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भारत में बढ़ी महिला कर्जदारों की संख्या,  Loan के सहारे बढ़ा रही हैं अपना बिजनेस

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 01 May, 2026 01:44 PM
भारत में बढ़ी महिला कर्जदारों की संख्या,  Loan के सहारे बढ़ा रही हैं अपना बिजनेस

नारी डेस्क: पढ़ाई और कारोबार के साथ- साथ लोने लेने के मामले में भी महिलाएं पुरुषों को टक्कर दे रही हैं। भारत की महिलाएं तेजी से बिजनेस में आगे बढ़ रही हैं और इसके लिए उन्हें लौन का सहारा लेना पड़ रहा है।  क्रेडिट एजेंसी क्रिफ हाई मार्क की 'ब्रिजिंग द गैप' रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 तक 12 माह में महिलाओं  की लोन लेने में  हिस्सेदारी. 41% हो गई, जो फरवरी 2022 तक 33% थी। यानी 10 में से 4 नई कर्जदार महिलाएं हैं। 


लगातार बढ़ रही है  कर्जदारों की संख्या 

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि औपचारिक क्रेडिट सिस्टम में पहली बार आने वाले कर्जदारों की संख्या लगातार बढ़ी है। फरवरी 2022 को खत्म हुए 12 महीनों में यह संख्या 3.6 करोड़ थी, जो फरवरी 2026 को खत्म हुए 12 महीनों में बढ़कर 4.4 करोड़ हो गई।  रिपोर्ट में एक मुख्य रुझान यह सामने आया है कि महिला उधारकर्ताओं की भागीदारी बढ़ रही है। पिछले पांच वर्षों में NTC खातों में इनका हिस्सा 33 प्रतिशत से बढ़कर 41 प्रतिशत हो गया है। यह बेहतर वित्तीय समावेशन और बढ़ती उद्यमशीलता गतिविधियों का संकेत है।


यहां की महिलाएं लेती हैं ज्यादा गोल्ड लोन 

रिपोर्ट के मुताबिक यूपी, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में महिलाएं उद्यमी बनने के लिए बिजनेस लोन ले रही हैं, वहीं, दक्षिण में गोल्ड लोन पर ज्यादा भरोसा किया जा रहा है। पहली बार लोन लेने वालों में से 32% वॉशिंग मशीन, फ्रिज या टीवी खरीदने के लिए लोन लेते हैं।  गोल्ड लोन लेने वालों में से 84.5% अगला लोन भी गोल्ड पर ही लेते हैं। महिलाओं की क्रेडिट तक पहुंच का दायरा लगातार बढ़ रहा है. दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों के साथ-साथ बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे उत्तरी राज्यों में भी महिलाएं बढ़-चढ़कर लोन ले रही हैं।


डिजिटल तकनीक की भी बहम भूमिका

डिजिटल तकनीक ने भी इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अब लोन लेना आसान हो गया है, प्रोसेसिंग तेज हुई है और जानकारी तक पहुंच भी बेहतर हुई है। इससे अधिक महिलाएं बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़ पाई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय पहुंच महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने का एक मजबूत आधार है। जब महिलाओं को आसानी से कर्ज मिलता है, तो वे न केवल अपने परिवार की स्थिति सुधारती हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

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