
नारी डेस्क: देश भर में इस समय गणेश उत्सव की धूम है। इस उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी को विसर्जन से होता है। “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारों के बीच विदाई इस सत्य का स्मरण कराती है कि जीवन में अनित्य है, पर आस्था, सेवा और सद्भाव स्थायी मूल्य हैं जिन्हें हर वर्ष फिर से जगाना है। भक्त बप्पा को विदाई देते हुए गणपति विसर्जन करेंगे, लेकिन इसे लेकर वृंदावन के प्रेमानंद महाराज जी ने सख्त चेतावनी दी है।

जब एक भक्त ने महाराज से प्रश्न किया कि गणेश उत्सव में लोग श्रद्धा के अनुसार 3, 5, 7 या 11 दिन तक बप्पा को अपने घरों में विराजमान रखते हैं और उसके उनका विसर्जन कर देते हैं, क्यों? इस पर प्रेमानंद जी ने कहा कि भक्त पूरे उत्सव में गणपति जी की पूजा करते हैं लेकिन विसर्जन के समय मूर्तियों को नदी-तालाब में डाल देते हैं फिर जब वो किनारों पर आ जाती हैं तो उन्हें जेसीबी आदि से हटवाया जाता है। उन्होंने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा- जिसे आप इतने दिनों तक तिलक लगाकर, भोग लगाकर, आरती उतारकर पूजते हैं, उसी प्रतिमा को इस स्थिति में पहुंचा देना कहां तक सही है।

प्रेमानंद जी का कहना है कि भगवान की मूर्तियों का अपमान किसी भी रूप में नहीं होना चाहिए, यदि आपको गणेश जी या किसी भी देवी-देवता की मूर्ति का विसर्जन करना हो, तो इसके लिए एक सम्मानजनक तरीका अपनाएं, उन्होंने सुझाव दिया कि घर या किसी अन्य स्थान पर एक छोटा तालाब या कुंड बना लें, उसमें जल भरकर मूर्ति का विसर्जन करें, बाद में इस जल को पौधों में अर्पित कर दें, इससे न तो मूर्ति पर जेसीबी चलेगी व न ही किसी के पैर पड़ेंगे। प्रेमानंद जी के अनुसार , जब आपने श्रद्धा से पूजा की, तो वह मूर्ति भगवान ही है, विसर्जन के बाद भी उनकी गरिमा बनी रहनी चाहिए, यह कैसे मान लिया जाए कि पूजा पूरी होने के बाद वो भगवान नहीं रहे।