
नारी डेस्क: गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं, जिनमें सबसे आम समस्या स्ट्रेच मार्क्स की होती है। ये पेट, जांघों, कूल्हों और कभी-कभी स्तनों के आसपास हल्की या गहरी लकीरों के रूप में दिखाई देते हैं। शुरुआत में ये गुलाबी या लाल रंग के होते हैं, लेकिन समय के साथ हल्के सफेद निशान में बदल जाते हैं। हालांकि ये स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक नहीं होते, लेकिन कई महिलाओं के लिए यह आत्मविश्वास से जुड़ी चिंता का कारण बन जाते हैं। ऐसे में इन स्ट्रेचमार्क्स से नैचुरली कैसे छुटकारा पाए चालीए आपको बताते हैं हमारे इस आर्टिकल में। .......
क्यों बनते हैं स्ट्रेच मार्क्स?
जब गर्भावस्था के दौरान शरीर तेजी से बढ़ता है, तो त्वचा की अंदरूनी परतें इस खिंचाव को पूरी तरह संभाल नहीं पातीं। इसके कारण त्वचा में छोटे-छोटे निशान बनने लगते हैं, जिन्हें स्ट्रेच मार्क्स कहा जाता है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन सही देखभाल से इन्हें काफी हद तक कम किया जा सकता है।

आयुर्वेद में स्ट्रेच मार्क्स की देखभाल
आयुर्वेद में माना जाता है कि अगर त्वचा को अंदर से पोषण और बाहर से सही देखभाल मिले, तो स्ट्रेच मार्क्स की तीव्रता को कम किया जा सकता है। इसके लिए प्राकृतिक तेल और औषधीय जड़ी-बूटियों का उपयोग काफी फायदेमंद बताया गया है। नियमित देखभाल से त्वचा की लोच बनी रहती है और सूखापन भी कम होता है।
चंदन, तुलसी और वेटिवर का उपयोग
आयुर्वेदिक उपायों में चंदन, तुलसी और वेटिवर (उशीर) का विशेष महत्व बताया गया है। इनका हल्का लेप बनाकर तेल के साथ प्रभावित जगह पर लगाने से त्वचा को ठंडक और नमी मिलती है। माना जाता है कि इससे खुजली और जलन में भी राहत मिलती है और त्वचा ज्यादा मुलायम बनी रहती है।

करंज का तेल भी है फायदेमंद
करंज के पत्तों से तैयार तेल या लेप त्वचा की लोच बनाए रखने में मदद करता है। यह त्वचा को अंदर से पोषण देता है और सूखापन कम करता है, जिससे स्ट्रेच मार्क्स बनने की संभावना कुछ हद तक घट सकती है। गर्भावस्था के दौरान नियमित हल्की मालिश से इसका बेहतर असर देखा जा सकता है।
सही आहार और हाइड्रेशन भी जरूरी
सिर्फ बाहरी देखभाल ही नहीं, बल्कि संतुलित आहार भी बेहद जरूरी है। पर्याप्त पानी, ताजे फल, हरी सब्जियां और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन त्वचा को अंदर से मजबूत बनाते हैं। जब शरीर पोषित होता है, तो त्वचा भी ज्यादा स्वस्थ रहती है और स्ट्रेच मार्क्स की संभावना कम हो जाती है। आयुर्वेद में यह भी सलाह दी जाती है कि गर्भावस्था के दौरान त्वचा को जोर से न खुजलाएं। कई बार लोग अनजाने में रगड़ देते हैं, जिससे निशान और बढ़ सकते हैं। हल्की खुजली होने पर प्राकृतिक तेल का इस्तेमाल या डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।
