामत से कयामत तक का ऐ मेरे हमसफर, हम दिल दे चुके सनम का चांद छुपा बादल में और तमाशा का अगर तुम साथ हो।


क्या है सेंसरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस

दुर्लभ सेंसरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस (Sensorineural Hearing Loss) एक प्रकार की सुनने की समस्या है, जिसमें कान के अंदरूनी हिस्से (Inner Ear) या सुनने वाली नस (Auditory Nerve) को नुकसान हो जाता है। यह आम सुनने की समस्या से अलग और कई बार गंभीर भी हो सकती है। हमारे कान में मौजूद कॉक्लिया (Cochlea) और उससे जुड़ी नसें आवाज़ को दिमाग तक पहुंचाती हैं। जब इन हिस्सों में खराबी आ जाती है, तो आवाज़ सही तरीके से दिमाग तक नहीं पहुंच पाती इसे ही सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस कहते हैं। यह स्थिति आम तौर पर कम लोगों में देखी जाती है, खासकर:

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 इस बीमारी के  मुख्य कारण

-तेज आवाज़ (लाउड नॉइज़) में लंबे समय तक रहना
-बढ़ती उम्र (Age-related hearing loss)
-वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन
-कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट
-डायबिटीज या ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां
-जेनेटिक (वंशानुगत) कारण


इस बीमारी के लक्षण

-आवाज़ धीमी या अस्पष्ट सुनाई देना
-लोगों की बात समझने में दिक्कत (खासकर शोर में)
-कान में घंटी बजना (टिनिटस)
-अचानक सुनने की क्षमता कम हो जाना

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