नारी डेस्क: लंबे दिन के बाद या बहुत ज़्यादा तरल पदार्थ पीने के बाद, रात में कभी-कभी पेशाब करने के लिए उठना सामान्य है। हालांकि, जब रात में बार-बार पेशाब आने की समस्या होती है और इससे नींद पर असर पड़ने लगता है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है बहुत से लोग मानते हैं कि रात में बार-बार पेशाब आना उम्र बढ़ने का ही नतीजा है। लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि यह किस तरह हो रहा है, यह मायने रखता है।। अच्छी बात यह है कि रात में बार-बार पेशाब आने की कई वजहों का इलाज संभव है।
ये है चेतावनी संकेत
डॉक्टर कहते हैं- बहुत से लोग, खासकर 40 साल की उम्र के बाद, रात में कई बार पेशाब करने के लिए उठने को सामान्य मान लेते हैं, लेकिन इसे हमेशा उम्र बढ़ने का असर मानकर नज़रअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति कभी-कभार एक बार उठता है, तो यह चिंता की बात नहीं हो सकती। लेकिन जब ऐसा हर रात दो तीन या चार बार होने लगे और इससे नींद की क्वालिटी, थकान या दिन के कामकाज पर असर पड़ने लगे, तो हमें गहराई से जांच करने की ज़रूरत है। सबसे बड़े चेतावनी संकेतों में से एक है किसी व्यक्ति की सामान्य नींद के पैटर्न में अचानक बदलाव आना। अगर कोई व्यक्ति जो पहले रात भर सोता था, अब पेशाब करने के लिए बार-बार उठने लगे, तो इस पर ध्यान देना ज़रूरी है।
रात में बार-बार पेशाब आना क्यों मायने रखता है?
नॉकटूरिया (यानी रात में पेशाब आना) नींद में खलल डाल सकता है। लंबे समय तक नींद में खलल पड़ने से ऊर्जा के स्तर, मूड और रोज़मर्रा के कामकाज पर असर पड़ सकता है। हालाँकि यह लक्षण हमेशा गंभीर नहीं होता, लेकिन कभी-कभी यह किसी ऐसी छिपी हुई समस्या का संकेत हो सकता है जिसकी जल्द जाँच होनी चाहिए।
ऐसे लक्षण जिन्हें कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए
अध्ययनों से पता चलता है कि 50 साल और उससे ज़्यादा उम्र के आधे से ज़्यादा भारतीय रात में कम से कम एक बार पेशाब करने के लिए उठते हैं। इसकी वजह का पता लगाने से जीवनशैली में सही बदलाव या स्वास्थ्य उपचार चुनने में मदद मिलती है, जिससे नींद और सेहत बेहतर होती है। अगर कोई व्यक्ति जो पहले रात भर आराम से सोता था, अचानक कई बार पेशाब करने के लिए उठने लगे, तो इस पर ध्यान देना चाहिए। बहुत ज़्यादा प्यास लगना, पेशाब में खून आना, पेशाब पर कंट्रोल कम होना, पेशाब का बहाव रुक-रुक कर होना, बिना किसी वजह के वज़न कम होना या पेल्विक एरिया में बेचैनी जैसे लक्षणों को नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए।
ये है खतरे का संकेत
शरीर आमतौर पर शुरुआत में ही हल्के चेतावनी वाले संकेत देता है। अगर रात में बार-बार पेशाब आने की समस्या बनी रहती है, और साथ में जलन, पेशाब का कमज़ोर बहाव, तुरंत पेशाब जाने की ज़रूरत, पैरों में सूजन या नींद में खलल जैसी दिक्कतें हों, तो खुद इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सही जांच करवानी चाहिए। पेशाब में खून आना, बिना वजह वज़न कम होना, तेज़ जलन या पेल्विक एरिया में लगातार दर्द को कभी भी नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए। गंभीर बीमारियों का पता लगाने के लिए इन लक्षणों की तुरंत जांच की ज़रूरत हो सकती है।
इस समस्या से बचने के आसान तरीके
-सोने से एक-दो घंटे पहले तरल पदार्थों का सेवन कम करें।
-देर दोपहर के बाद चाय और कॉफी न पिएं।
-सोने से पहले टॉयलेट जाएं।
-सोने का एक नियमित रूटीन बनाएं।
-शाम के खाने में नमक कम लें।
-सूजन होने पर रात में पैर ऊपर उठाकर रखें।
ये उपाय रात में पेशाब बनने की मात्रा को कम करने में मदद कर सकते हैं।
मेडिकल इलाज
अगर लक्षण ठीक नहीं होते हैं, तो मेडिकल मदद की ज़रूरत पड़ सकती है। डॉक्टर ये सलाह दे सकते हैं जैसे जरूरत पड़ने पर इन्फेक्शन का इलाज। ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करना, ब्लैडर ट्रेनिंग के तरीके, ज़रूरत पड़ने पर दवाएं। इलाज का तरीका समस्या की असल वजह पर निर्भर करता है। अगर पेशाब करते समय परेशानी या दर्द होता है, आपको डायबिटीज़ या कोई और पुरानी बीमारी है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। जल्दी मेडिकल सलाह लेने से कारण का पता लगाने और जटिलताओं को रोकने में मदद मिल सकती है।