नारी डेस्क: आजकल खराब खान-पान, कम फिजिकल एक्टिविटी और लंबे समय तक बैठकर काम करने की वजह से फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर सिटिंग जॉब करने वाले लोगों में लिवर पर फैट जमा होने का खतरा बढ़ जाता है। शुरुआत में फैटी लिवर को खान-पान और लाइफस्टाइल में बदलाव करके कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन इसे लंबे समय तक नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। समस्या बढ़ने पर लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। आयुर्वेद में भी कुछ ऐसी चीजों का जिक्र मिलता है, जिन्हें लिवर की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है और जो आसानी से आपकी रसोई में मिल जाती हैं।
क्या होता है फैटी लिवर?
हमारे लिवर में थोड़ी मात्रा में फैट होना सामान्य बात है, लेकिन जब लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगे तो इसे फैटी लिवर कहा जाता है। इसके पीछे वजन बढ़ना, अनहेल्दी डाइट, शराब का सेवन, डायबिटीज और कम शारीरिक गतिविधि जैसे कई कारण हो सकते हैं। फैटी लिवर की शुरुआत में अक्सर कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए कई लोगों को इसका पता जांच के दौरान चलता है। अगर समस्या बढ़ती जाए और लिवर में सूजन या नुकसान होने लगे तो स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह और जरूरी जांच कराना भी महत्वपूर्ण है।
आंवला हो सकता है फायदेमंद
आंवले को आयुर्वेद में लंबे समय से सेहत के लिए उपयोगी माना जाता है। इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। आंवले को डाइट में शामिल करने से शरीर को एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं और यह संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है।आयुर्वेद में आंवला चूर्ण के सेवन का भी उल्लेख मिलता है। हालांकि, किसी बीमारी के इलाज के लिए इसकी मात्रा और सेवन का तरीका व्यक्ति की स्थिति के हिसाब से अलग हो सकता है। इसलिए नियमित रूप से चूर्ण लेने से पहले डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।अगर आप चाहें तो अपनी डाइट में ताजा आंवला भी शामिल कर सकते हैं।
खाने के साथ लें छाछ
छाछ गर्मियों में ही नहीं, बल्कि संतुलित डाइट का हिस्सा बनकर भी अच्छी लगती है। दोपहर के खाने के साथ सादी छाछ ली जा सकती है। इसमें थोड़ा जीरा, काली मिर्च और स्वाद के अनुसार नमक मिलाया जा सकता है। फैटी लिवर में सबसे ज्यादा जरूरी पूरी डाइट और कैलोरी का संतुलन है। इसलिए छाछ को किसी बीमारी का इलाज मानने के बजाय हेल्दी डाइट के एक विकल्प के तौर पर देखना चाहिए। विटामिन C वाले फल जैसे संतरा और नींबू भी डाइट में शामिल किए जा सकते हैं। हालांकि, इन्हें खाली पेट लेना जरूरी नहीं है। अगर किसी व्यक्ति को एसिडिटी, डायबिटीज या दूसरी स्वास्थ्य समस्या है तो उसे अपनी डाइट डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।
ग्रीन टी भी हो सकती है डाइट का हिस्सा
ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं और इसे कई लोग अपनी हेल्दी डाइट में शामिल करते हैं। कुछ शोधों में ग्रीन टी के सेवन और लिवर में फैट से जुड़े संभावित फायदे पर भी चर्चा हुई है, लेकिन इसे फैटी लिवर का पक्का इलाज नहीं माना जा सकता।अगर आप ग्रीन टी पीते हैं तो इसे बिना ज्यादा चीनी के लेना बेहतर है। साथ ही जरूरत से ज्यादा ग्रीन टी पीने से बचें।
करेले का जूस पीने से पहले रखें ध्यान
करेला पोषक तत्वों से भरपूर सब्जी है और इसे डाइट में शामिल किया जा सकता है। आयुर्वेद में करेले को भी कई स्वास्थ्य लाभों से जोड़ा जाता है। फैटी लिवर के मामले में करेले के जूस को फायदेमंद बताया जाता है, लेकिन इसके लिवर से जमा फैट को सीधे खत्म करने के दावे को पक्के इलाज की तरह नहीं लेना चाहिए। खासकर अगर आप डायबिटीज की दवा लेते हैं, तो करेले का जूस नियमित रूप से शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
हल्दी को खाने में करें शामिल
हल्दी लगभग हर भारतीय रसोई में मौजूद होती है। इसमें करक्यूमिन नामक तत्व पाया जाता है, जिसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। इसी वजह से हल्दी को सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से जुड़े कई स्वास्थ्य पहलुओं पर शोध किया गया है। फैटी लिवर में हल्दी को खाने में मसाले के तौर पर शामिल किया जा सकता है। हालांकि, हल्दी या इसके सप्लीमेंट को फैटी लिवर का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। खासतौर पर ज्यादा मात्रा में हल्दी या सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
घरेलू नुस्खों के साथ लाइफस्टाइल पर भी दें ध्यान
फैटी लिवर को कंट्रोल करने में सिर्फ एक चीज या घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहना सही तरीका नहीं है। वजन ज्यादा होने पर धीरे-धीरे वजन कम करना, रोजाना शारीरिक गतिविधि करना, तली-भुनी और ज्यादा चीनी वाली चीजों को कम करना और संतुलित डाइट लेना काफी अहम है। अगर आपको फैटी लिवर की समस्या है या रिपोर्ट में लिवर में फैट आने की बात कही गई है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच और सही डाइट प्लान अपनाएं। घरेलू चीजों को डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है, लेकिन इन्हें डॉक्टर की सलाह या इलाज का विकल्प नहीं समझना चाहिए।
Disclaimer: इस लेख में बताई गई जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी बीमारी के इलाज के लिए घरेलू नुस्खे अपनाने, डाइट में बड़ा बदलाव करने या किसी हर्बल/आयुर्वेदिक सप्लीमेंट का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।